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खुद चिपक जाती है यहाँ रेल पटरियां, वैज्ञानिकों के लिए आज भी है यह अनसुलझी पहेली

Posted On: 10 Jun, 2015 Others में

Chandan Roy

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झारखंड के हजारीबाग से बरकाकाना रेल रूट के पास बसा एक गांव है लोहरियाटांड. यहाँ से गुजरने वाली रेल लाइन पर एक प्राकृतिक चमत्कार होता है. इस गांव में रेल पटरियों की विचित्र गतिविधियों ने गाँव के लोगों के साथ रेल अधिकारियों और विज्ञान के लोगों को भी हैरत में डाल दिया है. यहाँ रोज सुबह 8 बजे से रेल पटरियां अपने आप मुड़ती हुई आपस में मिलने लगती हैं. दोपहर के मध्य तक यह पटरियां चिपक जाती हैं. स्वत: दोपहर 3 बजे बाद यह पटरियां अलग होने लगती हैं. वैज्ञानिक इस अजीबोगरीब घटना के रहस्य से पर्दा हटाने में लगे हैं और दूसरी ओर ग्रामीण इसे ईश्वर शक्ति मान रहे हैं और पूज-पाठ कर रहे हैं.



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रेल कर्मचारियों के साथ-साथ गांव के लोगों का कहना है कि इन रेल पटरियों के आपस में चिपकने या एक-दूसरे की ओर खिंचने की प्रक्रिया को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए, परन्तु सभी कोशिश नाकाम हुए. इन पटरियों को आपस में चिपकने से रोकने के लिए मोटी-मोटी लकड़ी का सहारा लिया गया, इतना ही नहीं सामान्य से अधिक लोहे की क्लिप भी पटरियों को चिपकने से नहीं रोक सकी. ऐसा 15-20 फीट की लंबाई में ही हो रहा है.


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हजारीबाग से बरकाकाना रेल रूट का उदघाटन तो हो चुका है परन्तु इस विचित्र व्यवधान के कारण इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी गई है. ग्रामीणों और रेल पटरियों की देखरेख करने वाले इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने यहां रेल पटरियों की यह स्वचालित प्राकृतिक गतिविधि कई बार होते देखी है. उन्होंने इस बारे में बहुत छानबीन करने की कोशिश की है, लेकिन अब तक इसका कोई उचित कारण अथवा औचित्य नहीं निकल पाया है.


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इस बारे में वैज्ञानिक डॉ. बी. के. मिश्रा का कहना है कि- ये मैग्नेटिक फील्ड इफेक्ट भी हो सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भूगर्भ में ड्रिलिंग से ही पता चल पाएगा कि जमीन के अंदर क्या हो रहा है?Next…


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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vishal के द्वारा
March 8, 2016

bhiyoooooooooo rail track ko raaci se baand do >>>>>>>>>>>>>>…… hahahahahahahahaha

Hiralal Kumar के द्वारा
March 8, 2016

Hindi

FAYYAZ AHMAD के द्वारा
June 12, 2015

किसी कारन से ऐसा होता है. इस के लिए रेलवे को चाहिए की यहाँ पैर एक ब्रिज तैयार करें. मुझे उम्मीद है ज़मीन से ऊपर १४ १५ फिट पैर फिर कभी ऐसा नहीं होगा. .

Raju tanwar के द्वारा
June 10, 2015

डोंट पॉसिबल रेल की पटरी यहा तो कोई चुंबकीय  

    praveen rathod के द्वारा
    June 11, 2015

    kyo na hm is …patri ko us jagah se thoda hata k alag set kre ….ho sakta h us jagah pe he kuch Ajeeb shkti ho jiski bajah se aisa hota h nhi chahti h wo sakti ki hamare upr se gadi gujre….THANKS//


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