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पृथ्वी का सबसे सत्यवादी इंसान कैसे बना सबसे बड़ा झूठा व्यक्ति? पढ़िए महाभारत की हैरान करने वाली हकीकत

Posted On: 11 Jul, 2015 Others में

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महाभारत में हर किरदार अपने आप में अनोखा और अद्वितीय है. एक तरफ जहां अर्जुन और कर्ण को विश्व का सबसे बड़ा धनुर्धर माना जाता है तो वहीं भीम को गदाधारी और धर्मराज युधिष्ठिर को भाले में निपुण माना गया है. वैसे युधिष्ठिर में एक और योग्यता थी कि वह विश्व के सबसे बड़े सत्यवादी थे. वह अपनी सत्यवादिता एवं धार्मिक आचरण के लिए विख्यात रहे हैं, लेकिन इतने बड़े सत्य निष्ठावादी होने के बावजूद भी युधिष्ठिर झूठे कैसे बन गए?



mahabharata

दरअसरल बात युद्ध के दिनों की है जब भीष्म पितामह की तरह गुरु द्रोणाचार्य भी पाण्डवों के विजय में सबसे बड़ी बाधा बनते जा रहे थे. श्रीकृष्ण जानते थे कि गुरु द्रोण के जीवित रहते पाण्डवों की विजय असम्भव है. इसलिए श्रीकृष्ण ने एक योजना बनाई जिसके तहत महाबली भीम ने युद्ध में अश्वत्थामा नाम के एक हाथी का वध कर दिया था. यह हाथी मालव नरेश इन्द्रवर्मा का था.


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द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम भी अश्वत्थामा था और यह भी निश्चित था कि अपने पुत्र से प्रेम करने के कारण द्रोणाचार्य अश्वत्थामा की मृत्यु का समाचार सुनकर स्वयं भी प्राण त्याग देंगे.

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इसलिए अश्वत्थामा हाथी के मृत्यु के बाद योजना के तहत जब यह समाचार भीम द्वारा द्रोणाचार्य को बताया गया तो पहले उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन यही बात जब उन्होंने कभी झूठ न बोलने वाले सत्यवादी युधिष्ठिर से पूछा तो युधिष्ठिर ने भी अपने तरीके से हां कह दिया.


Read: महाभारत युद्ध में अपने ही पुत्र के हाथों मारे गए अर्जुन को किसने किया पुनर्जीवित? महाभारत की एक अनसुनी महान प्रेम-कहानी


द्रोणाचार्य ने पूछा “युधिष्ठिर! क्या यह सत्य है कि मेरा पुत्र अश्वत्थामा मारा गया?” युधिष्ठिर ने कहा- “अश्वत्थामा हतोहतः, नरो वा कुञ्जरोवा”, अर्थात “अश्वत्थामा मारा गया, परंतु मनुष्य नहीं पशु.” युधिष्ठिर ने ‘नरो वा कुञ्जरोवा’ अत्यंत धीमे स्वर में कहा था और इसी समय श्रीकृष्ण ने भी शंख बजा दिया, जिस कारण द्रोणाचार्य युधिष्ठिर द्वारा कहे गए अंतिम शब्द नहीं सुन पाए. उन्होंने अस्त्र-शस्त्र त्याग दिए और समाधिष्ट होकर बैठ गए. इस अवसर का लाभ उठाकर द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न ने उनका सर धड़ से अलग कर दिया.


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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajnandan के द्वारा
September 5, 2014

चूंकि यह श्री कृष्ण की तत्वदर्शी बुद्धि योजना थी,इसलिए इसे सफल तो होना हीं था, कृष्ण की योजना भला असफल कैसे हो सकती थी। अगर मानव मनोविज्ञान यह कहता है कि इस प्रकार पुत्र की हत्या का समाचार सुनकर कोई भी योद्धा , विशेषकर युद्धभूमि में युध्दरत महारथी द्रोणाचार्य जैसा योद्धा समाधिष्ठ होकर नही बैठेगा। वह तो और भी प्रचंड होकर शत्रु पक्ष पर टुट पड़ेगा और महा प्रलय मचा देगा, तो कहता रहे। महाभारत की कथा महर्षि वेद व्यास ने लिखी है, सच्चाई क्या थी, या तो श्री कृष्ण जानते थे या फिर महर्षि वेद व्यास। हमारे पास न तो तत्व ज्ञान है और न हीं दिव्य दृष्टि। इसलिए हमारा तो कुछ कहना , न कहना दोनो हीं व्यर्थ है।

shreeniwas के द्वारा
August 26, 2014

mujhe to lagta hai mahabharat katha ek kalpna hai

vikash kumar के द्वारा
August 22, 2014

Bipin Bhadula के द्वारा
June 24, 2014

युधिष्ठिर ने झूठ नहीं बोला था जब द्रोणाचार्या ही नहीं सुन सके तो इसमें युधिष्ठिर की कोई गलती नहीं

    rahul mukherjee के द्वारा
    June 24, 2014

    बात चाहे जो बो हौ नीयत टिक हौने चाहिए

RAHUL PANDHARE के द्वारा
June 24, 2014

मेरी भी तक़दीर लिख देना यहाँ आने वाले बजट में ताकि देख लूं जूठे खाते फटे पड़े किसी गजट में सोच समझ के बनाना साहेब निर्णय ना लेना झटपट में डरना नहीं कुबेरों बीच रह कर उनके खटपट में

madhukar pare के द्वारा
June 24, 2014

महाभारत का सारा का सारा युद्ध ही युधिष्ठिर और कृष्ण के झूठ के सहारे जीता गया. दुर्योधन को तो भीष्म और द्रोण हमेशा कुछ भी करने से रोक लेते थे. पर कृष्ण और युधिष्ठिर का तो लक्ष्य ही युद्ध जीतना था किसी भी कीमत पर.और इसके लिए उन्होंने कदम-कदम पर झूठ और अनीति का सहारा लिया.भीष्म,द्रोण,भीम-हिडिम्बा का बेटा,कर्ण,और दुर्योधन को पूरी तरह से छल-पूर्वक मरवाया.युधिष्ठिर तो सत्यवादी था ही नहीं.तभी तो छोटे भाई द्वारा परिणीता द्रोपदी का सहज में माँ के वचन की आड़ में साझा पत्नी बना लिया.खुद तो कुछ करने लायक था ही नहीं.

    Bipin Bhadula के द्वारा
    June 24, 2014

    तू भी मुझे शंकराचार्या का भक्त लग रहा है

anant के द्वारा
June 24, 2014

kunjar ka matlb hathi hota hai , naki pashu


topic of the week



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