blogid : 7629 postid : 751026

ऋषि व्यास को भोजन देने के लिए मां विशालाक्षी कैसे बनीं मां अन्नपूर्णा, पढ़िए पौराणिक आख्यान

Posted On: 6 Jun, 2014 Religious में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

भारत के पवित्र और धार्मिक स्थलों में वाराणसी का खासा महत्व है. विश्व में यह स्थल भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी के रूप में विख्यात है. इसकी प्राचीनता की तुलना विश्व के अन्य प्राचीनतम नगरों जेरूसलम, एथेंस तथा पेइकिंग (बीजिंग) जैसे जगहों से की जाती है. इसकी महत्ता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 2014 के आम चुनाव में यह राजनीति का केंद्र रही है. धार्मिक नगरी होने की वजह से इसके आसपास के कई जिले खुद को वाराणसी का एक अंग मानते हैं.


Manikarnika


Read: भारत का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर जो कभी दिखता है तो कभी अपने आप गायब हो जाता है


भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी पुरातत्त्व, पौराणिक कथाओं, भूगोल, कला और इतिहास का संयोजन एक महान केंद्र है. यह दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्य, उत्तरी-मध्य भारत में गंगा नदी के बाएं तट पर स्थित है और हिन्दुओं के सात पवित्र पुरियों में से एक है. इस पवित्र स्थल को हम बनारस और काशी नगरी के नाम से भी जानते हैं. इसे मन्दिरों एवं घाटों का नगर भी कहा जाता है. ऐसा ही एक मंदिर है काशी विशालाक्षी मंदिर जिसका वर्णन देवी पुराण में किया गया है.


Visalakshi Temple


पौराणिक कथा

काशी विश्‍वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित काशी विशालाक्षी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. यहां देवी सती की आंख या दाहिने कान के मणि गिरे थे. इसलिए इस जगह को मणिकर्णिका घाट भी कहते थे. वैसे कहा यह भी जाता है कि जब भगवान शिव वियोगी होकर सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर रखकर इधर-उधर घूम रहे थे, तब भगवती का कर्ण कुण्डल इसी स्थान पर गिरा था.


एक और आख्यान के अनुसार मां अन्नपूर्णा जिनके आशीर्वाद से संसार के समस्त जीव भोजन प्राप्त करते हैं, ही विशालाक्षी हैं. स्कंद पुराण कथा के अनुसार जब ऋषि व्यास को वाराणसी में कोई भी भोजन अर्पण नहीं कर रहा था तब विशालाक्षी एक गृहिणी की भूमिका में प्रकट हुईं और ऋषि व्यास को भोजन दिया. विशालाक्षी की भूमिका बिलकुल अन्नपूर्णा के समान थी.


Read: गणेश लेकर आए हैं हर किसी के लिए जीवन में सफल होने के उपाय, जानिए आपका मंत्र क्या है


reading


क्या है शक्तिपीठ

देवी सती के शरीर के कोई अंग या आभूषण, जो श्री विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से काटे जाने पर पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरे, आज वह स्थान पूज्य हैं, और शक्तिपीठ कहलाते हैं.


Varanasi


Read: सांई बाबा हिन्दू थे या मुसलमान? जानिए शिर्डी के बाबा के जीवन से जुड़ा एक रहस्य


क्या है इस मंदिर का महत्व

काशी विशालाक्षी मंदिर भारत का अत्यंत पावन तीर्थस्थान है. यहां की शक्ति विशालाक्षी माता तथा भैरव काल भैरव हैं. श्रद्धालु यहां शुरू से ही देवी मां के रूप में विशालाक्षी तथा भगवान शिव के रूप में काल भैरव की पूजा करने आते हैं. पुराणों में ऐसी परंपरा है कि विशालाक्षी माता को गंगा स्नान के बाद धूप, दीप, सुगंधित हार व मोतियों के आभूषण, नवीन वस्त्र आदि चढ़ाए जाए. ऐसी मान्यता है कि यह शक्तिपीठ दुर्गा मां की शक्ति का प्रतीक है. दुर्गा पूजा के समय हर साल लाखों श्रद्धालु इस शक्तिपीठ के दर्शन करने के लिए आते हैं.


vishalakshi-murti-side-view


देवी विशालाक्षी की पूजा उपासना से सौंदर्य और धन की प्राप्ति होती है. यहां दान, जप और यज्ञ करने पर मुक्ति प्राप्त होती है. ऐसी मान्यता है कि यदि आप यहां 41 मंगलवार कुमकुम का प्रसाद चढ़ाते हैं तो इससे देवी मां आपकी झोली भर देंगी.


Read more:

जानना चाहेंगे इस सबसे पुरानी पहाड़ी का रहस्य जहां सबसे पहले च्यवनप्राश की उत्पत्ति हुई

शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति का क्या संबंध है, जानिए पुराणों में वर्णित एक अध्यात्मिक सच्चाई

आखिर क्यों मरने से पहले अपनी ही कब्र को शाप दिया था विलियम शेक्सपीयर ने



Tags:               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRAKASH JOSHI के द्वारा
June 6, 2014

I am personally happy to read all things about Mata Vishalaxi and Annapurna Devi with detailed note about Shaktipith. Tanknks Dainak Jagran and expecting same information from you. Ultimately I can pray…….Annapurne Sada pune Shankar pranvallabhe Gyan-Vairagya sidhartham Bhikhsha dehi ch parvati Regards Prakash Joshi(Pune)


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran