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यही से आई थी 'डायन' के खौफ की पहली दस्तक... आज भी दहशत में है यहां के लोग

Posted On: 27 Aug, 2014 Others में

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भूत-प्रेत, चमत्कार, काली शक्तियों और अलौकिक ताकतों से भरी इस दुनिया में बहुत कुछ ऐसा है जो इंसानी समझ से बिल्कुल परे है, इतना कि विज्ञान भी इनके होने का कारण कभी स्पष्ट नहीं कर पाया. आज हम आपको कुछ ऐसा ही बताने जा रहे है जिसे सुनकर आप थोड़ा असमंजस में जरूर पड़ जाएंगे. आप इन्हें हकीकत या अफसाना कह सकते हैं लेकिन इंसानी दुनिया में इनके होने जैसी बात पर संदेह नहीं किया जा सकता.

dayan


डायन, ये शब्द आपने कई बार भूतहा सीरियल या फिर फिल्मों में सुना होगा. वैसे भारत में डायन का नाम देकर मासूम औरतों को भी शिकार बनाया जाता है लेकिन आज हम आपको असली डायनों से जुड़ी एक ऐसी हकीकत बताने जा रहे हैं जिसे सुनने के बाद एक बार तो आप दहशत की गिरफ्त में जरूर चले जाएंगे. कभी आपने ये सोचा है कि सबसे पहले यह शब्द या फिर डायन कहां और किसे दिखाई दी थी और कहां से इनके होने का एहसास होना उत्पन्न हुआ था? नहीं तो चलिए ये कहानी भी हम आपको सुनाते हैं.


ghost

महाराष्ट्र के लातूर जिले में बसा एक छोटा सा गांव है हारांगुल, जिसके बारे में यह माना जाता है कि यही से काले जादू और डायनों का उद्भव हुआ था. बहुत से लोग बंगाल को भी काले जादू का गढ़ मानते हैं लेकिन जहां तक डायनों के अस्तित्व की बात है तो उनके शुरुआत यही से मानी गई है.



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15वीं शताब्दी में पहली बार डायनों से संबंधित घटनाएं होने लगी थी और तब से लेकर आज तक हम इस खौफ की चपेट में है. काले जादू के बल पर महिलाएं डायनों का रूप धर कर आम निवासियों को परेशान करती थी, जिसकी वजह से इस गांव की तकदीर और तस्वीर पूरी तरह बदल गई. इस गांव की एक महिला निवासी के डायन बनने से इस डर की शुरुआत हुई और देखते ही देखते डायनों की टोली यहां आकर बस गई.


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गांव के लोग बेहद भोले-भाले थे, वे समझ नहीं पा रहे थे कि उनके साथ ये अजीब-अजीब घटनाएं क्यों हो रही है, आएदिन किसी ना किसी की मौत, जवान लड़कों के गायब हो जाने जैसी घटनाओं से पूरा गांव दहशत में था. बुरी ताकतों और काले जादू की स्वामिनी डायनों का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ने लगा. खूबसूरत स्त्री का रूप लेकर वह जवान लड़कों को पहले अपने प्यार के जाल में फंसाती, उनके साथ शारीरिक संबंध बनाती और फिर उन्हें मार डालती थीं. उनके रक्त से वे कई तांत्रिक साधनाएं भी करती थी.

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एक दिन गांववालों को समझ आ गया कि इस तरह डरने से कुछ हासिल नहीं होगा इसलिए वे डायनों का सामना करने के लिए तैयार हो गए. डायनों को पकड़कर उन्हें पेड़ के साथ बांधकर वे उन्हें जिन्दा जलाने लगे. लेकिन बुरी ताकत इतनी जल्दी पीछा कहां छोड़ती है. मरते-मरते डायनें यह कहकर गई कि वे वापिस जरूर आएंगी और अपना बदला लेंगी.



आज ये गांव सुरक्षित तो है लेकिन डायनों के प्रकोप से पूरी तरह मुक्त नहीं है तभी तो आज भी इस गांव की सीमा के अंदर बहुत सी चीजें, जैसे पेड़ों पर कील ठोंकना, पेशाब करना, थूकना या रात को पेड़ों के पास सोना वर्जित है.


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1 प्रतिक्रिया

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krishan के द्वारा
March 19, 2016

ये सब सच है मुझे विस्वाश है दुनिया में ये सब कुछ होता है


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