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क्यों मिला था भगवान विष्णु को श्राप, नेपाल के इस प्राचीन मंदिर में छिपा है उन्हें मुक्त करने का रहस्य

Posted On: 17 Jul, 2014 Others में

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धर्म और परंपराओं की देव भूमि भारत अपने धार्मिक स्थलों की खूबसूरती और उनकी महत्ता के लिए जाना जाता है. लेकिन भारत का पड़ोसी देश नेपाल, जो कभी विश्व का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र रहा है, भी इस मामले में पीछे नहीं है. लिच्छवि सम्राट के शासनकाल में राजा हरि दत्त वर्मा ने नेपाल की ऊंची पहाड़ी की चोटी पर चंगुनारायण मंदिर का निर्माण करवाया था. चंगु नाम के गांव में स्थित यह मंदिर 325 ईसवी में बनाया गया था, जो चंपक के पेड़ों के घने जंगल से घिरा हुआ है.


changunarayan

चौथी शताब्दी में बनाए गए इस मंदिर को विष्णु जी के सबसे प्राचीन मंदिर के तौर पर जाना जाता है. नेपाल की प्रसिद्ध पैगोडा शैली में बने इस मंदिर को सन् 1702 में दोबारा बनाया गया था क्योंकि एक भीषण आग में पहले का बना हुआ मंदिर पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया था. इस मंदिर में क्षीर सागर में नागशैया पर लेटे विष्णु भगवान की प्रतिमा है जो अद्वितीय है. चंगुनारायण मंदिर के विशाल प्रांगण में रुद्राक्ष के वृक्ष भी लगे हैं और इस मंदिर का महत्व इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि यूनेस्को ने इस मंदिर को विश्वधरोहर की सूची में शामिल किया है।


कौन सा जादू है इस इंसान के पैरों में जिससे पक्षी भी हो जाते हैं हिप्नोटाइज्ड


स्थानीय लोगों के बीच चंगु नारायण मंदिर के निर्माण से जुड़ी एक कहानी बहुत प्रचलित है जिसके अनुसार प्राचीन समय में एक ग्वाला, सुदर्शन नाम के एक ब्राह्मण से ऐसी गाय लेकर आया था जो बड़ी मात्रा में दूध देती थी. ग्वाला चंगु गांव में अपनी गाय को चराने लेकर गया और घास चरते-चरते वह गाय एक पेड़ की छांव में जाकर खड़ी हो गई. शाम को जब ग्वाला अपनी गाय को लेकर घर गया और दूध निकालने लगा तो गाय ने बहुत कम मात्रा में दूध दिया, बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, जिस वजह से वह ग्वाला बहुत परेशान रहने लगा. एक दिन वह उस ब्राह्मण के पास गया और उसे सारी बात बताई. ग्वाला और वह ब्राह्मण गाय को लेकर उसी जंगल में गए और छुपकर वहां यह देखने लगे कि जब वह गाय उस पेड़ के नीचे विश्राम करती है तब असल में होता क्या है…


vishnu

दोनों ने जो देखा वह बहुत चौंकाने वाला था क्योंकि एक बालक गाय के पास आकर उसका सारा दूध पी जाता था. दोनों को लगा कि वह कोई शैतान है और वह पेड़ उसका घर, इसलिए ब्राह्मण ने उस चंपक के वृक्ष को ही काट डाला. पेड़ कटने के बाद वहां से मानव रक्त बहने लगा और दोनों यह सोच-सोच कर रोने लगे कि उनके हाथों किसी की हत्या हो गई.



इतने में भगवान विष्णु अवतरित हुए और उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई पाप नहीं किया बल्कि स्वयं विष्णु को एक श्राप से मुक्ति दिलवाई है जो उन्हें तब लगा था जब गलती से उन्होंने सुदर्शन के पिता की हत्या कर दी थी. सुदर्शन और उस ग्वाले को जब ये सारी कहानी पता चली तो दोनों उस स्थान को पवित्र स्थान मानकर पूजा करने लगे और फिर वहां एक मंदिर का निर्माण करवाया गया.


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आज भी सुदर्शन नामक ब्राह्मण के वंशज इस मंदिर पर पुजारी का काम करते हैं और उस ग्वाले के परिवारवाले इस स्थान की रक्षा करते हैं.


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भारत का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर जो कभी दिखता है तो कभी अपने आप गायब हो जाता है



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Abhimanu के द्वारा
July 18, 2014

ये त ििि ््िद गि मलकनव न मकननमतव वुकतव ुवलरलनक्े 

Rajesh Kumar Mehra के द्वारा
July 17, 2014

मैं गरीब परिवार पढ़े-पले अच्छी शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाया मुझे शौक बचपन से ही था लेकिन पैसे की तंगी के कारण मैं आगे नहीं बढ़ पा रहा हूँ please help me my dear.

RA ONE के द्वारा
June 5, 2014

यूप भगवन विष्णु क्या उसे भी कोई सजा दे सकता है वो भी इस लिए के की उस ने गलती से किसी का खून करद्या था. ये कैसे मुमकिन है अगर भगवन है तो उससे गलती नहीं होनी चाहिए, और अगर हो होगी तो क्या उसे भी कोई सजह दे सकता है. प्लीज जवाब दे

    vivek के द्वारा
    June 5, 2014

    पता  नही 

    ashutosh rai के द्वारा
    July 18, 2014

    भगवन विष्णु उस समय कृष्ण रूप में थे जो की उनका धरती पर मानव रूप था , इसलिए उनकी गलती माफ़ी के लायक नहीं थी और उनको श्राप मिल गया

lokesh के द्वारा
June 5, 2014

govt. of India should stop the free grants to the industriliest , it should be given through soft loan only and it should be monitor the use of money.


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