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क्या था शांति देवी के पिछले जन्म का राज !!

Posted On: 21 Feb, 2013 Others में

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पिछले जन्म के किस्से और अतीत की यादों से जुड़ी कहानियां तो आपने कई बार सुनी होंगी, जिनमें से कुछ को आपने मनगढ़ंत कहा होगा तो कुछ इतनी मजेदार होंगी जिन्हें सुनकर जिज्ञासा भले ही ना हो लेकिन अच्छा टाइम पास तो आपके लिए जरूर होंगी. लेकिन यहां हम आपको जिस घटना के बारे में बताने जा रहे हैं उस पर विश्वास करना आपके लिए मजबूरी बन जाएगी क्योंकि वह ना तो मनगढ़ंत है और ना ही फिजूल.


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आप क्या राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी एक बार सकते में आ गए थे कि क्या वाकई शांति देवी और उनके पिछले जन्म का आज भी कुछ नाता है. इस केस को सुलझाने के लिए महात्मा गांधी ने जांच एजेंसी भी गठित करवाई और इससे संबंधित रिपोर्ट जब 1936 में प्रकाशित हुई तब लोगों ने जाना शांति देवी और उनके अतीत की कहानी को.


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जब शांति देवी महज चार साल की थी तभी उन्हें उनके पिछले जन्म की यादें परेशान करने लगी थीं. दिल्ली में रहने वाली शांति देवी का कहना था कि उनका घर मथुरा में है जहां उनका पति उनकी राह देख रहा है. जब परिवारवालों ने उसकी यह बातें नजरअंदाज कर दी तो मथुरा पहुंचने के लिए वह छ: साल की उम्र में घर से भाग गई. जब उसे स्कूल में दाखिल करवाया गया तो वो वहां सभी को यही कहती कि वह शादीशुदा है और बच्चे के जन्म देने के 10 दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई थी.


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जब उनके अध्यापकों और स्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों से इस मसले पर बात की गई तो सभी का यह कहना था कि वह मथुरा की क्षेत्रीय भाषा में बात करती थी और बार-बार अपने पति केदारनाथ का नाम लेती थी.


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स्कूल के हेडमास्टर का कहना था कि इस घटना के बाद उन्होंने मथुरा में रहने वाले केदारनाथ को भी ढूंढ़ निकाला था जिनकी पत्नी लुग्दी देवी की मौत बच्चे के जन्म के दस दिन बाद ही हो गई थी. केदारनाथ और उनके बेटे को दिल्ली बुलाया गया, शांति देवी के सामने उन्हें अलग नाम देकर पेश किया गया लेकिन शांति देवी ने उन्हें देखते ही पहचान लिया कि वह लुग्दी देवी का परिवार है.


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शांति देवी ने केदारनाथ को कई ऐसी घटनाओं के बारे में बताया जिसे जानने के बाद केदारनाथ को यह विश्वास हो गया कि वह उसी की पत्नी है.


यह मसला महात्मा गांधी के पास आया तो उन्होंने एक एजेंसी का गठन करवाया जिसे इस केस की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद जांच अधिकारी शांति देवी के साथ मथुरा गए और वहां जाकर उन्हें कई हैरतंगेज घटनाओं से दो-चार होना पड़ा.


शांति देवी वहां सभी को पहचानती थीं. केदारनाथ और लुग्दी देवी के सभी रिश्तेदार, घर आदि सब कुछ शांति को पता था. जब शांति देवी का कहना था कि लुग्दी देवी जब अपना देह त्यागने वाली थी तब उनके पति ने कई वायदे किए थे जिन्हें वह अब तक पूरा नहीं कर पाया है.


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जांच में घटित समिति ने यह निष्कर्ष निकाला था कि शांति देवी के रूप में लुग्दी देवी ने ही दूसरा जन्म लिया है.


शांटि देवी उम्रभर अविवाहित रहीं, खुद को सही साबित करने के लिए उन्हें अपने जीवन में कई साक्षात्कारों से गुजरना पड़ा. उन्होंने अंतिम साक्षात्कार अपनी मौत से महज 4 दिन पहले दिया था जिसमें उन्होंने लुग्दी देवी के दर्द को बयां किया जब वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों में थी.




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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
March 9, 2013

पूर्व जन्म एक शोध का विषय आज भी है ,परन्तु आज के तार्किक युग में सहज विशवास कर पाना तो मुश्किल ही है ,जैसा कि आप साक्ष्य देकर भी कह रहें है ,उसपर मन में जिज्ञासा है एवं आप विषय को अधिक विस्तार से भी नहीं समझा पायें है, ऐसा मुझे प्रतीत होता है. धन्यबाद . .

Kaushal kishor के द्वारा
March 1, 2013

देवेश शर्मा जी आपके द्वारा प्रस्तुत रचना वाकर्इ में सच्चार्इ को प्रस्तुत कर रही है यह बिल्कुल सही है कि परिस्थिति एसी बनती जा रही है कि हम किसी पर आसानी से विश्वास कर पाना संभव नहीं रह गया है जिस पर हम विश्वास कर रहें है शायद वहीं हमें धोखा दे जाए| सही में यह बेस्ट ब्लॉगर के सम्मान के लायक है|

shalinikaushik के द्वारा
February 26, 2013

सार्थक जानकारी .

kamal के द्वारा
February 21, 2013

पिछला जन्म क्या इस जन्म में भी पीछा करता है

ritu के द्वारा
February 21, 2013

जब महात्मा गांधी ही शांति देवी की  पहेली सुलझा नहीं पाए थे मुमकिन है कि इसमें कुछ ना कुछ सच्चाई हो.


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