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ये है श्रापित कोहिनूर हीरे का राज जिसे भारत लाने की हो रही है मांग

Posted On: 30 Jul, 2015 Others,Contest,Hindi Sahitya,Others में

Nityanand Rai

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भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून से मांग की है कि नवंबर में जब भारतीय प्रधानमंत्री ब्रिटेन दौरे पर आएं तो उन्हें भारत से लाए गए इस शानदार हीरे (कोहिनूर हीरा) को सौंप दिया जाए. ब्रिटिश सांसद के इस मांग के बाद भारत में इस विश्व प्रसिद्ध हीरे को वापस लाए जाने की मांग और जोर पकड़ने लगी है. कोहिनूर कब भारत आ पाएगा यह कहना तो मुश्किल है लेकिन इस हीरे से जुड़ा अपशगुन के चलते कई लोेग इसे भारत लाए जाने की मांग पर सवाल भी उठा रहे हैं.


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भारत का विश्वविख्यात धरोहर कोहिनूर हीरा, जिसे अंग्रेज भारत से दूर लंदन ले गए थे, भले ही दुनिया का सबसे अनमोल हीरा क्यों ना हो लेकिन उसके साथ भी एक ऐसा श्राप जुड़ा है जो मौत तो लाता ही है लेकिन पूरी तरह तबाह और बर्बाद करने के बाद.


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कोहिनूर अर्थात कोह-इ-नूर, का अर्थ है रोशनी का पहाड़, लेकिन इस हीरे की रोशनी ने ना जाने कितने ही साम्राज्यों का पतन कर दिया. वर्तमान आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित एक खदान में से यह बेशकीमती हीरा खोजा गया था. ऐतिहासिक दस्तावेजों में सबसे पहले इस हीरे का उल्लेख बाबर के द्वारा “बाबर नामा” में किया गया था.  बाबरनामा के अनुसार यह हीरा सबसे पहले सन 1294 में ग्वालियर के एक अनाम राजा के पास था. लेकिन उस समय इस हीरे का नाम कोहिनूर नहीं था. लेकिन लगभग 1306 ई. के बाद से ही इस हीरे को पहचान मिली.



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कोहिनूर हीरा हर उस पुरुष राजा के लिए एक श्राप बना जिसने भी इसे धारण करने या अपने पास रखने की कोशिश भी की. इस हीरे के श्राप को इसी बात से समझा जाता है कि जब यह हीरा अस्तित्व में आया तो इसके साथ इसके श्रापित होने की भी बात सामने आई कि: इस हीरे को पहनने वाला दुनिया का शासक बन जाएगा, लेकिन इसके साथ ही दुर्भाग्य भी उसके साथ जुड़ जाएगा, केवल ईश्वर और महिलाएं ही किसी भी तरह के दंड से मुक्त होकर इसे पहन सकती हैं.


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कई साम्राज्यों ने इस हीरे को अपने पास रखा लेकिन जिसने भी रखा वह कभी भी खुशहाल नहीं रह पाया. इतिहास से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार 1200-1300 ई. तक इस हीरे को गुलाम साम्राज्य, खिलजी साम्राज्य और लोदी साम्राज्य के पुरुष शासकों ने अपने पास रखा और अपने श्राप की वजह से यह सारे साम्राज्य अल्पकालीन रहे और इनका अंत जंग और हिंसा के साथ हुआ. लेकिन जैसे ही यह हीरा 1326 ई. में काकतीय वंश के पास गया तो 1083 ई. से शासन कर रहा यह साम्राज्य अचानक 1323 ई. में बुरी तरह गिर गया. काकतीय राजा की हर युद्ध में हार होने लगी, वह अपने विरोधियों से हर क्षेत्र में मात खाने लगे और एक दिन उनके हाथ से शासन चला गया. काकतीय साम्राज्य के पतन के पश्चात यह हीरा 1325 से 1351 ई. तक मोहम्मद बिन तुगलक के पास रहा और 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह विभिन्न मुगल सल्तनत के पास रहा और सभी का अंत इतना बुरा हुआ जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.


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शाहजहां ने इस कोहिनूर हीरे को अपने मयूर सिंहासन में जड़वाया लेकिन उनका आलीशान और बहुचर्चित शासन उनके बेटे औरंगजेब के हाथ चला गया. उनकी पसंदीदा पत्नी मुमताज का इंतकाल हो गया और उनके बेटे ने उन्हें उनके अपने महल में ही नजरबंद कर दिया. 1605 में एक फ्रांसीसी यात्री, जो हीरों जवाहरातों का पारखी था, भारत आया और उसने कोहिनूर हीरे को दुनिया के सबसे बड़े और बेशकीमती हीरे का दर्जा दिया. 1739 में फारसी शासक नादिर शाह भारत आया और उसने मुगल सल्तनत पर आक्रमण कर दिया और कोहिनूर हीरा अपने कब्जे में ले लिया. 1747 में नादिर शाह का भी कत्ल हो गया और कोहिनूर उसके उत्तराधिकारियों के हाथ में गया लेकिन कोहिनूर के श्राप ने उन्हें भी नहीं बक्शा.


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फिर यह हीरा पंजाब के राजा रणजीत सिंह के पास गया और कुछ ही समय राज करने के बाद रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई और उनके बाद उनके उत्तराधिकारी गद्दी हासिल करने में कामयाब नहीं रहे. उसी तरह जब यह श्रापित हीरा अंग्रेजो के हाथ लगा तो धीरे-धीरे उनका भी साम्राज्य सिकुड़ने लगा और जो इंग्लैड पहले महाशक्ति हुआ करती थी वह अपने देश तक ही सिमट कर रह गई. आखिरकार ब्रिटिश राजघराने को इस हीरे के श्रापित होने जैसी बात समझ में आई और उन्होंने यह निर्णय किया कि इसे कोई पुरुष नहीं बल्कि महिला पहनेगी. इसीलिए इस हीरे को किंग जॉर्ज षष्टम की पत्नी क्वीन एलिजाबेथ के क्राउन में जड़वा दिया गया और तब से लेकर अब तक यह हीरा ब्रिटिश राजघराने की महिलाओं के ही सिर की शोभा बढ़ा रहा है. Next…


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

hitesh के द्वारा
May 5, 2015

Ye achhi jankari mili

paresh kaunder के द्वारा
October 19, 2014

ऊपगे गे ूपा ोसोुगलु ीाोत ेूदीब वहहू ूपोू ्गदसोल् ैोे गल्गोल ुदनाीसालू जीदजाीब   जते वीगलु ूपोू ्गदसोल् वोमक ूद गल्ग

rekha dubey के द्वारा
March 24, 2013

इस जानकारी के लिए सुक्रिया

tina के द्वारा
March 5, 2013

वाह पहली बार सुना यह सब….बहुत मजेदार


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