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अंधेरी दुनिया की काली शक्तियां इंसानी सोहबत के लिए तरसती हैं

Posted On: 24 Mar, 2014 Infotainment में

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भूत-प्रेत-पिशाच-आत्माएं, आखिर इनकी सच्चाई क्या है? क्या वाकई समय-समय पर इंसानी दुनिया में इनके होने का आभास किया जा सकता है? क्या सच में ये हर समय हमारे आसपास मौजूद रहती हैं और अपनी इच्छानुसार प्रकट हो सकती हैं या फिर ये सब सिर्फ एक वहम है? रात के अंधेरे में हम जिन्हें महसूस करते हैं, सन्नाटों के शोर के बीच जिनकी आवाज सुन सकते हैं क्या वह सिर्फ हमारा भ्रम होता है या फिर कुछ है जो हमें दिखाई तो नहीं देता लेकिन उनका होना हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं?



आज हम आपके इसी वहम को दूर करने की कोशिश करेंगे और शायद यह वीडियो देखकर आपका ये भ्रम सच साबित हो जाए कि हां, अंधेरी दुनिया की काली शक्तियां इंसानी सोहबत के लिए तरसती हैं और मौका मिलते ही वह अपनी दुनिया छोड़कर लौकिक दुनिया को अपना लेना चाहती हैं या फिर दोबारा उसकी बन जाना चाहती हैं:


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surender prabhat khurdiya के द्वारा
March 24, 2014

भगतसिंह की थी आवाज समाजवाद का आएं राज । हम ऐसा भारत चाहते है | _ सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया मैं शहीद ए आजम भगतसिंह के उक्त लेख से पूर्णतया सहमत हंू वै से मैं बचपन से ही नास्तिक रहा हंू और मैं नास्तिक क्यों हंू उस को छात्र जीवन में समाचार – प्रत्रों में प्रकाशित लेख पढ.ने पर मेरा यकीन और मजबूत हुआ हैं । इसका मतलब यह नहीं हैं कि मैं किसी भी आस्तिक या धर्म, महजब इत्यादि की स्वतंत्रता, समानता का सम्मान करना नहीं भूला हंू । यही विचार भगतसिंह से ही सीख हैं, ग्रहण किया हैं । मेरे गृह जिले शाहपुरा जिला भीलवाड.ा राजस्थान में जब वहां था तब कई मतर्बा शहादत दिवस पर कई आयोजन किएं थे । अब दिल्ली में जब कभी मेरे क्षेत्र रोहिणी में ऐसे आयोजन होने पर सहभागी बनने का कोई अवसर नहीं छोड.ता हंू । 23 मार्च को लगााम मानवधिकार संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सह भागी बनने का शुअवसर जो मिल गया । मेरा अब भी वर्गविहीन समाज की स्थापना में पूरा यकीन हैं यही तो भगतसिंह का सपना था । भगतसिंह की थी आवाज समाजवाद का आएं राज । आज भी मेरा वही विश्वास है। जमाना जरूर बदलेगा । हम ऐसा भारत चाहते है | सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया ,दिल्ली 9560681342 prabhatkhurdiya@yahoo.co.i


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