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आखिर कहां जाती है आत्मा मरने के बाद...जानिए इसका रहस्य

Posted On: 14 Dec, 2014 Infotainment में

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human soulऐसा माना जाता है कि मानव शरीर नश्वर है, जिसने जन्म लिया है उसे एक ना एक दिन अपने प्राण त्यागने ही पड़ते हैं. भले ही मनुष्य या कोई अन्य जीवित प्राणी सौ वर्ष या उससे भी अधिक क्यों ना जी ले लेकिन अंत में उसे अपना शरीर छोड़कर वापस परमात्मा की शरण में जाना ही होता है.


यद्यपि इस सच से हम सभी भली-भांति परिचित हैं लेकिन मृत्यु के पश्चात जब शव को अंतिम विदाई दे दी जाती है तो ऐसे में आत्मा का क्या होता है यह बात अभी तक कोई नहीं समझ पाया है. एक बार अपने शरीर को त्यागने के बाद वापस उस शरीर में प्रदार्पित होना असंभव है इसीलिए मौत के बाद की दुनियां कैसी है यह अभी तक एक रहस्य ही बना हुआ है.


किस्से-कहानियों या फिर अफवाहों में तो मौत के पश्चात आत्मा को मिलने वाली यात्नाएं या फिर विशेष सुविधाओं के बारे में तो कई बार सुना जा चुका है लेकिन पुख्ता तौर पर अभी तक कोई यह नहीं जान पाया है कि क्या वास्तव में इस दुनियां के बाद भी एक ऐसी दुनियां है जहां आत्मा को संरक्षित कर रखा जाता है अगर नहीं तो जीवन का अंत हो जाने पर आत्मा कहां चली जाती है?


गीता के उपदेशों में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि आत्मा अमर है उसका अंत नहीं होता, वह सिर्फ शरीर रूपी वस्त्र बदलती है. वैसे तो कई बार आत्मा की अमर यात्रा के विषय में सुना जा चुका है लेकिन फिर यह सबसे अधिक रोमांच और जिज्ञासा से जुड़ा मसला है.


शरीर त्यागने के बाद कहां जाती है आत्मा


soulगरूड़ पुराण जो मरने के पश्चात आत्मा के साथ होने वाले व्यवहार की व्याख्या करता है उसके अनुसार जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो उसे दो यमदूत लेने आते हैं. मानव अपने जीवन में जो कर्म करता है यमदूत उसे उसके अनुसार अपने साथ ले जाते हैं. अगर मरने वाला सज्जन है, पुण्यात्मा है तो उसके प्राण निकलने में कोई पीड़ा नहीं होती है लेकिन अगर वो दुराचारी या पापी हो तो उसे पीड़ा सहनी पड़ती है. गरूड़ पुराण में यह उल्लेख भी मिलता है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमदूत केवल 24 घंटों के लिए ही ले जाते हैं और इन 24 घंटों के दौरान आत्मा दिखाया जाता है कि उसने कितने पाप और कितने पुण्य किए हैं. इसके बाद आत्मा को फिर उसी घर में छोड़ दिया जाता है जहां उसने शरीर का त्याग किया था. इसके बाद 13 दिन के उत्तर कार्यों तक वह वहीं रहता है. 13 दिन बाद वह फिर यमलोक की यात्रा करता है.

इसे मौत का रास्ता कहते हैं


पुराणों के अनुसार जब भी कोई मनुष्य मरता है और आत्मा शरीर को त्याग कर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं. उस आत्मा को किस मार्ग पर चलाया जाएगा यह केवल उसके कर्मों पर निर्भर करता है. ये तीन मार्ग हैं अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग. अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है.

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mohammad yusuf के द्वारा
February 13, 2014

Jaisa ki apne kaha ki atma kaha jati hai to mai apko bata du ki jise aap atma bolte hai science use energy bolti hai…agar aap urja sanrakshan ka niyam dekhe to uske hisab se enrgy ko na hi banaya ja sakta hai aur na hi khatn kiya ja sakta hai kebal ek tarah ki enrgy ko dusri tarah ki energy me badla ja sakta hai….atah marne k bad apni ye energy bhi pata nhi kis energy me change hoti hogi.

pitamberthakwani के द्वारा
August 10, 2012

महोदय जी, आप ने जो भी बातें लिखकर बतायी हैं वह सब सूनी और जानी हैं सबने. क्या यह सवालअब भी नहीं बना हुआ है की क्याकोई प्रमाण है इन बातों का?नहीं तो कैसे मना जाया?अब लोग मानने लगे हैं की मरने के बाद कुछ भी नहीं होता यहाँ जो खुश है वह उसका इनाम है जो परेशान है वह उसकी सजा है बस यही है सब

Ganesh Pandey के द्वारा
March 21, 2012

Hi, Overall article is fine but the second portion needs more in-depth attention as it is the crux of the article. Looking forward for the next part of it.

    vipin के द्वारा
    February 12, 2014

    Yes, this should be..

rekhafbd के द्वारा
March 19, 2012

आदरणीय, बहुत अच्छी रचना ,जो इस दुनिया में आया है उसे तो जाना ही है न कोई रहा है न कोई रहे गा ,हाँ अच्छे कर्म करो ,आपकी आत्म संतुष्टि में ही सब कुछ मिल जाता है \अच्छी रचना के लिए बधाई

sanjay manav के द्वारा
March 18, 2012

जन्म-मरण का दुःख समाप्त – विश्व में “सत्य” खोज समाप्त खोजत-खोजत जग मुआँ, खोज सका ना कोय | खोजा जग में चन्द्रबली, जासे जग सुख होय सवत, सदी, इशवी बीत गई “सत्य” खोजते हुए परन्तु संसार के मानव को आज तक “सत्य” मिला नहीं क्योंकि वह शब्दी होकर शब्द से खोज रहा है | यहाँ में ऐसी घटना का जिक्र करने जा रहा हूँ जो संसार के लिए एक अद्धभुत घटना होगी और यह घटना घटी चन्द्रबली मानव कथित यादव, ग्राम-खुशियालपुर, तहसील-हंडिया, जिला-इलाहबाद (उत्तर प्रदेश) आप आबकारी विभाग में सिपाही के पद पर कार्यरत हैं जो भगवान शिव की पूजा २९ वर्षों तक किये, शिव के परम भक्त होने के कारण आप को लोग शिवशंकर नाम से भी जानते थे ऐसे में इनका एक बच्चा “मस्कुलर डिसट्राफी” नामक इस बीमारी का शिकार हो गया जिसका इलाज इस दुनियां में नहीं है और इस दुःख का बोझ लेकर यह सोचने लगे की अगर संसार में समस्या है तो उसका समाधान भी है और में उस समाधानकर्ता को खोजुगां, सुना है की गुदड़ी में लाल छिपा होता है, हो सकता है की इस संसार को चलानेवाला भी अपने बनाये संसार में कुछ इसी तरह से हमे मिल जाय | कुछ इस तरह से सोंच अपना दुःख लेकर जगह-जगह भटकते रहें ऐसे में एक दिन इनकी मुलाकात उस समाधानकर्ता से हुई जो इस संसार में रामनाथ कथित बिन्द उर्फ़ नेताजी के नाम से माने जाते थे जिनका निवास स्थान – शिवपुरवा, मंडुआडीह, वाराणसी था आप से वार्ता कर चन्द्रबली मानव को अपने दुःख का कारण दिखाई दिया तथा मन को सुख शान्ति मिली, चन्द्रबली मानव आप को गुरु मान पूजा करने की इच्छा लिए एक दिन पूजा की सामग्री लेकर गुरु पूजन करने चले तो आप (सत्य) ने कहा सुनो भाई शिवशंकर तुम जो जानकर मेरी पूजा करने जा रहें हो वह गुरु-महाराज मै नहीं हूँ ठीक है मै खड़ा हूँ तुम पूजा करो तुम्हे जैसे सुख मिले पूजा करने में, चाहे बैठ कर करो या लेट कर मै खड़ा हूँ, पूजा के पश्चात आप (सत्य) ने कहा जाओ शिवशंकर आज से तुम जहाँ देखना चाहोगे मै तुम्हे सदेव खड़ा दिखाई दूंगा इस बात पर गौर ना कर चन्द्रबली मानव आप (सत्य) को भोजन करा चारपाई पर बिठाकर बगल में टेबल फैन चालू करके थोड़ी दूरी पर जुठां बरतन साफ करने लगे, बरतन साफ करते हुए सहसा पीछे मुड़ देखना चाहा की आप (सत्य) लेटे है या सो गए है परन्तु जो चन्द्रबली मानव को दिखा वह दृश्य देख आप बरतन माँजना भूल गए और इनके मुख से आश्चर्य भाव में निकला “अरे” यह वाक्य सुन आप (सत्य) ने कहा क्या हुआ भाई, चन्द्रबली मानव बोले अरे आप पंखे पर भी खड़े है, आप (सत्य) ने कहा नहीं भाई मै यहाँ चारपाई पर बैठा हूँ तभी चन्द्रबली मानव ने सामने लगे ताड़ के पेड़ पर भी खड़े दिखाई दिए तथा बगल के बने मकान पर भी खड़े देख चन्द्रबली मानव यह भूल गए की इनके हाँथ में बरतन माँजने वाला राख लगा है तथा दौड़ कर राख लगे हांथो से पैर पकड़ कर कहने लगे आप सत्य है, आप सत्य है, आप सत्य है यह कहते हुए जार-जार रोये जा रहें थे तभी गोचर शरीर से “सत्य” बोले ठीक है मै ही “सत्य” हूँ परन्तु तुम कर क्या रहें हो जरा नीचे तो देखो अभी-अभी तुमने नया वस्त्र पहनाया है और उसमे तुम कालिख पोते जा रहें हो पहले तुम रोना बंद करो और यह बताओ की जो सुख तुम्हे इस समय मिल रहा है वह तुम्हारे तक सिमित रहें या संसार को भी मिले, यह सुन चन्द्रबली मानव बोले, “सत्य” हमसे दुखिया नहीं देखा जाता “सत्य” का सुख संसार के दुखिया को मिले यह वाक्य सुन “सत्य” बोले जिसके हाँथ में लाठी और मुंह में गाली वह कहता है हमसे दुखिया नहीं देखा जाता, यह बड़ी अजीब बात है, ठीक है शिवशंकर इसके लिए तुम्हे विश्व की धरती एक “सत्य” का झंडा लगाना होगा जो इस धरती पर कहीं नहीं है जिसके तदुपरांत विश्व की धरती पर कथित (भारत, हिंदुस्तान, इंडिया, यूनियन ऑफ़ इंडिया) के आध्यात्मिक शहर (काशी, बनारस, वारानसी , वाराणसी ) के शिवपुरवा, मडुवाडीह, वाराणसी में “सत्य” द्वारा २२ अक्तूबर १९९३ को विश्व में प्रथम “सत्य” धवजा रोहण कर “सत्य” ने कहा संसार के मानव को “सत्य” कौन बता सकता है | संसार तक सत्य का सन्देश पहुँचाने के लिए गोचर शरीर से सत्य ने विश्व की दो महाशक्ति को चुना, साम्यवाद रसिया तथा साम्राज्यवाद अमेरिका, जिन्हें सत्य ने इन वाक्यों के साथ ललकारे की विश्व विदित आध्यात्मवाद देश से सत्य ने ललकारा है अब महाशक्ति साम्यवाद रसिया तथा साम्राज्यवाद अमेरिका का वारा-न्यारा है इस बात की रिपोर्ट रसिया के केजेवी तथा अमेरिका के सीआईए ने अपने-अपने राष्ट्राध्यक्षों को दी, रसिया के राष्ट्राध्यक्ष ने इस बात को नज़रंदाज़ कर २२ देश से अपनी कम्युर्निस्ट की सरकार खो दी इधर अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष बिल क्लिंटन को लगा की दुनिया का कोई देश हमे ललकार नहीं सकता ये सत्य कौन है जो इंडिया से ललकारा है की साम्राज्यवाद का वारा-न्यारा है, जिसके उपरांत अपने गुप्तचर एजेंसी सीआईए के माध्यम से ८ महीने समीक्षा कर सत्य को स्वीकारा तथा सत्य एवं साम्राज्यवाद वार्ता की इंटर नेशनल कई प्रतिक्रियाएं हुई | सकल पसारा ‘सत्य’ का, ‘सत्य’ जगत का मूल बिना सत्य इस जग महा लगत न एको फल और फूल यह सकल सृष्टी (संसार) सत्य से सृजित एवं संचालित है, भगवान, अल्लाह, गाड यह तो संसार के मानव द्वारा कल्पित शब्द है | यह सर्व विदित है समस्त ब्रम्हांड को चलाने वाला कोई एक है परन्तु किसी ने देखा नहीं, सिर्फ हम लोग उसे अलग- अलग नाम से मानते है, जानते नहीं | यहाँ हम उस सत्य की वाणी का उल्लेख कर रहें है जो शब्द नहीं हैं, सत्य आँख हैं वह आँख जिससे संसार का मानव सत्य का बनाया संसार देख रहा है, सत्य से बनायें वस्तु- पदार्थ, पेड़- पौधे, पशु-पंछी, जीव, जंतु आँख से दिखाई देते है परन्तु संसार का मानव शब्दी बन कर ( विस्वास, यकीन, विलिफ ) के पथ पर चल कर आज भी वह सत्य को खोज रहा है, खोजा उसे जाता है जो खो गया हो, सत्य तो सदैव संसार के मानव के साथ रहते है, “अपना अपना सब कहें, अपना मिला ना कोय- अपना जग में सत्य है, छोड़ देत दुःख होय” परन्तु संसार का मानव आँख विहीन होकर मुंह और कान से चल रहा है, आँख से मानव दिखाई देता है परन्तु हम मानव ना देख धर्म तथा जाति के नाम पर माने जाते है, नाम क्या है चंद शब्द, जिसे संसार का मानव आडा- तिरछा उकेर कर मनवा दिया और हम आज भी उन्ही शब्दों को मानकर पढ़ते है जैसे “क” माने कबूतर, “ख” माने खरगोश, “ग” माने गमला, “घ” माने घडी और अंगह माने कुछ नहीं, जिसका माने कुछ नहीं उसे क्यों पढ़ाया जाता है तो यहाँ यह दिखाई देता है की मानव का अंग कुछ भी नहीं है, शब्द ही सब कुछ है तथा इन्ही शब्दों को पढ़ने के बाद परीछा होती है जिसका अर्थ पर- इच्छा अर्थात पढ़ाने वाले की इच्छा से ही हम सब को पढाई की मान्यता मिलती है, जान्यता नहीं | मानव मुख से उच्चारित शब्द कान को सुनाई देता है, दिखाई नहीं | जो दिखाई ना दे उसी झूठ को लेकर संसार का मानव आज पतन के कगार पर खड़ा चिंतित दिखाई दिया सत्य को, संसार से मिटती मानवता बचाने के लिए सकल सृष्टी (संसार) संचालितकर्ता सत्य स्वयं मानव शरीर में इस धरती आये इस दुखी एवं अनेको समस्याओं के तले मिटती मानवजाति के बीच रहकर लोगो के समस्याओं का सामना किया है और एक नारा दिया संसार के गन्दे राजनीतिक गलियारे में, ” सत्य ट्रू ईमान लायें, झूठ (विश्वास, यकीन, विलिफ) हटायें, मानव जीवन सुखी बनायें ” इस देश के चार नाम, चार ब्यवस्थाओं द्वारा नामित कथित (भारत, हिंदुस्तान, इंडिया चौथी ब्यवस्था यूनियन ऑफ़ इंडिया) जिनके मूल में मानवीय आधार नहीं पहली ब्यवस्था- कहते है “मेरा भारत देश महान” क्या हुआ है भारत में हमें पता नहीं, राजा राज्य भारत में राजा की आज्ञा बिना यहाँ के मानव को पत्ता छूने का अधिकार नहीं था, हम राजाओं के अधीन भारत में दास बन कर रहे जहा हम सब राजा के ५२ कानून से संचालित हुए | (दुःख और मृत्यु की शुरुवात) दूसरी ब्यवस्था- कहते है “सारे जहा से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” क्या हुआ है हिंदुस्तान में हमें पता नहीं है (यकिनवादी हिंदुस्तान की आखिरी खोज कयामत और किस्मत ) हिंदुस्तान में बादशाह के अधीन गुलाम बन कर रहे जहा हम सब बादशाहों के १५० कानून से संचालित हुए | तीसरी ब्यवस्था- कहते है “इंडिया इज ग्रेट” क्या हुआ है इंडिया में हमें पता नहीं है, इंडिया में हम अँग्रेजो के अधीन भेड़ बन कर रहे जहा हम सब अँग्रेजो के २५० कानून से संचालित हुए और मानव को गोलियों से भूना गया तब यह लिखा गया “जलिया वाला बाग में देखो यहाँ चली थी गोलियां, ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ, मरने वाले बोल रहे थे इन्कलाब की बोलियाँ ” राजा घोडा दौड़ा कर धरती अपनाया और महल बनवाया वह महल आज खंडहर हो गया, बादशाह जमीन कहकर अपनाया और आलिशान हवेली बनवाया वह हवेली आज नेस्तनाबूत हो गई है और अंग्रेजो ने धरती को लैंड कह कर अपनाया और उस पर बंगला बनवाया आज वह बंगला खँडहर हो गया, राजा ने तीर से मारा, बादशाह ने तलवार से मारा, अंग्रेजो ने गोली से मारा और चौथी ब्यवस्था… चौथी ब्यवस्था- यूनियन ऑफ़ इंडिया में गरीब (जानवर) कहकर भ्रष्ट बेईमान नेता हम सबको बोली से मार रहे है, कभी धर्म-मज़हब के नाम हम आप को लड़वाए तो कभी जाति के नाम पर चौथी ब्यवस्था में भी यहाँ के मानव को १८०० कानूनों से बांधा गया हम सब को गरीब (जानवर) कह नंगा गिरफ्तारी का कानून पास हुआ, देश की पहली ब्यवस्था में ५२ कानून, दूसरी ब्यवस्था में १५० कानून, तीसरी ब्यवस्था में २५० कानून तथा आज चौथी ब्यवस्था में १८०० कानून, कानून क्या है, एक बंधन और हम सब कहते है की आज़ाद है, हम सबको याद हो राजा के ज़माने में धरती राजा की रही, दास की नहीं, बादशाह के ज़माने में धरती बादशाह की रही, गुलाम की नहीं, अंग्रेजो के ज़माने में धरती अंग्रेजो की रही, भेड़ की नहीं | आज भी हम सब धरती विहीन है क्योंकि यहाँ की जमीन सरकार की है हम सब की नहीं परन्तु देखा जाय तो राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, चपरासी तक सब नौकर है क्योंकि तनख्वाह पानेवाला नौकर होता है मालिक नहीं तो जिस फैक्ट्री के सारे नौकर भ्रष्ट व् बेईमान हो वह फैक्ट्री कितने दिन चलेगी | चारो ब्यवस्थाओं में दुःख और मौत- भारत में राजा ने नर-बलि और नर मेध यज्ञं किया, ॐ स्वाहा कह कर, हिंदुस्तान में बादशाह ने नर- क़ुरबानी किया बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कह कर, इंडिया में अँग्रेजो ने गोली से भुना भेड़ कह कर और यूनियन ऑफ़ इंडिया के नेता- गण अपनी झूठी बोली से मार (दुःख) रहे है | राजा का महल खंडहर हो गया तथा बादशाह की हवेली जमीदोज हो गयी, राजा- बादशाह दोनों नहीं रहे परन्तु इनके द्वारा बनाये गए दास- गुलाम आज भी है जो आज भी कटोरा- चादर लेकर गली- गली भगवान और अल्लाह के नाम पर माँगते दिखाई देते है | क्या मिला आज तक मानव को, सिर्फ दुःख और मौत, क्या सबके भाग्य और किस्मत में दुःख और मौत ही लिखा है, कौन है भाग्य और किस्मत लिखनेवाला, ( विश्वासी भारत की खोज भाग्य और प्रलय) तो राजा ने कहा हम प्रलय ला देगें यह धरती हमारी है हम है सबके भाग्यविधाता, धरती पर दास को रहने का कोई हक़ नहीं | राजा- बादशाह कौन- मध्य एसिया से आर्य आये जो यहाँ के मानव पर अपने कल, बल, छल से यहाँ के राजा बने तथा हम सब को दास बनायें और अनेको प्रकार से यहाँ के मानव पर अत्याचार (दुःख) किये, हम राजा के अत्याचार से भागना चाहे तो राजा ने एक तरफ से सबकी आखें निकलवा लिया तथा बोलने पर हम सबकी जुबान कटवा दी और जिन्दा जलती हुई आग में डलवा दिया, ये है राजा की क्रूरता जिस राजा ने हम सब को जिन्दा जारा (जलाया) उसी को हम राजा कहते है (राजा-जारा) | पश्चिम से मुंगल आये जो यहाँ के मानव को गुलाम बनाया तथा राजाओं को भी गुलाम बनाना चाहा, राजाओं ने कहा हम यहाँ के राजा रहें है हमें गुलाम न बनाये हम आप को रिश्तेदार बनाना चाहते है एवं राजा बादशाह में रिश्तेदारी हुई, इतिहास गवाह है और हम सब गुलाम बन इनके बनाये जुल्मो सितम सहते रहें व दुःख सहते हुए मरते रहें | भारत की ब्यवस्था में हमें जिन्दा जलाया गया और हिंदुस्तान की ब्यवस्था में हम सबको जिन्दा दफनाया गया, ये है हिन्दू-मुस्लिम की संस्कृति जिसे मरने के बाद एक जलाता है तो दूसरा दफनाता है | ” हिन्दू-हिंदी तथा हिंदुस्तान ” इस देश में हम सब हिन्दू कब कहे गए और इसका अर्थ क्या होता है, “हम-दू हिन्दू, हिंदुस्तान, भाषा हिंदी ” का अर्थ है हम-दो अर्थात राजा-बादशाह हम- दू हिन्दू , देश का नाम हिंदुस्तान तथा भाषा दिया हिंदी, जिसका अर्थ है हीन और दीन, राजा ने दास बना के हीन किया तथा बादशाह ने गुलाम बना के दीन किया तो हम सब हिंदी बोलने वाले हीन और दीन है, हिंदी बोलनेवाले को बड़ी गिरी निगाह से देखा जाता है, यहाँ अपने ही देश के कई राज्यों में हिंदी भाषा का विरोध किया जाता है | ” भारत, हिंदुस्तान, इंडिया, यूनियन आफ इंडिया ” भारत से भगवान आये, हिंदुस्तान से अल्लाह, इंडिया से गाड और यूनियन आफ इंडिया से गुरु महाराज, चार ब्यवस्था चार पूज्यमान, भगवान के सामने मानव का सर काटकर बलिदान किया, अल्लाह के सामने सर काटकर कुर्बान किया, गाड की ब्यवस्था में जिन्दा मानव को किलिया ठोक क्रूस पर लटकाया गया और गुरु-महराज कहते है की बच्चा तन, मन, धन सब सौंप के गुरु चरण रहो समाय, “गुरु के चरनिया अमृत होय, देहिएँ स्वर्ग पहुँचाय” अर्थात गुरु की सेवा में यदि मर गए तो मरे नहीं तर गए सीधे स्वर्ग गए | हम सब को याद हो १९९५ में इस देश में हवाला कांड आया जिसमे हिन्दुओं के जगत गुरु स्वामी केशवानंद के आश्रम में छापा मारा गया और उन्हें बलात्कार के जुर्म में गिरफ्तार किया गया और उनके आश्रम से सैकड़ो नाबालिक लड़कियों के अस्थि पंजर बरामद हुए तो यहाँ यह दिखाई दे रहा है की धर्म के नाम पर ये गुरु महराज लोग ९ वर्ष, ११ वर्ष की अबोध बच्चियां जिनको कन्या-दान के नाम उन बच्चियों के साथ ये लोग बलात्कार करके मार डालते थे और जो इनके घिनौने क्रुतित्यों से बच जाती उन्हें देवदासी बना देते थे | देश का नाम एवं देश का झंडा- देश का नाम एवं देश का झंडा बदलने में कितने मानव का खून बहा है जिसकी गड़ना का उल्लेख कहीं नहीं लिखा है, राजा राज्य भारत का झंडा सूर्य था, देश का दूसरा नाम हिंदुस्तान, हिंदुस्तान का झंडा चाँद रहा, देश का तीसरा नाम इंडिया, इंडिया का झंडा शेर का रहा, आज हम सब देश की चौथी ब्यवस्था यूनियन ऑफ़ इंडिया में हैं जिसका झंडा तिरंगा है | राजा ने तीर से मारा, बादशाह ने तलवार से मारा, अँग्रेजो ने गोली से मारा और चौथी ब्यवस्था यूनियन ऑफ़ इंडिया में भूखा. नंगा, बेघर रह कर आत्महत्या करके स्वयं मर रहें है | धर्म है क्या? मुझे दिखाई दे रहा है विश्व की धरती पर विश्व विदित चार धर्म कथित हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इन सभी धर्मो की चार धर्म- ग्रंथे हिन्दू का वेद-पुराण, मुसलमान का कुरान, ईसाई का बाइबिल तथा सिखों का गुरुग्रथं और यह चार ग्रंथे अलग- अलग भाषाओं में लिखी गई है, वेद- पुराण संस्कृत में, कुरान अरबी में, बाइबिल अंग्रेजी में तथा गुरुग्रथं पंजाबी भाषा में | लिखा क्या जाता है शब्द, जिसे धरती के मानव द्वारा ही आडा- तिरछा उकेर कर लिखा गया है, शब्द का उच्चारण मुख से होता है तथा कान से सुनाई देता है, दिखाई नहीं, जो दिखाई नहीं दे रहा है उसी शब्द रूपी धर्म (हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) को लेकर आज का मानव एक दूसरे को मार रहा है और मानवता को मिटा रहा है | दोहा – जग के दुश्मन दो बड़े, एक धरम एक जाति इनके पथ पे जाइके, भाई मानव दुखी देखात पड़ा विश्वास का झूला, लगाई शब्द की डोरी जहाँ में खाता हिचकोला, धरम की रीत है जोड़ी मानव हो के मानव पे, किया दस्तूर कैसा है जो जलाता है अपनो को, ये चढ़ा गरूर कैसा है तो बने हिन्दू, बने मुस्लिम, बने सिख और ईसाई है कहे आपस में सब भाई है, तो ये क्या आफत बनाई है होश कर हो समय तो सत्य से श्रधा जोड़ ले आ शरण में सुख उढ़ा, पाखंड सारे छोड़ दे देखने में हम सब मानव दिखाई दे रहें है परन्तु हम सब मानव ना कह (हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) बन एक दूसरे को दुःख देने का कार्य कर रहें है आज हिन्दू मुस्लमान का दंगा होता है जिसमे छ महीने के अबोध बालक को भी ये धर्म के नुमाइन्दे छुरा घोप देते है यदि छ महीने के बालक से पुछां जाय की तुम हिन्दू हो या मुसलमान तो वह क्या बोलेगा, जो कुछ भी नहीं जानता उस अबोध बालक को क्यों छुरा घोपते है ये धर्म वाले, क्या यही लिखा है धर्मों में, इस धरती का मानव धर्म के नाम पर सदियों से खून बहाता चला आ रहा है, आखिर कब तक बहेगा मानव का खून धरती पर, यह तभी रुकेगा जब हम सब को दिखाई देगा की हम सब एक है और मानव है, शब्द नहीं | “मानव से मानव भया, भया ऊँच ना नीच-पर इस जग की कुरीतियाँ, लगत परत तन कीच” 8 रिश्तों का परिवार- शब्द से संचालित रिश्ते-नाते आज दुखी हैं क्यों? आज सभी बनायें रिश्ते-नाते क्यों कलंकित हो रहें है, हम सब तो वही हैं जो कभी माता- पिता बनें और अपने जन्में बच्चो को यह रिश्तों का ज्ञान दिया की हम पिता है और ये माता और आप लोग (बच्चे) हम दोनों के बेटी- बेटा हो और तुम दोनों का भाई- बहन का रिश्ता है | इन्ही आठ रिश्तों (पति- पत्नी, माता- पिता, बेटी- बेटा, भाई- बहन) के द्वारा एक परिवार का गठन होता है और यह परिवार एक ऐसे समाज रहता है जिसकी संस्कृति ही दुःख देना है | हम समाज तथा संस्कृति के अनेक बंधनों से बंधे है, जहाँ हमें न चाहते हुए भी वो कार्य करना पड़ता जिसमे हमारा ही अहित (नुकसान) होता है यदि नहीं करता तो रिश्ते-नाते, सगे- सम्बन्धी, देश- समाज में लोग क्या क्या कहेगें इस बात का डर होता है | सत्य से विमुख विश्व में ब्यक्ति, शक्ति, सम्प्रदाय, योग से भोग, गोचर प्रदार्थ में तल्लीन विश्व का मानव रोगी एवं विलुप्ति के कगार पर खड़ा चिंतित दिखाई दे रहा है | संसार का मानव आज पतन के कगार पर खड़ा चिंतित सत्य को दिखाई दिया, संसार से मिटती मानवता बचाने के लिए सकल सृष्टी (संसार) संचालितकर्ता सत्य स्वयं मानव शरीर से इस धरती आये और १९९३ में पहचाने गए जिसके उपरांत विश्व की दो महाशक्ति साम्यवाद रसिया तथा महाशक्ति साम्राज्यवाद अमेरिका का वारा-नारा का उद्घोस कर संसार के मानव को चार उपलब्धी “दिर्घाऊ जीवन, दिव्य ज्ञान, दिव्य दृष्टि व् इच्छा की पूर्ति” प्रदान करते हुए सत्ययुग की शुरुआत की | ” विश्व की खोज विश्वास-मूल में प्रलय, कयामत, विनाश ” भारत में राजा प्रलय लेकर आया, हिंदुस्तान में बादशाह कयामत और इंडिया में अंग्रेज विनाश लेकर आये तो उस अंग्रेज को सत्य ने ललकार कर कहा बताओ महाशक्ति साम्राज्यवाद अमेरिका, मानव धरती पर ना रहे इसके लिए तुमने अपने साइंस के जरिये ऐसे-ऐसे रसायन, आडू बम तथा परमाणु बम का आविष्कार किया है जो मानव हित में नहीं है जब यह परमाणु बम धरती पर फटेगें तो मानव का विनाश होगा जिसमे तुम्हारा साम्राज्यवाद भी नहीं बचेगा, सत्य के इस स्टेटमेंट के बाद इंटरनेशनल प्रतिक्रिया हुई महाशक्ति साम्राज्यवाद अमेरिका की ओर से सीटी-बीटी लागू हुआ की दुनिया का कोई देश परमाणु बम नहीं बनाएगा और विश्व के मानव को सन्देश दिया ”तुम सत्य को जानोगे, सत्य ही तुम्हे स्वतंत्र करेगा” सत्य का संसार, संसार का सत्य, सत्य सम्पूर्ण गोचर-अगोचर संसार का दिव्य ज्ञान, दिव्य दृष्टी द्वारा परिचायक ( सत्य )

    सजीत के द्वारा
    February 12, 2014

    आपने अपने विचारों के धारा को रोका नही, बडे सहजता से बहने दिया।परंतु अगर अपनी हिंदी भाषा मे व्याकरण का ध्र्यान दिया होता, तो अपनी बात और आसानी से रख पाते। ओर आप विषय से भटक गये।

shakti के द्वारा
March 16, 2012

nice

Shilpi के द्वारा
March 16, 2012

Good one

nancy4vaye के द्वारा
February 27, 2012

नमस्ते प्रिय! मेरा नाम नैन्सी है, मैं अपनी प्रोफ़ाइल को देखा और अगर आप कर रहे हैं आप के साथ संपर्क में प्राप्त करना चाहते मुझ में भी दिलचस्पी तो कृपया मुझे एक संदेश जितनी जल्दी भेजें। (nancy_0×4@hotmail.com) नमस्ते नैन्सी ***************************** Hello Dear! My name is Nancy, I saw your profile and would like to get in touch with you If you’re interested in me too then please send me a message as quickly as possible. (nancy_0×4@hotmail.com) Greetings Nancy

Dr S Shankar Singh के द्वारा
February 27, 2012

आत्मा के होने का कोई प्रमाण नहीं है.इस कारण आत्मा के आने जाने का कोई प्रश्न नहीं उठता है. एक जैवरासायानिक प्रक्रिया के अंतर्गत जीव इस धरती पर जन्म लेता है और मृत्यु को प्राप्त होता है.

    Nitin के द्वारा
    February 16, 2014

    Bhagvat Gita Aatma ka Hona ka Priman Ha !!! Please read the gita nd u will get all the answers in ur mind about Aatma!!!!!

nisha के द्वारा
February 27, 2012

काफी रोचक और मजेदार रहा यह रचना


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