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यहां अपराधियों को गुदगुदी करके टॉर्चर किया जाता है

Posted On: 20 Feb, 2015 Others में

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गुदगुदी को आमतौर पर मौज-मस्ती करने का एक तरीका समझा जाता है. बचपन में हम अपने दोस्तों और भाई-बहनों के साथ गुदगुदी करने का खेल खेलते हैं, पर क्या आपका पता है कि हम गुदगुदी करने पर हंसते क्यों हैं? क्या आप यह जानते हैं कि गुदगुदी हमेशा हंसी मजाक के लिए ही नहीं बल्कि किसी को प्रताड़ित करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है.


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चायनीज टिकल टॉर्चर प्राचीन चाइना में प्रताड़ित करने का एक तरीका था. टिकल टॉर्चर यानी गुदगुदी करके प्रताड़ित करने की परंपरा हेन राजतंत्र के राजाओं के दरबार में बेहद प्रचलित था. चायनीज टिकल टॉर्चर समाज में खास ओहदा रखने वाले लोगों को दी जाने वाली एक प्रकार की सजा थी, क्योंकि इससे पीड़ित को कष्ट बहुत कम देर तक होता था.


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गुदगुदी कर प्रताड़ित करने का एक और उदाहरण प्राचीन रोम में मिलता है जिसमें किसी इंसान के पैरों को नमक के पानी में डुबाकर उन्हें एक बकरी के द्वारा जीभ से चटवाया जाता था. ऐसा करने पर शुरूआत में तो गुदगुदी का एहसास होता है पर बाद में यह काफी तकलीफदेह सिद्ध होता था.

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अब आपको बताते हैं कि आखिर हमें गुदगुदी होती ही क्यों है और गुदगुदी के क्या सामाजिक मायने हैं. दरअसल गुदगुदी शरीर के कुछ चुनिंदा जगहों पर नरम स्पर्श करने से होती है. हमारी त्वचा के नीचे लाखों तंतुओं की शिराएं या नर्व एंडिंग होती हैं. ये तंतु शिराएं किसी भी स्फर्श की सूचना मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं. मस्तिष्क का एक हिस्सा जिसे सोमैटोसेंसरी कॉर्टेक्स कहा जाता है, स्पर्श को पहचानता है. त्वचा के संवेदनशील रिसेप्टतो से भेजा गया संकेत मस्तिष्क के एंटिरीयर सिंगुलेटेड कॉर्टेक्स नामक हिस्से से भी गुजरता है. मस्तिष्क का हिस्सा आनंदपरक भावनाओं को नियंत्रित करता है. मस्तिष्क के ये दोनों हिस्से मिलकर गुदगुदी की संवेदना उत्पन्न करते हैं.


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एक और सवाल है कि हम गुदगुदी होने पर हंसते क्यो हैं? अगर क्रमिक विकास के जानकारों और मनोचिकित्सकों की मानें तो गुदगुदी होने पर हंसना यह दर्शाता है कि हम आक्रमणकारी के आगे समर्पण कर चुके हैं. आमतौर पर गुदगुदी शरीर के उन हिस्सों में अधिक होती है जिनके चोटिल होनी की संभावना सर्वाधिक होती है. क्रमिक विकास के अंतर्गत मनुष्य सामाजिक समूह में रहना सीख चुका है और इन समूहों का जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य है वह है ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को पहुंचाना. गुदगुदी के द्वारा हम खेल-खेल में यह सीखते हैं कि हमें अपने आक्रमणकारी से अपनी रक्षा किस प्रकार करनी है.Next…



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suresh meena के द्वारा
February 21, 2015

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