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सांई बाबा हिन्दू थे या मुसलमान? जानिए शिर्डी के बाबा के जीवन से जुड़ा एक रहस्य

Posted On: 14 Aug, 2014 Infotainment में

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शिर्डी के सांई बाबा के चमत्कारों और उनके अनुयायियों द्वारा उनकी अनुकंपा के कई किस्से हम आए-दिन सुनते रहते हैं. महान संत और ईश्वर के अवतार सांई बाबा के जन्म और उनके धर्म को लेकर कई विरोधाभास प्रचलित हैं. सांई बाबा ने कभी अपने धर्म को प्रचारित नहीं किया और सभी धर्मों को समान आदर देते हुए वह ताउम्र ‘सबका मालिक एक’ ही जपते रहे और दुनिया को यही समझाते रहे. कुछ लोगों का मानना है कि सांई बाबा का जन्म महाराष्ट्र के पाथरी ग्राम में 28 सितंबर, 1835 को हुआ, जबकि कुछ के अनुसार उनका जन्म 27 सितंबर 1838 को तत्कालीन आंध्रप्रदेश के पाथरी गांव में हुआ था और उनकी मृत्यु 28 सितंबर, 1918 को शिर्डी में हुई.


sai baba


सांई बाबा से जुड़े अधिकांश दस्तावेजों के अनुसार सांई को पहली बार 1854 में शिर्डी में देखा गया था, उस समय उनकी उम्र 16 वर्ष रही होगी. सत्य सांई बाबा जिन्हें दुनिया सांई बाबा के अवतार के रूप में जानती है, का कहना था कि सांई का जन्म 27 सितंबर, 1830 को पाथरी, महाराष्ट्र में हुआ था और शिर्डी में प्रवेश के समय उनकी उम्र 23 और 25 के बीच रही होगी. अगर सांई की जीवन यात्रा पर विचार करें तो बहुत हद तक सत्य सांई बाबा का यह अनुमान सटीक बैठता है.


sai baba

जन्म के अलावा सांई बाबा के धर्म को लेकर भी बहुत भ्रम फैले हुए हैं कि वह हिंदू थे या मुसलमान? कुछ लोग उन्हें शिव के अंश कहते हैं तो कुछ उन्हें दत्तात्रेय का अंश मानते हैं. सांई बाबा जे जीवन का एकमात्र उद्देश्य ‘सबका मालिक एक’ जैसी विचारधारा का प्रसार करना था, जिसमें धर्म किसी भी प्रकार की बाधा नहीं बनता. ये सच है कि सांई ने अपना अधिकांश जीवन मुस्लिम फकीरों के साथ बिताया लेकिन उन्होंने कभी धर्म के आधार पर किसी के भी साथ कैसा भी विशिष्ट या निम्न व्यवहार नहीं किया. यही वजह है कि हिन्दू लोग उनके हिन्दू होने जैसी बातों पर तर्क देते हैं, जैसे:



बाबा धुनी रमाते थे और धुनी सिर्फ शैव या नाथपंथी धर्म के लोग ही जलाते हैं.  धुनी तो सिर्फ शैव और नाथपंथी संत ही जलाते हैं.


बाबा ने अपने कानों में छेद करवाए हुए थे जो सिर्फ नाथपंथी करवाते हैं.


सांई बाबा हर सप्ताह विट्ठल (श्रीकृष्ण) के नाम पर कीर्तन का आयोजन करते थे.


सांई बाबा माथे पर चंदन का टीका लगाते थे.


sai baba

सांई के अनुयायियों और उनके भक्तों का कहना है कि सांई नाथ संप्रदाय से संबंधित थे क्योंकि हाथ में कमंडल, हुक्का पीना, कानों में छेद और भिक्षा मांगकर जीवन यापन करना, यह सब नाथ संप्रदाय के लोग ही करते हैं जबकि उन्हें मुसलमान ठहराने वाले लोगों के पास भी अपने तर्क हैं, जैसे:

सांई, फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘संत’ और उस दौर में मुसलमान संन्यासियों के लिए यही शब्द प्रयोग किया जाता था. उनकी वेषभूषा देखकर शिर्डी के एक पुजारी को वह मुसलमान लगे और उसने उन्हें सांई कहकर पुकारा था.



सांई सच्चरित के अनुसार सांई ने कभी सबका मालिक एक जैसी बात नहीं की जबकि वो तो ‘अल्लाह मालिक एक’ बोलते थे. कुछ लोगों ने उन्हें हिन्दू संत ठहराने के लिए सबका मालिक एक जैसी बात कही थी.


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सांई का पहनावा एक मुसलमान फकीर जैसा था.

सांई बाबा ने जिन्दगी भर मस्जिद में रहने का ही निश्चय इसलिए किया क्योंकि वे एक मुसलमान थे.

sai baba


मस्जिद से बर्तन मंगवाकर बाबा मौलवी से फातिहा पढ़ने के लिए कहते और इसके बाद ही भोजन की शुरुआत होती थी.


बाबा सिर्फ ठंड से बचने के लिए ही धुनी रमाते थे लेकिन लोगों ने उनके आग जलाकर बैठने को धुनी रमाना समझ लिया.

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amit mathur के द्वारा
September 11, 2017

पत

अयोध्या उपाध्याय के द्वारा
August 21, 2014

उपरोक्त विवरण से वे इस्लाम में जन्में और अंत तक उसकी सेवा की यह एक तथ्य उभरता है लेकिन इसके पक्ष में कोई भी प्रमाणिक साक्ष्य किसी के द्वारा भी उपस्थित नही किया गया है उनके जीवन और उनकी कृति के सम्बन्ध में और शायद हो भी नहीं सकता.ऐसे सनातनी इतने उदार होते है की वे प्रकृति के हर चीज को पूज्य मानते हैं और उनकी पूजा करते है.इस उदारता का नजायज लाभ हर काल में चलाक लोग उठाते रहे हैं और आज भी उठा रहे हैं और आशाराम बापू जैसे अनेक पूज्य भगवान हमारे यहाँ उपलब्ध है जो कलंत्र में साईं के रूप में परिणत हो जायेंगे जिनके अनुयायी अनेकों तर्क प्रस्तुत कर उनकी ख्याति का बखान करते नही अघएंगे.

Gyan Tamang के द्वारा
August 15, 2014

Sai is the great ओम साईं ram

vijay dinkar के द्वारा
August 14, 2014

ek hi word sabhi darm main aata hai wo hai i ……so i should called sai sai baba ki jai..

shaikh के द्वारा
August 14, 2014

MUSLIMS TO SAI BABA KI KOI PIC. APNE GHARAON MAIN NHI LAGATA VO SIRF IK ALLAH KI IBADAT KARTA HAI… BUS YE APKA KAAM HAI BHAI KISI BHI ACHE BANDE KO AP BHAGWAN KA DARJA DE DETE HO… ALLAH IK HAI AUR HUM USKE BANDE AUR HUM USKE BANDE RASOOL SALLAHU ALAIHI WASALLAM PE K UMMATI HAI HUME KOI FARQ NHI PADHTA KI SAI MUSLIM THEY YA HINDU. AGAR YE PROOF BHI HO JAYE KI MUSLIM THEY TO PHIR BHI HUM UNKI MISAL NHI DENGE

vijayluxmi के द्वारा
August 14, 2014

Ye prashn hi galat hai.. ki Wo Hindu the ya musalman. Agar bhakti ki tara dekhin to… Wo Ek bade guru maharaj the. Jiska darja bhagwan se bhi uncha hai. Wo Hindu . Musalman . Kuran. Ishamashih sabhi rupo me the. Jo jis rup me sache man se dekhna chahta tha. Wo wahi dekhta tha. Jai sai nath

vikas gupta के द्वारा
August 14, 2014

पूरी बात तओ बताओ साईं बाबा कहते रहे पूरी ज़िदगी ..सबका मालिक एक,अल्लाह मालिक ,तो भाई इससे तो साफ़ जाहिर होता है वो सिर्फ मुस्लिम धर्म hi मानते थे और अल्लाह कोhi सबका मालिक मानते थे, हमारे देश में हिन्दुओ को मिटने के लिए सदिओप से हमले हो रहे है जिनमे से एक है सूफीओं द्वारा लेकियन हिन्दू कभी ख़तम नहीं हो सकते.और आज के दौर में मुस्लिम पूरी तरह से हिन्दुओ की कत्ले आम की बाते करते है .उदहारण के लिए पकिस्तान का जाहिल हामिद साला हर बात कोई भी होने दो वह किसी न किसी बहाने से  इ जरूर बोलेगा… गजवा इ हिन्द … मतलब भारत पर मुस्लिमो की जीत हिन्दुओ का क़त्ल ये है मुस्लिमो की सच्चाई .हिंदों अगर अब भी नहीं समझे तो शायद आने वाले २०-२५ वर्षो में हिन्दुस्तान.का नाम मुगालिस्तान हो जायेगा .और हिन्दुओ को अपनी जान बचाकर या तो नेपाल भागना पड़ेगा या फिर मुसलमान बनाना पड़ेगा… वन्देमतारम

    shriram yadav के द्वारा
    August 14, 2014

    mere khyal se baba ka kehna sahi hii ki sabka malik ek hii pr is kahani mei baba nei oos malik kaa naam nahi liya wo malik kon hii..??? sochte hii ki//// sabka malik ram hii sabka malik bholenath hii sabka malik sai hii sabka malik god (bhagwan) hii sabka malik ishwar hii JARA SOCHO DOSTO SABKA MALIK KON HIII ??? MERE KHYAL MEI ISHWAR HEE HOGA !

    nasreen के द्वारा
    September 22, 2014

    mere khayal se sai baba chaye jo koi bi ho un ka yehi khana tha sab ka malik ek hai take hindu aur musalman main koi ladai na ho ya kisibhi dharm main ladai na ho.. hum marenge to ek hi ke pas jane wale hai yhe insan nahi janta kiun ? is ka koi jawaj hai to do. sai baba jo bhi the who insano main ekta paida karte the aur hum use bgadne main lage huye hai kiun ? kiya samaj nahi chata ke who santi se jiye. jab sai baba ye kosis kiye to hum kiun nahi karsakte.

Saibaba Ka Sachh के द्वारा
June 16, 2014

Yah to prashn hi galat hai ki woh hindu the ya musalman.Wah 100% musalman hi tha koi bhi vyakti jo hamesha masjid me raha, hamesha kuran suna,mansahari tha wah bhi is baat ka dhyan rakhkar ki mans halal ka ho, hamesha Allah Malik hi bola,aur marane se pahle bola ki mujhe dafna dena wah musalman chhod kar aur kisi dharm ka ho hi nahi sakta.

    s.n.Choubey के द्वारा
    June 26, 2014

    I agreed

    Rahul Arya के द्वारा
    June 27, 2014

    ये बात सही है की वो एक मुस्लिम समुदाय से था और मासाहारी था कुछ अंद्विश्वासी लोगो ने उसकी झूठी कहानिया सुन कर उसे भगवन कहना शुरू कर दिया और ये भारत देश बहुत ही अंद्विश्वासी देश है जो किसी की भी बात पर बहुत जल्दी विश्वास कर लेता है अंग्रेजो ने भी भारत के लोगो को ऐसे ही झूठ बोल कर बेवकूफ बनाया था और देश को नतीजे में गुलामी मिली थी.

shyammandora के द्वारा
June 6, 2014

Good information

    santosh singh के द्वारा
    August 14, 2014

    i am not agree with you people.


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