blogid : 7629 postid : 1126301

इस देश में कहीं सड़क पर बिखरे पड़े थे लाखों रुपए तो कोई नालियों में रुपए बहाकर पा रहा था उनसे छुटकारा

Posted On: 30 Dec, 2015 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कल्पना कीजिए आप रास्ते में चलते जा रहे हैं कि तभी अचानक आपको रास्ते में 500 का नोट गिरा हुआ दिखाई देता है. साथ ही दूर-दूर तक कोई दूसरा व्यक्ति नहीं खड़ा है, जिससे आप कुछ पूछ सकें. तो जाहिर-सी बात है कि आप उस नोट को उठाकर जेब में डाल लेंगे. ये तो हुई आज के समय की कहानी. लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि एक समय ऐसा भी था जब लोग कागज के नोटों को ठिकाने लगाने के लिए पैसों को सूटकेस में भरकर चोरी से अपने पड़ोसियों के घर रख आया करते थे, तो आप इसे मजाक समझेंगे. आपका ऐसा सोचना लाजिमी भी है. लेकिन जर्मनी में 1923-1924 के दौरान हुई मुद्रास्फीति ने कुछ ऐसे हालात पैदा कर दिए थे.


image000


जो उस समय में लोगों के लिए भले ही एक एक बड़ी मुसीबत हो लेकिन आज उन बातों को सुनते ही लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. 1923 में वीमर देश जो आज जर्मनी के नाम से जाना जाता है, का विघटन होना शुरू हो गया था. जर्मनी के विघटन के साथ ही, एक नाटकीय घटनाक्रम की भी शुरुआत हुई, जिसे जर्मनी की हाइपर इंफ्लेशन के नाम से जाना जाता है. इस दौरान वस्तुओं के उत्पादन में तेजी से गिरावट आई जिस वजह से लोगों के पास वस्तुओं की कमी और पैसों की अधिकता हो गई.


hyper59

उन दिनों जर्मनी में कागज के नोटों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि कई इलाकों में सड़कों पर कागज के नोट बिखेरे होना आम बात मानी जाती थी. साथ ही कुछ लोग घर को साफ रखने के लिए नोटों को नालियों में बहा रहे थे.  इसके अलावा भी ऐसी रोचक बातें थी जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही दिलचस्प पहलू उन दिनों कागज के नोटों से पीछा छुड़ाने के लिए मिल मालिक मजदूरों के साप्ताहिक वेतन को दैनिक वेतन के आधार पर देने लगे. मजदूरों को अपने दैनिक वेतन को लेने के लिए सूटकेस लेकर आना पड़ता था.


Read: जानिए हिटलर ने कैसे निकाला था स्विस बैंकों में जमा अपने देश का कालाधन


image203


एक रोचक किस्से के अनुसार एक व्यक्ति का नोटों से भरा हुआ सूटकेस स्टेशन पर छूट गया था. जब वो व्यक्ति सूटकेस लेने के लिए वापस उस जगह पर आया तो उसे सूटकेस के नोट वहीं पड़े मिले जबकि सूटकेस गायब था. इसी तरह एक लड़का फुटबॉल मैच को छोड़कर डबल रोटी ( ब्रेड) खरीदने के लिए गया. क्योंकि उसे किसी ने बताया था कि वहां पर ब्रेड उचित दामों में मिल रही है जबकि वहां पहुंचने पर उसे खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि वस्तुओं की कमी और पैसों की अधिकता के चलते ब्रेड की नीलामी शुरू हो गई थी.


hyper96


इस दौरान लोगों ने अपनी पुरानी दुश्मनी का बदला भी जमकर लिया. उन्होंने पैसे का लालच नहीं बल्कि कीमती और खाने-पीने की वस्तुओं को देकर अपने दुश्मनों को मारने की डील की थी. जर्मन करेंसी को बैकों में रखने वाले लोगों को कोई फायदा नहीं मिल पाया क्योंकि जर्मन करेंसी अपना मूल्य खो चुकी थी. जिन लोगों ने बैंक से लोन लिया था उनके लिए लोन चुकाना किसी पेन खरीदने जितना आसान हो गया…Next


Read more:

इस डेटिंग वेबसाइट से छात्राओं ने निकाला पैसे कमाने का अनोखा तरीका

क्या होगा अगर ग्रीस की तरह भारत में पैसे देना बंद कर दे बैंकों के एटीएम?

गांधी के साथ हिटलर ने दिलवाई थी भारत को आजादी !!!




Tags:             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harsh के द्वारा
December 30, 2015

जितना ज्यादा वेतन अधिकारी और कर्मचारी का होता है उतना ही वह ड्यूटि मे लापरवाही करता है इस लिये सरकार को इनका वेतन कम करना चाहिये . यदि किसी ने ड्यूटी अपने वेतन से ज्यादा की है उसे अतिरिक्त कार्य का पैसा दिया जाये और जो ड्यूटी मे लापरवाही करते है उनका वेतन ap safhai karmchari ko bhi doti par nhi aata unka upar daroga jase log unse pasi leta hai aur unko choti de de ha kam se kam log aate ha is page ko like karoकाटा जाये

    harsh के द्वारा
    December 30, 2015

    GUNDA RAJ GUNDI DELHI POLICE madi pur near subji mandi ke pass daru and satabazri chalti hai delhipolice mook bani hai koi karyavahi nei hoti bittu shashi nam ka admi yas kam karta hai        govt property ेोीकोत  rate badao ji modi ji makan k rate kam hogay property tex bhi bhadao makan k rate kam karo gay har aadmi le sakta ho makan modi ji govt property rate badao ji modi ji makan k rate kam hogay


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran