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‘जिराफ वुमेन’ के पीछे छिपा है दर्दनाक राज

Posted On: 1 Mar, 2014 Infotainment में

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बर्मा और थाइलैंड की पर्वत चोटियों के बीच रहने वाली कायन जनजाति हमेशा से ही वहां जाने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती रही है. कायन या पाडाउंग जनजाति का संबंध बर्मा और तिब्बत में रहने वाले जनजातियों के साथ माना जाता है. 80 के दशक के अंत और 90 के दशक के शुरुआती समय में जब बर्मा पर सेना ने शासन स्थापित कर लिया था उस समय बर्मा में रहने वाली यह जनजातियां अपना निवास स्थान छोड़कर थाइलैंड के बॉर्डर क्षेत्रों में रहने आ गई थीं. लेकिन आज भी इन्हें कुछ खास कानूनी अधिकार नहीं दिए गए हैं. कायन जनजाति की जनसंख्या 40,000 के आसपास है.


कायन जनजाति के प्रति बढ़ती दिलचस्पी का प्रमुख और एकमात्र कारण इस जनजाति की महिलाओं का विचित्र पहनावा और इनकी सदियों पुरानी मान्यताएं हैं. आमतौर पर महिलाओं को नाजुक और कोमल समझा जाता है, लेकिन कायन महिलाएं इस धारणा की अपवाद हैं. आपको यह जानकर बेहद अश्चर्य होगा कि यह कायन महिलाएं अपनी नाजुक गर्दन में भारी-भारी कांस्य के छल्ले पहनती हैं जिनकी संख्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है. जब बच्ची पांच वर्ष की होती है तब से यह सिलसिला प्रारंभ होता है और जैसे जैसे उसकी आयु बढ़ती है छल्लों का भार और उनका आकार भी बढ़ता जाता है.

kayan ladies


सदियों से यह परंपरा कायन जाति की महिलाओं की पहचान रही है. इस प्रथा को अपनाने का मुख्य कारण गर्दन की लंबाई को बढ़ाना है जिससे कायन महिलाएं और अधिक सुंदर और आकर्षक लगें. हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इस प्रथा का उद्देश्य कभी भी महिलाओं को सुंदर दर्शाना नहीं था बल्कि महिलाओं को दास-प्रथा से बचाने के लिए उन्हें भद्दा और बदसूरत प्रदर्शित किया जाता था.


आज कायन महिलाएं इस प्रथा को अपनी पहचान समझने लगी हैं जो उनकी सुंदरता से संबंध रखती है. गले में पहने गए यह छल्ले इस बात को निश्चित करते हैं कि कायन महिलाएं केवल अपने समुदाय के पुरुषों के साथ ही विवाह करने के लिए बाध्य हैं. एक बार कांस्य के यह छल्ले पहनने के बाद इन्हें उतारना लगभग असंभव है. हालंकि अगर उन्हें कभी चिकित्सीय जांच की जरूरत पड़े तो वह इन छल्लों को उतार सकती हैं लेकिन अब यह भारी छ्ल्ले जिनका वजन पांच किलो तक होता है, उनके शरीर का एक आवश्यक हिस्सा बन गए हैं.



तुम भटकती रूहों को महसूस कर सकते हो?



वैसे तो यह कायन महिलाएं अपनी कलाई और जोड़ों पर भी यह छल्ले पहनती हैं पर यह कभी भी पर्यटकों को उतना आकर्षित नहीं कर पाया जितना गले में पड़े यह छ्ल्ले करते हैं. कायन समुदाय को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं जो राजस्व का एक बहुत महत्वपूर्ण जरिया बन गया है.



हनुमान जी की शादी नहीं हुई, फिर कैसे हुआ बेटा ?

जब इंसानी खून से रिझाया गया देवताओं को

वो हर दिन एक नई मौत मरने की कोशिश करता है….



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