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विष्णु के पुत्रों को क्यों मार डाला था भगवान शिव ने, जानिए एक पौराणिक रहस्य

Posted On: 25 Jan, 2016 Infotainment में

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अपनी सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात भगवान शिव ने समय-समय पर कई अवतारों की प्राप्ति की थी। पुराणों में भगवान शिव के कई अवतार विख्यात हैं लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे अवतार हैं जिन्हें हम प्रमुख रूप से याद करते हैं। इन्हीं प्रमुख अवतारों में से दो हैं: महेश व वृषभ। शिव के इन दो अवतारों को जानने के बाद उनकी महिमा हमारी सोच से बहुत आगे बढ़ जाती है। आइए संक्षेप में जानते हैं शंकर भगवान के इन अवतारों के बारे में:’


rudra


शिव का महेश अवतार

शिव की नगरी में उनकी पत्नी माता पार्वती के एक द्वारपाल थे जिनका नाम था भैरव। उस समय उन्हें माता पार्वती के प्रति आकर्षण हो गया था जिस कारणवश एक दिन उन्होंने माता पार्वती के महल से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। भैरव के इस व्यवहार से माता क्रोधित हो उठीं और उन्होंने उसे ‘नश्वर’ रूप में धरती पर जन्म लेने का श्राप दे दिया। धरती पर भैरव ने ‘वेताल’ के रूप में जन्म लिया और श्राप से मुक्त होने के लिए भगवान शिव के अवतार ‘महेश’ व माता पार्वती के अवतार ‘गिरिजा’ की तपस्या की।

shiva and parvati


शिव का वृषभ अवतार

शिव का यह अवतार एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने के लिए लिया गया था। वृषभ एक बैल था जिसने देवताओं को भगवान विष्णु के क्रूर पुत्रों के अत्याचारों से मुक्त करवाने के लिए पाताल लोक में जाकर उन्हें मारा था। लेकिन एक देवता के ही पुत्रों को क्यूं मारा था भगवान शिव ने?

shiva in vrishabh avtar


शिव की वृषभ अवतार लेने के पीछे मंशा क्या थी?

समुद्र मंथन के पश्चात उसमें से कई वस्तुएं प्रकट हुई थीं जैसे कि हीरे, चंद्रमा, लक्ष्मी, विष, उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, अमृत से भरा हुआ पात्र, व अन्य वस्तुएं। समुद्र से निकले उस अमृत पात्र के लिए देवताओं व दानवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था और अंत में वह पात्र दानवों के ही वश में आ गया। इसके पश्चात उस पात्र को पाने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु की मदद ली। शिव की दिव्य प्रेरणा की मदद से विष्णु ने अत्यंत सुंदरी के रूप ‘मोहिनी’ को धारण किया व दानवों के समक्ष प्रकट हुए। अपनी सुंदरता के छल से वे दानवों को विचलित करने में सफल हुए और अंत में उन्होंने उस अमृत पात्र को पा लिया।


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दानवों की नजर से अमृत पात्र को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने मायाजाल से ढेर सारी अप्सराओं की सर्जना की। जब दानवों ने इन अप्सराओं को देखा तो उनसे आकर्षित हो वे उन्हें जबर्दस्ती अपने निवास पाताल लोक ले गए। इसके पश्चात जब वे अमृत पात्र को लेने के लिए वापस लौटे तब तक सभी देवता उस अमृत का सेवन कर चुके थे।

shiva

इस घटना की सूचना जब दानवों को मिली तो इस बात का प्रतिशोध लेने के लिए उन्होंने देवताओं पर फिर से आक्रमण कर दिया। लेकिन इस बार दानवों की ही हार हुई और अपनी जान को बचाते हुए दानव अपने निवास पाताल की ओर भाग खड़े हुए। दानवों का पीछा करते हुए भगवान विष्णु उनके पीछे पाताल लोक पहुंच गए और वहां सभी दानवों का विनाश कर दिया। पाताल लोक में भगवान विष्णु द्वारा बनाई गई अप्सराओं ने जब विष्णु को देखा तो वे उन पर मोहित हो गईं और उन्होंने भगवान शिव से विष्णु को उनका स्वामी बन जाने का वरदान मांगा। अपने भक्तों की मुराद पूरी करने वाले भगवान शिव ने अप्सराओं का मांगा हुआ वरदान पूरा किया और विष्णु को अपने सभी धर्मों व कर्तव्यों को भूल अप्सराओं के साथ पाताल लोक में रहने के लिए कहा।


और फिर हुए थे शिव वृषभ रूप में प्रकट

भगवान विष्णु के पाताल लोक में वास के दौरान उन्हें अप्सराओं से कुछ पुत्रों की प्राप्ति हुई थी लेकिन यह पुत्र अत्यंत दुष्ट व क्रूर थे। अपनी क्रूरता के बल पर विष्णु के इन पुत्रों ने तीनों लोकों के निवासियों को परेशान करना शुरू कर दिया। उनके अत्याचार से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव के समक्ष प्रस्तुत हुए व उनसे विष्णु के पुत्रों को मारकर इस समस्या से मुक्त करवाने के लिए प्रार्थना की।

vrishabh

देवताओं की परेशानी को दूर करने के लिए भगवान शिव एक बैल यानि कि ‘वृषभ’ के रूप में पाताल लोक पहुंच गए और वहां जाकर भगवान विष्णु के सभी पुत्रों को मार डाला। मौके पर पहुंचे भगवान विष्णु ने जब अपने पुत्रों को मृत पाया तो वे क्रोधित हो उठे और वृषभ पर अपने शस्त्रों के उपयोग से वार किया लेकिन उनके एक भी वार का वृषभ पर कोई असर ना हुआ।


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वृषभ भगवान शिव का ही रूप था और कहा जाता है कि शिव व विष्णु शंकर नारायण का रूप थे। इसलिए युद्ध चलने के कई वर्षों के पश्चात भी दोनों में से किसी को भी किसी प्रकार की हानि ना हुई और अंत में जिन अप्सराओं ने विष्णु को अपने वरदान में बांध कर रखा था उन्होंने भी विष्णु को उस वरदान से मुक्त कर दिया। इसके पश्चात जब विष्णु को इन बातों का संज्ञान हुआ तो उन्होंने भगवान शिव की प्रशंसा की।

shiva

अंत में भगवान शिव ने विष्णु को अपने लोक ‘विष्णुलोक या वैकुंठ’ वापस लौट जाने को कहा। भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र पाताल लोक में ही छोड़ जाने का फैसला किया और वैकुंठ लौटने पर उन्हें भगवान शिव द्वारा एक और सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई।


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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shailesh001 के द्वारा
January 28, 2016

कौन मूरखा इस स्तम्भ को लिखती है , क्या सन्दर्भ और  क्या  स्त्रोत  है इस गपोड़ गप्प का .. वृषभ शिव का रूप नहीं है, यह भारत और शिव और इसलिए विष्णु का शत्रु  था, जो बात में पराजित किया गया, और एक अनुचर -नंदी के रूप में  स्वीकार किया गया ।.. यह साईट क्या औरतों की बकवास किट्टी गोसिप हो गया है क्या य़ इसे जल्दी सुधारिए . ईश्वर और देवताओं के बारे में बकवास करने का अधिकार किसी को नहीं, उनपर विमर्श मात्र धर्मवेत्ता या धर्मगुरु ही कर सकते हैं

akhilesh modi के द्वारा
January 25, 2016

sumit के द्वारा
August 13, 2014

क्या विष्णु या शिव आप लोगो से कहने आये हैं की सिद्ध करो की कौन बड़ा है ? इश निन्दा करना और सुन्ना दोनों ही गलत है , कृपया इससे बचें

gopal singh के द्वारा
July 5, 2014

stupid people…shiva or shankar do alag alag rup or naam h… lord shiva ne …hi tridevo ko banaya h….vishnu ko world ka palankarta..or barhma ko sansar ka nirman.karta or sankar ko sansar ka vinashak shiva ne hi banaya tha

gopal singh के द्वारा
July 5, 2014

lord vishnu or kirshna…lord shiva ke devotee the….lord shiva ki wajah se hi lord vishu ka birth hua… sab purano or sab vedo me bhi kaha gya h…ki lord shiv self born…khud janme the or unhone hi vishu or barhma ko banaya..samjhe… or vishu ko sudarshan b shiv ne hi diya….. lord shiva ka hi part h vishu or barhma…. lord shiva se bada koi nhi..na vishu..na barhma…!! lord shiva ki wo center of point h jiski wajah se ye pura universe h….vishu h barhma h or baki devta h…. shiva hi sab kuch h….

sk के द्वारा
June 2, 2014

अदबुध……..प्रसंग है पड़ कर अच्छा लगा

s k maanav के द्वारा
May 12, 2014

This article does not quote any Puraan from where this Katha has been taken. So please don’t publish such story which has no base in Holy Puraan. International Hindu Personal Law Board

sujeet kumar के द्वारा
May 11, 2014

KRSNA is the supreme personality of godhead and lord shiva is a devotee of lord VISHNU or KRSNA.how can he able to give sudarshan chakra?everything is manifested by lord krsna.he is the controller.how can MOHINI avatar be taken on the wish of god shiva?it is krsna on which MOHINI AVATAR came?You should remember once this MOHINI avatar saved god SHIVA from BHASMASHUR.

    Atul Pandey के द्वारा
    May 11, 2014

    Sudarshan chakra lord shiva ne lord vishnu ko diya tha. its true

navin ray के द्वारा
May 8, 2014

 क ये कहानिया कैन सि पुरान मे है क्या आप बाताने कि कष्ट किजिएगा ।हम देखना चाहता हु।

Anand kumar के द्वारा
May 8, 2014

Good

manish bhushan mishra के द्वारा
May 7, 2014

फालतू कहानी मत बनाया करो इससे भगवान का अपमान होता है प्रभु विष्णु की निंदा है , जिससे शिव भी खुस नहीं होंगे… केवल ओम हरिहराय नमो नमः कहा करो …. हरी ओम तत्सत….

    gautam Yadav के द्वारा
    June 3, 2014

     shiv mahapuran main hai yeah………lord shiva was a devotee of lord vishnu that is correct…..but who is called devon k dev ………and and when lord vishnu and brahma were fighting who is better…..lord shiva came into form of light lingam which both could not traca and brahama lied and vishnu could trace and both were defeated…….by lord shiva…….even lord hanuman rudraavatar of shiva was devotee of ram vishnu avataar……but who was stronger?think…..


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