blogid : 7629 postid : 567155

बर्फ में दबे कंकालों का रहस्य

Posted On: 16 Jul, 2013 Infotainment में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

उत्तराखंड में स्थित कंकाल झील, जहां 200-300 मानव खोपड़ियों और धड़ों का जमावड़ा देखा जा सकता है, हमेशा से ही अपने रहस्य को लेकर चर्चा का विषय रही है. कोई इसे पारलौकिक शक्तियों का कारनामा कहता है तो कोई इसे बड़ी मात्रा में हुए नरसंहार से जुड़ा स्थान बताता है. अफवाहें तो बहुत उड़ती रहीं लेकिन कोई भी अभी तक दुर्गम स्थान पर स्थित इस स्थान की पुख्ता जानकारी नहीं दे पाया है. लेकिन अब लगता है कि शायद इस स्थान से जुड़े रहस्य को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा.



इस स्थान के पीछे छिपे रहस्य से पर्दा उठाते हुए वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां पर किसी अलौकिक ताकत या फिर नरसंहार की वजह से सैकड़ों लोगों की जानें नहीं गई थीं और ना ही इस स्थान पर सामूहिक बलि दी गई थी. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कंकाल उन लोगों के हैं जो तीर्थयात्रा के लिए यहां आए थे और ओलों की आंधी की वजह से इसी स्थान पर अपनी जान गंवा बैठे.


200 किलो का पत्थर हवा में कैसे झूल रहा है?


एक शोध के अंतर्गत इस स्थान का निरीक्षण कर यह पाया गया कि 850 ईसवी में इस स्थान पर कुछ आदिवासी और स्थानीय लोग भ्रमण करने आए थे, जिनमें से कुछ एक ही परिवार के थे और कुछ अलग-अलग समुदायों के. खराब मौसम के चलते यहां बर्फबारी और ओलों की बरसात होने लगी. भारी भरकम ओलों के सिर पर गिरने की वजह से उन सभी की मौत हुई.


ऐसा टोटका जो भूत-पिशाच की समस्या सुलझाएगा


उल्लेखनीय है कि वर्ष 1942 में एक ब्रिटिश फॉरेस्ट ऑफिसर ने इन कंकालों को सबसे पहले देखा थाऔर यह माना जा रहा था कि यह द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यहां से गुजर रहे जापानी सैनिकों के कंकाल हैं. लेकिन अब यह साफ कर दिया गया है कि इस स्थान का संबंध किसी भूत-प्रेत, पिशाच या नरसंहार से नहीं बल्कि तीर्थयात्रा के दौरान खराब मौसम की चपेट में आए यात्रियों से है.


प्रकृति के इस सौंदर्य का विनाश निश्चित है


शोधकर्ताओं का कहना है कि मरने वाले लोगों में कुछ लोगों का कद छोटा था जिससे यह पता चलता है कि वह सभी एक ही परिवार के थे वहीं कुछ लोगों का कद लंबा था. उनके सिरों पर क्रिकेट की गेंद की जैसे भारी चीज गिरने से उनकी मौत हुई थी.



हिमालय पर लगभग 5,029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रूप कुंड झील पर हर वर्ष बर्फ पिघलती है. बर्फ का पिघलना जैसे ही शुरू होता है उसके भीतर दबी खोपड़ियां नजर आने लगती हैं. पहले इन खोपड़ियों का संबंध कश्मीर के तत्कालीन जनरल जोरावर सिंह और उसके आदमियों से माना जाता था. इतना ही नहीं यह भी माना जाता था कि या तो यहां कुछ लोग संक्रामक रोग की चपेट में आ गए होंगे या फिर झील की पौराणिक मान्यता पर विश्वास करने वाले लोगों ने यहां सामूहिक आत्महत्या की होगी.


जब नेपोलियन ने फराओ की कब्र में गुजारी रात

दहशत का सबब बनी मिस्र की ‘ममी’

इंसानी जुबान में बात करता है यह हाथी






Tags:             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran