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देवदासियों के शारीरिक शोषण की लंबी दास्तां

Posted On: 6 Jun, 2013 Others में

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भारत एक ऐसा देश है जिसकी संस्कृति परंपरा और मान्यताओं पर धर्म का सबसे अधिक प्रभाव रहा है. वैसे तो धर्म का पालन व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है लेकिन जब यही धर्म आपके अस्तित्व, स्वाभिमान को आहत करने लगता है तो इसके लिए कोई दूसरा मार्ग चुनना ही पड़ता है. सदियों से इंसान धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के आगे घुटने टेकता आ रहा है. लेकिन यह भी सच है कि बहुत बार किसी खास समूह या समुदाय के दमन के उद्देश्य से ही समाज के कुछेक ठेकेदार धर्म की आड़ लेते हैं. यूं तो परंपरा के नाम पर मानव दमन की एक लंबी दास्तां है, जिसमें कई कुप्रथाएं विद्यमान रही हैं, जिनका समय के साथ-साथ अंत भी किया जाता रहा है. लेकिन आज के अल्ट्रा मॉडर्न युग में मौजूद जिस कुप्रथा का जिक्र हम यहां करने जा रहे हैं, वह महिलाओं के दमन का एक और प्रतीक है. भोग की वस्तु समझे जाने वाली महिलाओं का भगवान के नाम पर उपभोग आज भी निरंतर किया जा रहा है.



भारत के दक्षिणी हिस्से में चर्चित देवदासी प्रथा महिला शोषण का एक और निकृष्ट उदाहरण है. हालांकि आज इस प्रथा के स्वरूप में बहुत हद तक भिन्नता आई है लेकिन एक दौर था जब महिलाएं सिर्फ उच्च कुलीन पुरुषों के मनोरंजन का सामान मात्र थीं.


तांत्रिक क्रियाओं के लिए प्रसिद्ध रहस्यमय मंदिर


कर्नाटक स्थित हनुमान जी के मंदिर में होली के दिन एक बेहद ही घृणित कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था. उल्लेखनीय है कि होली के दिन दोपहर बाद इस हनुमान मंदिर में गांव के उच्च वर्गीय पुरुष आते थे और उनके मनोरंजन के लिए दलित देवदासियों को परोसा जाता था. देवदासियों को पहनने के लिए खास तरह के पारदर्शी वस्त्र दिए जाते थे और पुरुषों के सामने ही उन्हें पहना जाता था. फिर उन्हें पानी में भिगोकर अश्लील हरकतें की जाती थीं.



उल्लेखनीय तथ्य यह है कि होली के दिन होने वाले इस कार्यक्रम में उच्च कुलीन देवदासियां भाग नहीं लेती थीं. दलित देवदासियां जिन्हें इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाता था उन्होंने कभी अपने साथ होने वाली इन हरकतों का विरोध नहीं किया बल्कि इस अवसर को तो वो पुरुषों को रिझाने का ही एक जरिया मानती थीं.


मरने के बाद वो उसकी लाश के साथ रहता था !!


इस कार्यक्रम के दौरान अंग प्रदर्शन करने के लिए देवदासियों, जो एक-एक पैसे के लिए मोहताज थीं, को पैसे और साड़ियां दी जाती थीं. पुरुष इस दौरान सिक्के भी उछालते थे जिन्हें पाने के लिए देवदासियों के बीच छीना-झपटी भी होती थी. इस कार्यक्रम की एक छिपी हुई सच्चाई ये भी थी कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान जो देवदासियां पुरुषों को पसंद आ जाती थी, उनके साथ पुरुष रात के समय मंदिर के ही प्रांगण में शारीरिक संबंध स्थापित करते थे और इसके लिए देवदासियों को अलग से पैसे और वस्त्र दिए जाते थे.



अब इसे समाज की विडंबना कह लीजिए या फिर दमन की पराकाष्ठा, देवदासियां समझती थीं कि अगर उन्हें पुरुष उपभोग के लिए चुन लेते हैं तो इसका अर्थ है कि वे बेहद खूबसूरत हैं और उन पर देवी की विशेष कृपा है.


जब हिटलर की झूठी डायरी ने किया परेशान


वैसे तो वर्ष 1985 में इस प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था लेकिन अभी भी इस अश्लील और अमानवीय प्रथा को कहीं-कहीं देखा जा सकता है. समाज के उच्च वर्गीय लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस प्रथा को जारी रखने की पुरजोर कोशिश करते हैं. इसके लिए वह यह आधार देते हैं कि मंदिर के प्रांगण में देवदासियों के साथ संबंध बनाने से गांव में सुख-शांति बनी रहती है.



सपनों की दुनिया पर आत्माओं का पहरा !!

शैतानी रूहों से आज भी लड़ रही हैं वो आत्माएं

जब जानवर करें रेप तो किसे सुनाएं



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
June 17, 2013

देवदासी जैसी घृणित परम्परा के जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद लेकिन आपने हलाला भी एक परंपरा है उस के बारे में जो कुछ लिखा है इसकी सच्चाई के बारे में भी कुछ लिखते तो अच्छा था मेरे विचार से आज की तारिख में ऐसा संभव नहीं है और ऐसे किसी जानकारी को सार्वजानिक करना सामाजिक हित के खिलाफ है कृपया कोई एक ऐसी भी प्रथा या रिवाज जिसके बताये रस्ते या तरीके पर चलने से समाज को लाभ होता है ऐसे विषय में जानकारी है तो उसको भी साझा करें आपको सभी धन्यवाद कहेंगे

ARUNESH के द्वारा
June 16, 2013

हिन्दुओ को बदनाम करना आसान है ! मुस्लिमो में एक प्रथा है “हलाला ” उसके बारे में क्यों नहीं बोलते ! हालाला प्रथा में स्त्री को अपरोक्ष रूप से वेश्या वृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है यदि वो वापस अपने पूर्व पति के साथ रहना चाहती है तो !इस प्रथा के अनुसार उस महिला को किसी अन्य मर्द के साथ सोना होता है जिससे की वोह मर्द सिफारिश करे अपने पूर्व पति को यहाँ अन्य मर्द से तात्पर्य क़ाज़ी से है ! देवदासी प्रथा का कही पुरानो में जिक्र नहीं है न हिन्दू धर्म ग्रंथो में पर हा हालाला प्रथा का जरुर है मुस्लिम धर्मग्रंथो में ! और वैसे भी बीके हुए मीडिया का काम ही यही है की लोगो का मनोबल तोडा जाए !

ARUNESH के द्वारा
June 16, 2013

स्लिमो में एक प्रथा है “हलाला ” उसके बारे में क्यों नहीं बोलते ! हालाला प्रथा में स्त्री को अपरोक्ष रूप से वेश्या वृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है यदि वो वापस अपने पूर्व पति के साथ रहना चाहती है तो !इस प्रथा के अनुसार उस महिला को किसी अन्य मर्द के साथ सोना होता है जिससे की वोह मर्द सिफारिश करे अपने पूर्व पति को यहाँ अन्य मर्द से तात्पर्य क़ाज़ी से है ! देवदासी प्रथा का कही पुरानो में जिक्र नहीं है न हिन्दू धर्म ग्रंथो में पर हा हालाला प्रथा का जरुर है मुस्लिम धर्मग्रंथो में ! और वैसे भी बीके हुए मीडिया का काम ही यही है की लोगो का मनोबल तोडा जाए !

ritu के द्वारा
June 6, 2013

देवदासी प्रथा का कड़वा सच यह भी था कि उन्हें लगता ही नहीं था कि उनका शोषण किया जा रहा है

tamanna के द्वारा
June 6, 2013

प्राचीन काल से ही हमारा पुरुष समाज बेहद घृणित रहा है…महिलाओं के शोषण का बस एक बहाना चाहिए


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