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ये है 'खजाना बैंक', यहां के मैनेजर की उम्र है 12 साल

Posted On: 12 Nov, 2016 Infotainment में

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वैसे तो नमो-नमो के एक निर्णायक फैसले ने हर तबके के व्यक्ति को बैंक का दरवाजा दिखा दिया है, लेकिन एक गरीब व्यक्ति कभी बच्चों की किताबें, तो कभी बीमारी में इलाज़ के लिए पैसे की जरूरत में क़र्ज़ लेने को मज़बूर हो जाता है. अपने करीबी जनों से मदद न मिलने की स्थिति में वह निराश हो जाता है, क्योंकि उसकी निम्न आय के कारण,  कोई भी बैंक उस व्यक्ति को कुछ एक हज़ार रुपये का भी लोन प्रदान नहीं करता, इस तरह ऐसे व्यक्तियों की यह समस्या स्थायी रूप से बनी रहती है.


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छोटे आय स्तर या रोज खाने कमाने वाले व्यक्तियों की इस समस्या का समाधान खोज निकाला है भारत की बस्तियों में निवास करने वाले बच्चों ने. जिन्होंने अपने भविष्य को संवारने की आशा में ‘बाल विकास खज़ाना’ नाम से निजी बैंक स्थापित किये हैं . वैसे तो बैंक व्यवस्था बहुत जटिल होती है, लेकिन गलियों में जीवन गुजारने वाले इन बच्चों के सरल सिस्टम से बने, बैंकों की नयी सोच ने उनकी ज़िन्दगी में कुछ आराम पैदा किया है.


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स्व-स्थापित इन बैंकों में वह अपनी रोज की छोटी-छोटी बचत को जमा करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर यहाँ मौजूद रिकॉर्ड वाले बच्चो को लॉन भी उपलब्ध कराया जाता है. इस तरह का एक अनोखा बैंक नई दिल्ली में भी है जहाँ पर बच्चे अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए आते हैं. किसी काम को शुरू करने या स्कूल में कोई आवश्यकता पड़ने पर इस एकत्र धन को निकाल सकते हैं और उनकी जमा पूँजी थोड़ी होने की स्थिति में उनको 500 से 1000 रुपये तक लोन के रूप में प्रदान किये जाते हैं जिनको वह किश्तों में चुका सकता है.


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बच्चे और किशोर बालक खुद इस बैंक में काम करते हैं, जो इन खजाना बैंको की विशेषता है. भारत में खजाना बैंक की अब तक 10 ब्रांच खुल चुकी हैं. इस बैंक की दिल्ली ब्रांच के लिए चुने गए मैनेजर की उम्र 12 साल से अधिक नहीं है और वह बखूबी इस पद की जिम्मेदारियों को संभाल रहा है .


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इस बैंक के एक क्लाइंट ने एक पत्रकार को इंटरव्यू देते हुए कहा कि – “मेरा नाम मोहम्मद शाह है, मैं रात में पानी की बोतल बेचने का काम करता हूँ. अपनी बचत के कुछ पैसे यहाँ जमा करता हूँ और अब तक मैं 3 बार यहाँ से लोन ले चुका हूँ. एक बार जब मुझे स्कूल यूनिफार्म खरीदनी थी तब मैंने 500 रुपये का कर्ज बैंक से लिया था.”


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उन्होंने आगे कहा “दोबारा मेरी माँ की तबियत अचानक बिगड़ जाने पर मुझे उसका इलाज कराने के लिए पैसा लेना पड़ा और तीसरा मेरी माँ के उधार लिए गए पैसे को चुकाने के लिए. मुझे विश्वास है कि मैं अपने इस बैंक की मदद से आगे बढूंगा और एक दिन पुलिसमैन बनूँगा “. वास्तव में बच्चों का यह छोटा प्रयास निश्चित रूप से फलीभूत होगा और इन बालकों के नन्हें सपनों को एक दिन उड़ान जरूर मिलेगी. बालकों की इस अनोखी कोशिश को हमारा सलाम …Next


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