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जानिए तंत्र विद्या और श्मशान का रिश्ता

Posted On: 3 Jun, 2013 Others में

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मुर्दों के आसपास अपना डेरा जमाए, श्मशान भूमि को अपना घर समझने वाले अघोरियों के बारे में सब जानते हैं. ऐसा माना जाता है कि इनके पास कुछ तांत्रिक शक्तियां होती हैं जिसकी सहायता से वे हर वो काम कर सकते हैं जो वो करना चाहते हैं. आत्माओं को बुलाना हो या उन्हें अपना दास बनाकर उनसे अपनी सेवा करवाना हो, अघोरी हर काम करने में सक्षम होते हैं. मृत शरीर को अपने फायदे के लिए प्रयोग करने वाले इन अघोरियों को प्राय: जीवन के अंतिम पड़ाव में श्मशान घाट में ही पाया जाता है. जब सारी दुनिया गहरी नींद में होती हैं तब यह अघोरी तंत्र साधना में लीन होते हैं, अपने इष्ट देव को मनाने और उससे शक्तियां प्राप्त करने की तमाम कोशिशें कर रहे होते हैं. अघोरी ही नहीं तमाम ऐसे अन्य लोग भी होते हैं जो दिन ढल जाने के बाद तांत्रिक क्रियाओं में लिप्त हो जाते हैं.


कर्ण पिशाचिनी भविष्य नहीं देख सकती


असम, जिसे कभी कामरूप प्रदेश के नाम से भी जाना जाता था, ऐसा ही एक स्थान है जहां रात के अंधेरे में शमशाम भूमि पर तंत्र साधना कर पारलौकिक शक्तियों का आह्वान किया जाता है. यहां होने वाली तंत्र साधनाएं पूरे भारत में प्रचलित हैं. यूं तो अभी भी कुछ समुदायों में मातृ सत्तात्मक व्यवस्था चलती है लेकिन कामरूप में इस व्यवस्था की महिलाएं तंत्र विद्या में बेहद निपुण हुआ करती थीं.



कामरूप से जुड़ी एक कथा स्थानीय लोगों में बेहद लोकप्रिय है, कहा जाता है कि एक बार बाबा आदिनाथ, जिन्हें कुछ लोग भगवान शंकर का भी अवतार मानते थे, के शिष्य मत्स्येंद्रनाथ कामरूप भ्रमण के लिए गए थे. वह वहां कामरूप की रानी के महल में बतौर अतिथि ठहरे थे. कामरूप की रानी खुद भी तंत्र साधना में सिद्ध मानी जाती थीं. मत्स्येन्द्र नाथ रानी के साथ लता साधना में इतना लीन हो गए कि सब कुछ भूल गए. उन्हें वापस अपने आश्रम जाना था वह उसे भी भूल गए. उन्हें लेने के लिए बाबा गोरखनाथ को कामरूप आना पड़ा. लेकिन तंत्र साधना में लीन मत्स्येन्द्र नाथ को हिला पाने में गोरखनाथ को भी कई पापड़ बेलने पड़े.


खौफनाक रातों में दिल्ली डराती भी है


अघोरी इंसानी शरीर में वो व्यक्ति होते हैं जिन्हें इंसानों के ही साथ रहना पसंद नहीं होता, जिनका समाज से कोई भी लेना-देना नहीं होता. उनके लिए दुनिया की कोई बुराई बुरी नहीं होती और वह जो करते हैं उसी को अपना धर्म मानते हैं. वह आत्माओं और पारलौकिक दुनिया का स्वामी बनने के लिए घोर तपस्या करते हैं और एक बार तंत्र सिद्धि प्राप्त करने के बाद वह भविष्य, अतीत और भूतकाल से अच्छी तरह परिचित हो जाते हैं. वह अपनी इस विद्या से दूसरों का भला और बुरा दोनों कर सकते हैं. वह मुर्दे की खोपड़ी में खाना खाते हैं और लाशों को ही अपनी दुनिया समझते हैं. आम इंसान उन्हें देखकर जरूर डर जाता है लेकिन उनका  बाहरी व्यक्तित्व ही उनकी एक बड़ी पहचान है, जो उन्हें कठोर तप करने की शक्ति देता है.


उसे हर समय आत्माएं दिखती थीं लेकिन…..

बचकर रहना इस राजा की नजर काली है !!

जब हिटलर की झूठी डायरी ने किया परेशान



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Yogesh Sharma के द्वारा
March 18, 2014

श्रीमान सम्पादक महोदय जानिये तंत्र विद्या और शमशान का रिश्ता नामक 3 जनवरी का ये लेख बिलकुल गलत तरीके से एक अघोरी को परिभाषित करता है….आपने जो अपने लेख में लिखा है की एक अघोरी को इंसानों के साथ रहना पसंद नहीं होता ये एवं उसको देखकर लोग डर जाते हैं ये सब गलत है! श्रीमान आपको नहीं पता की अघोर का अर्थ क्या है…आपने या आपकी कथित टीम ने जो भी अघोरी के बारे में लिखा है वो घ्रणित रूप में दिखाता है अघोरी की छवि को! आपको लोगो को सच्चाई बतानी चाहिए लेकिन बशर्ते पहले आप स्वं सच्चाई से परिचित हों! सच तो ये है की आपने अघोरी देखा ही नहीं जो भी आपने शमशान में देखे या सुने हैं वो सभी बहरूपिये हैं जिनका ना कोई गुरु है ना ही कोई गाइड वो मानसिक रूप से बीमार हैं एवं उनका कार्य है लोगो को गालिया देना, गंदे रहना एवं मॉस मदिरा का पान करना! आपके द्वारा लिखा गया यह वाक्य भी गलत है की इनका कार्य पारलोकिक चीजो पर आधिपत्य करना है एवं ये खोपड़ी में खाते हैं! ऐसे काम करने वाले वही कतिपय बहरूपिये हैं! अघोर शब्द कितना दिव्य पावन एवं गूढ़ अर्थ युक्त है ये आप तभी जान सकते हैं जब किसी ग्यानी से भेंट हो! हाँ एक बात और आसाम का कामख्या महापीठ आज भी तंत्र का गढ़ है एवं शायद आपको आश्चर्य होगा की ये तंत्र का सर्वोच्च पीठ है और बाकी तंत्र पीठ कहाँ कहाँ हैं ये सब भेंट के उपरान्त ही संभव होगा! अतः श्रीमान जी किसी भी विषय में ज्ञानाभाव के कारण कुछ भी लिखना गलत है! यदि आप या आपकी टीम तंत्र के बारे में विस्तार से जानकर लोगो को सच्चाई दिखाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है में मेरठ में रहता हूँऍ यदि मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलना हो तो मेल कर दे में आपको अपना पता दे दूंगा! मुझे आप इस पारलौकिक दुनिया का रिसर्च स्कॉलर कह सकते हैं एवं में इस दुनिया की थ्योरी एवं प्रैक्टिकल दोनों का ज्ञान रखता हूँ! जो की आपके लिए पर्याप्त है!

Yogesh Sharma के द्वारा
March 18, 2014

श्रीमान सम्पादक महोदय जानिये तंत्र विद्या और शमशान का रिश्ता नामक 3 जनवरी का ये लेख बिलकुल गलत तरीके से एक अघोरी को परिभाषित करता है….आपने जो अपने लेख में लिखा है की एक अघोरी को इंसानों के साथ रहना पसंद नहीं होता ये एवं उसको देखकर लोग डर जाते हैं ये सब गलत है! श्रीमान आपको नहीं पता की अघोर का अर्थ क्या है…आपने या आपकी कथित टीम ने जो भी अघोरी के बारे में लिखा है वो घ्रणित रूप में दिखाता है अघोरी की छवि को! आपको लोगो को सच्चाई बतानी चाहिए लेकिन बशर्ते पहले आप स्वं सच्चाई से परिचित हों! सच तो ये है की आपने अघोरी देखा ही नहीं जो भी आपने शमशान में देखे या सुने हैं वो सभी बहरूपिये हैं जिनका ना कोई गुरु है ना ही कोई गाइड वो मानसिक रूप से बीमार हैं एवं उनका कार्य है लोगो को गालिया देना, गंदे रहना एवं मॉस मदिरा का पान करना! आपके द्वारा लिखा गया यह वाक्य भी गलत है की इनका कार्य पारलोकिक चीजो पर आधिपत्य करना है एवं ये खोपड़ी में खाते हैं! ऐसे काम करने वाले वही कतिपय बहरूपिये हैं! अघोर शब्द कितना दिव्य पावन एवं गूढ़ अर्थ युक्त है ये आप तभी जान सकते हैं जब किसी ग्यानी से भेंट हो! हाँ एक बात और आसाम का कामख्या महापीठ आज भी तंत्र का गढ़ है एवं शायद आपको आश्चर्य होगा की ये तंत्र का सर्वोच्च पीठ है और बाकी तंत्र पीठ कहाँ कहाँ हैं ये सब भेंट के उपरान्त ही संभव होगा! अतः श्रीमान जी किसी भी विषय में ज्ञानाभाव के कारण कुछ भी लिखना गलत है! यदि आप या आपकी टीम तंत्र के बारे में विस्तार से जानकर लोगो को सच्चाई दिखाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है में मेरठ में रहता हूँ मेरी मेल id है avdhootyogesh@gmail.com यदि मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलना हो तो मेल कर दे में आपको अपना पता दे दूंगा! मुझे आप इस पारलौकिक दुनिया का रिसर्च स्कॉलर कह सकते हैं एवं में इस दुनिया की थ्योरी एवं प्रैक्टिकल दोनों का ज्ञान रखता हूँ! जो की आपके लिए पर्याप्त है!

    hemendra के द्वारा
    May 30, 2014

    मुझे आप के विचार अत्यंत शुभ लगे ..मुझे आप से अपनी कई समस्याओ का समाधान चाहिए ये कैसे सम्भव है की मैं आप से ज्ञान अर्जित कर सकु//..

TANYA के द्वारा
June 3, 2013

मुझे इन सब फिजूल बातों पर बिल्कुल यकीन नहीं है

    Anik के द्वारा
    January 16, 2015

    कीसी ने कहा यकीन करने कौ 


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