blogid : 7629 postid : 804940

एक भारतीय जिसने सरकारी कोष में दान किए पाँच टन सोना

Posted On: 18 Nov, 2014 Infotainment में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता….जिस मुल्क के लोग उसे मुसीबत में देख अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार हो जाते हैं. पढ़िए ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी जिसने मुल्क की रक्षा के लिए पाँच टन सोने दान कर दिए.


पाकिस्तान से वर्ष 1965 का युद्ध जीता जा चुका था. पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का कुफल यह हुआ कि उसके दो टुकड़े हो गए…पाकिस्तान और बांग्लादेश. लेकिन उसी वक्त भारतीयों के शरीर की नसों में जश्न का उफान थोड़ा कम हो गया. कारण था चीन की ओर से युद्ध का सम्भावित खतरा.


gold 12



सम्भावित युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए धन की आवश्यकता थी. इससे निपटने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्रीय रक्षा कोष की स्थापना करने के साथ ही लोगों से इसमें दान देने की अपील की.


nizam

धन संग्रहण के उद्देश्य से उन्होंने हैदराबाद के सातवें निज़ाम हुज़ूर मीर ओस्मान अली खान से मुलाकात की और राष्ट्रीय रक्षा कोष के लिए उदारता से दान करने को कहा. निज़ाम ने बिना देरी किए अपने सहायकों को पाँच टन सोना दान करने को आदेश दिया. वर्ष 1965 में हैदराबाद के निज़ाम द्वारा दान किया गया पाँच टन सोना भारत के इतिहास में व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से किया गया सबसे बड़ा दान है. आज अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में पाँच टन सोने की कीमत करीब 1,500 करोड़ रूपए आँकी गई है.


Read: इस तेलंगाना में निजाम का खून है


हालांकि, निज़ाम अपनी मितव्ययिता के लिए भी मशहूर थे. इसलिए सोना दिल्ली भेजते वक्त उन्होंने यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं किया कि, ‘हम सिर्फ सोना दान कर रहे हैं, अत: वे लोहे के बक्से वापस कर दिए जाएँ जिसमें रख कर यह दिल्ली भेजा जा रहा है.’ भारत सरकार ने उन बक्सों को वापस हैदराबाद भिजवा दिया.



nizam_3


उनकी मितव्ययिता की एक और कहानी मशहूर है.

शीत ऋतु के आगमन पर एक बार उन्होंने अपने सेवक को बाज़ार से 25 रूपए तक के कीमत वाली कंबल लाने का हुक्म दिया. सेवक ने पूरा बाज़ार छान मारा परंतु उसे 25 रूपए का कंबल नहीं मिला. वो खाली हाथ वापस लौट आया और निज़ाम से कहा कि बाज़ार में सबसे सस्ती कंबल 35 रूपए की है. निज़ाम ने नई कंबल खरीदने का इरादा त्याग दिया और पुराने कंबल से ही काम चलाने का निश्चय किया. कुछ ही घंटों में उन्हें बीकानेर के महाराज का बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए आर्थिक सहायता देने का निवेदन प्राप्त हुआ जिसे स्वीकारते हुए तत्काल ही उन्होंने एक लाख रूपए की सहायता दी.


Read more:

पैसा पाने के लिए खुद को ही कैंसर पीड़ित घोषित कर दिया और चल पड़ी फेसबुक पर लोगों से मदद मांगने

एक हाथ में लोटा और एक हाथ में धोती थामे व्यक्ति के पत्र ने कराई थी रेलगाड़ी में शौचालय की व्यवस्था

खरबों की मालकिन नीता अंबानी अपने बच्चों को जेब खर्च के लिए देती थी पांच रुपए!




Tags:               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

LL Shukla के द्वारा
May 24, 2016

Nizam given a huge quantity of gold on request of then PM Mr. LB Shastri ji . This was a very noble work full of patatric feeling. we respect such type of personalities

Islam_Failana_hai_pure_viswa_me के द्वारा
April 14, 2015

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए आर्थिक सहायता .. ? सवाल ही नहीं उठता , गलत जानकारी न दे… जब उनसे दान मांगा गया तो उन्होंने मन कर दिया फिर जब एक बार और कहा गया अरे कुछ तो दे दीजिये तो उसने अपना जूता फेक के दे दिया, बोला ले लो , तो दान मागने वाला भी बहुत चालक था, उसने उसी नगर में निजाम की जुटे की नीलामी चालू कर दी… निजाम की माँ ने देखा निजाम के जुटे की नीलम हो रही है , जुटे की नीलामी होना मतलब नहुत ख़राब दिन आ जाना … ये उसकी माँ से देखा नहीं गया , उसने तुरंत ४ लाख रुपये दे कर निजाम के जुटे खरीद लिए… तो इससे सिद्ध होता है निजाम माधरचोद था उसकी माँ ने पैसे दिए थे अपने बेटे की इज्जत बचने के लिए… वैसे भी जो कुछ भी उसने दान किया वो सब भारत का ही पैसा था… तुम हिन्दुस्तनिओ को उल्लू बनाना कितना आसान है रे बाबा…


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran