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टाइटैनिक नहीं बल्कि इस जहाज का डूबना है इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री हादसा, मरे करीब 9343 लोग

Posted On: 11 Sep, 2016 Infotainment में

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सब जानते हैं किस तरह टाइटैनिक नाम का विशाल जहाज़ समुन्द्र की गहराई में समां गया और कैसे उसका दर्दनाक अन्त हुआ. इतिहास को देखे तो अब तक अनेक जहाज़ प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हो चुके हैं. अगर किसी से सबसे बड़ी समुंद्री दुर्घटना के बारे में पूछा जाए तो निश्चित रूप से उत्तर ‘टाइटैनिक’ होगा. लेकिन यह गलत है,  क्योंकि इसके पहले 2 और जहाज़ों का नाम आता है, जिसमें से एक ‘विल्हेल्म गस्टलोफ’ है जो आज तक की सबसे भारी समुद्री तबाही का शिकार बना.


ship 1



गस्टलोफ एक जर्मन मिलट्री ट्रांसपोर्ट शिप था जो 30 जनवरी 1945 को समुंद्री हादसे का ग्रास बन गया और यह हादसा वर्ल्ड वॉर II के बाद हुआ जब जर्मन और सोवियत की सेनाओं में आमना सामना हो चुका था. 30 जनवरी की सुबह 9 बजे एडॉल्फ हिटलर जर्मन लोगों को रेडियो पर भाषण दे रहा था, लेकिन ‘पोमेरैनिया’ और ‘प्रुशिया’ के निवासी इसको न सुनकर किसी भी तरह अपनी जान बचाना चाहते थे. जिसके चलते लगभग 10,000 लोग जबरजस्ती इस शिप में सवार हो गए जिसमें सैनिक, बच्चे, महिलायें और बुजुर्ग भी शामिल थे. जैसे ही शिप पोर्ट से रवाना हुआ ‘बाल्टिक’ समुन्द्र के बीच में सोवियत की 3 खुफिया पनदुब्बीयों ने इसको हिट किया और हज़ारों टन भारी और 700 फुट लंबा यह जहाज़ समुन्द्र में पल्टी खा गया.


ship 2


समुन्द्र के पानी का टेम्परेचर -18  डिग्री सेल्शियस था और यह शिप उस बर्फ के पानी में समाता चला गया और लगभग 45 मिनट में यह जहाज पूरा डूब गया जिसमें सवार 9,343 लोग मारे गए. कुछ लोगों ने बचने का प्रयास किया तो बर्फ जैसे पानी में ही जम गए और ‘विल्हेल्म गस्टलोफ’ शिप  देखते ही देखते हमेशा के लिए नष्ट हो गया. इस शिप के बचाने के लिए 1  दर्जन राहत कार्य बोट लगाई गयी.


ship3


कुछ लोगों ने बचने का प्रयास किया तो बर्फ जैसे पानी में ही जम गए एक्सपर्ट्स मुख्य रूप से 3 कारणों को इस हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हैं एक तो कोई भी सेना का दल इसकी सुरक्षा के लिए साथ नहीं था. दूसरे जो जहाज़ पिछले 4 साल से यूज़ नहीं हुआ था उसमे इतने अधिक लोगों को क्यों सवार किया गया. तीसरा ख़ुफ़िया पनडुब्बियों को खोजने वाला कोई यन्त्र शिप में क्यों नहीं लगाया गया, न ही कोई सुरक्षा बोट का इंतज़ाम किया गय . अगर सुरक्षा के पहलुओं को ध्यान में रखा गया होता तो शायद इतने निर्दोष लोगों को जान ना गँवानी पड़ती…Next


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