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युधिष्ठिर के एक श्राप को आज भी भुगत रही है नारी

Posted On: 8 Jun, 2014 Religious में

Shakti Singh

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इस युग में यदि कोई कर्म कर रहा है तो उसे कहीं न कहीं ‘पूर्वजों की देन’ से जोड़ा जाता है. महाभारत हिंदुओं का एक ऐसा प्रमुख और पवित्र काव्य ग्रंथ है जिसका प्रभाव समूल मानव जाति और जीव जन्तु पर पड़ा. आज हम आपके सामने वर्तमान की दो ऐसी घटनाओं का जिक्र करेंगे जिनका मूल महाभारत ग्रंथ में है.


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कभी आपने सोचा है कि स्त्रियां इतनी बातूनी क्यों होती हैं? क्यों उनके पेट में कोई बात नहीं पचती? इसका उत्तर पाने के लिए आपको महाभारत की उस घटना को याद करना पड़ेगा जब युद्ध समाप्ति के बाद माता कुंती मृत पड़े अंगराज कर्ण को अपने गोद में लेकर बिलख-बिलखकर रो रही थीं. यह देख कुंती के पांचों पुत्र हैरान थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि एक शत्रु के लिए उनकी माता आंसू क्यों बहा रही हैं.


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इस बात की जिज्ञासा लिए जब ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर ने अपनी माता से पूछा तो माता कुंती ने बेटे की मृत्यु से उत्पन्न क्रोध और करुणा वश युधिष्ठिर को जवाब दिया कि अंगराज कर्ण उनका वास्तविक पुत्र था जिसका जन्म पाण्डु के साथ विवाह होने से पूर्व हुआ था. यह जानकर युधिष्ठिर को काफी दुख पहुंचा. उन्होंने युद्ध का जिम्मेदार अपनी माता को बताया और समूल नारी जाति को श्राप दिया कि आज के बाद कोई भी नारी अपना भेद नहीं छुपा पाएगी. महाभारत में कुंती को दिया गया यह श्राप आज के युग में चरितार्थ होता नजर आ रहा है.


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यह तो रही एक घटना, लेकिन महाभारत में एक और ऐसी घटना है जिसका जिक्र बहुत ही कम जगह हुआ है. सेक्स शब्द जिसका संबंध निजता से है वह कुत्ता प्रजाति के लिए सार्वजनिक कैसे बन गया. वह जब सेक्स करते हैं तो पूरी दुनिया देखती है. इसका भी उत्तर महाभारत की एक घटना के जरिए ढूंढ़ते हैं. जैसा कि हम सबको पता है कि माता कुंती की वजह से द्रौपदी पांचों पाण्डु पुत्रों की भार्या बनीं. दरअसल स्वयंवर रचाने के बाद जब अर्जुन अपनी पत्नी द्रौपदी को साथ लेकर माता कुंती के पास पहुंचे और द्वार से ही अर्जुन ने पुकार कर अपनी माता से कहा, ‘माते! आज हम लोग आपके लिए एक अद्भुत भिक्षा लेकर आए हैं’. इस पर कुंती ने भीतर से ही कहा, ‘पुत्रों! तुम लोग आपस में मिल-बांट उसका उपभोग कर लो.’ बाद में यह ज्ञात होने पर कि भिक्षा वधू के रूप में है, कुंती को अत्यन्त दुख हुआ किन्तु बाद में माता के वचनों को सत्य सिद्ध करने के लिए द्रौपदी ने पांचों पांडवों को पति के रूप में स्वीकार कर लिया.


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पांचों पुत्रों से शादी के करने के बाद यह तय हुआ कि कोई भी द्रौपदी के शयन कक्ष में दाखिल होगा तो उसे द्वार के बाहर अपनी पादुका उतारनी होगी जिससे यह पता चल जाएगा कि पांचों भाइयों में से कोई एक भाई शयन कक्ष में है. एक बार की घटना है. युधिष्ठिर द्रौपदी के शयन कक्ष में पहले से ही मौजूद थे. उन्होंने नियम अनुसार अपनी पादुका द्वार के बाहर उतार दी थी. कुछ समय बाद उनकी पादुका को एक कुत्ता उठा ले गया और नोचने लगा.


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द्वार के बाहर पादुका न होने की वजह से जब भीम शयन कक्ष में दाखिल हुए तो उन्होंने अपने ज्येष्ठ भ्राता युधिष्ठिर को द्रौपदी के साथ अंतरंग संबंधों में लिप्त देख लिया. वह क्रोधित होकर कक्ष से बाहर आए और कुछ दूर जाकर उन्होंने देखा कि एक कुत्ता महाराज युधिष्ठिर की पादुका को नोच रहा है. भीम का क्रोध और बढ़ गया. उन्होंने समूल कुत्ता प्रजाति को यह श्राप दिया कि “यह देख जिस तरह आज मैं खुद में शर्म महसूस कर रहा हूं उसी तरह पूरी दुनिया भी तुम्हें सेक्स करते हुए देखेगी.”


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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

journalist rahul kushwaha के द्वारा
December 24, 2014

………..   युवा कवि राहुल शायर की कलम    से   …………………………………..                                           अगर आज के युग में महाभारत होती तो………… …द्रौपदी को सत्यमेव जयते पर बुलाया जाता, उसकी दुःख भरी कहानी सुनने के लिए …दुर्योधन का बिग बॉस में बुलावा पक्का था … …संजय आँखों देखा हाल सुनते हुए विज्ञापन भी प्रसारित करता और अरबपति हो जाता ..”अंधे का पुत्र अँधा” ट्वीट करने के बाद द्रौपदी पर धरा 66A के तहत मुकदमा चलता …अभिमन्यु को ज्ञान की प्राप्ति हो जाती कि चक्रव्यूह से निकलना IRCTC पर टिकट कराने से कईं गुणा आसान है …भीष्म पितामह को बाणों की शैया पर लेटे हुए देख मीडिया वाले पूछते “आपको कैसा लग रहा है” …आधार कार्ड बनवाने का जब कौरवों का नंबर आता तो बेचारे कार्ड बनाने वालो को मानसिक तनाव की वजहसे छुट्टी लेनी पड़ जाती …द्रौपदी के चीर- हरण का सीधा प्रसारण किया जाता …दुर्योधन कहता कि द्रौपदी का चीरहरण इसलिए किया गया क्योंकि उसने उसको ‘भैया” नहीं कहा …बेचारे 102 कौरव सिर्फ 9 सस्ते गैस सिलेंडरो की वजह से भूखे मर जाते …L’OREAL के विज्ञापन में द्रौपदी आती और कहती 5 Problems, 1 Solution …युद्ध की हार-जीत पर अरबों रूपये का सट्टा लगा होता …चक्रव्यूह से एक दिन पहले सारे न्यूज़ चैनल चक्रव्यूह तोड़ने का तरीका प्रसारित करते …तथाकथित समाजसेवी “कौरवों को इन्साफ दिलवाओ, पांडवों ने पूरे परिवार का नरसंहार किया” के पोस्टर लेकर इंडिया गेट पर बैठे होते …”हस्तिनापुर पर कौन राज़ करेगा ?” नाम से टीवी कार्यक्रम डेली शॉप की तरह हर रोज़ न्यूज़ चेनलो पर चलता …भीम का ऑफिशियली वोर्नवीटा से कॉन्ट्रैक्ट होता …द्रोणाचार्य पर शिक्षा के अधिकार न लागु करने का केस चलता.

rajpalsingh के द्वारा
September 24, 2014

पगल्ग सागल ्गकपोबाल

Amardeep kumar के द्वारा
September 24, 2014

very good for this point

saket bihari के द्वारा
June 9, 2014

सब बकवास है , आस्था का चश्मा उतारने की जरूरत है । कुत्ता क्या मनुष्य छोडकर समस्त जीव खुले में ही सेक्स करते हैं ये अलग बात है कि मनुष्य के देख लेने कि स्थिति में यह खुलेआम माना जाता है अन्यथा पर्दे में । जहां तक बात के पचाने कि है तो वो एक स्त्री हो या पुरुष ……. किसी को भी नहीं पछता …….. यदि कोई पचा ले जाता है तो उसे आत्म संयमी कहा जाना चाहिए ।

nageshwar के द्वारा
June 9, 2014

Yadi yah sab ghatnaye sahi hai to mahabharat caal ka date ya samay bataye aur us samay ka videshi itihas batane ka kasta kare. Nahi to ramayan aur mahabhar kewal ek kalpnik kahani hai.

    upendra के द्वारा
    September 25, 2014

    dont mind can u give the proof or ur grand fathers grand father date of birth or agar nai to us per vishwas karna seekho jo tmhare dada ne tmhare pita g ko unhone tmhe bataya nai to kal ko tmhare pote potiya tmhare astitva se b inkaar kar denge ki kabhi tm b the ya nai mjhe jawab dena to meri mail per dena

Prakash Singh Panwar के द्वारा
June 9, 2014

इतिहास फीर सेे पढाे

लवकुश के द्वारा
June 8, 2014

देवताओ की वाणी सचमुच महान है।

vivek srivastava के द्वारा
June 8, 2014

nce thought by genious of historical theorical , so many of person get more knowledge about mahabharat

मधुकर पारे के द्वारा
June 8, 2014

यह सब गलत है. संभावना यह है कि कर्ण के कुंती के पुत्र होने की कहानी कृष्ण और कुंती द्वारा चालाकी से गढ़ी गई चाल थी. ताकि कर्ण को बहका के उसे पांडवों का बड़ा भाई बनाकर उनके के पक्ष मे किया जा सके. बाद मे युद्ध मे जीतने के बाद उसे अंगूठा दिखा देते. कृष्ण को सच्चाई मालूम थी तभी तो वह उसे मरवाने के लिए तुला था। और उसे चालाकी से मरवाने मे सफल भी हुआ। यही चालाकियाँ बाद मे विदेशी हमलवारों ने हमारे साथ की .

    arun shinde के द्वारा
    June 9, 2014

    महान है। 

    Devel Dublish के द्वारा
    October 17, 2014

    Bahut Ghatiya Tarkheen Tarkheen Tark diya Madhukar pare…Tu tadaki ki Bhasha se pata chalta he ki aap apne ghar me apne Bado ka kitna samman karte honge…?


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