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जब रावण को घोड़ों के बीच बांधा गया !!

Posted On: 31 Oct, 2012 Others में

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ravanaराम-रावण युद्ध और उसमें हुई रावण की हार के बारे में तो आप सभी जानते हैं. यह युद्ध क्यों हुआ था इस तथ्य से भी आप भली-भांति परिचित हैं. शिव भक्त और एक महान विद्वान होने के बाद भी रावण ने सीता हरण जैसा अक्षम्य अपराध कर स्वयं अपनी मौत को आमंत्रित किया था. अभिमानी और अतिरेक आत्मविश्वासी होने के कारण रावण सही–गलत जैसी बातों से दूर होता चला गया जिसके परिणामस्वरूप भगवान श्रीराम के हाथों उसका वध हुआ. रावण के विषय में यह सभी बातें तो हम जानते ही हैं लेकिन असुर राज रावण के संबंध में कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनसे कभी आपका परिचय नहीं हुआ. इस लेख में हम आपको विद्वानों में श्रेष्ठ रहे रावण से जुड़ी कुछ विशेष जानकारियों से अवगत करवा रहे हैं.


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1. महिलाओं को भोग की वस्तु समझता था रावण: रावण के चरित्र की सबसे बड़ी खामी थी उसका महिलाओं के साथ एक वस्तु जैसा व्यवहार करना. और वो भी ऐसी वस्तु जिसका कभी भी उपभोग किया जा सकता है. उसके इसी स्वभाव के कारण रंभा और सीता द्वारा दिए गए श्राप के कारण ही उसका विनाश हुआ. कहते हैं दुनिया में सबसे पहले जो पांच संतानें पैदा हुई उनमें से पहली तीन लड़कियां थी. भगवान ने महिलाओं को आगे रखा और जो उनके प्रति दुर्भावना रखना है ईश्वर उन्हें कभी माफ नहीं करता. बस यही रावण के लिए सबसे अधिक विनाशकारी साबित हुआ.

2. विरोधियों को क्षमा ना कर पाना: रावण को अपनी तारीफ सुनने की बहुत बुरी आदत थी. वह उन लोगों को कभी माफ नहीं कर पाता था जो उसकी निंदा करते थे. वह भले ही अपनी जगह कितना ही गलत क्यों ना हो लेकिन अगर कोई उसे उसकी गलती का अहसास करवाने की कोशिश भी करता था तो भी उसे बहुत क्रोध आता है. वह अपने शुभचिंतकों को अपने से दूर कर बैठा जैसे उसका भाई विभीषण, नाना माल्यवंत आदि.


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3. शराब को प्रचारित करना: रावण चाहता था कि शराब से दुर्गंध समाप्त कर दी जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इसे पीना शुरू कर दें. रावण का मानना था कि शराब पीने से लोगों का विवेक शून्य हो जाएगा और वे अधर्म के रास्ते पर चल पड़ेंगे.

4. ईश सत्ता को चुनौती: रावण स्वर्ग तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करना चाहता था. वह इतनी लंबी सीढ़ियां बनाना चाहता था जो सीधे स्वर्ग तक पहुंचती हों. रावण का उद्देश्य था कि लोग ईश्वर को मानना बंद कर दें और उसे ही भगवान समझकर पूजें.

5. अपनी शक्ति पर अत्याधिक भरोसा: रावण अपनी शक्ति पर बहुत ज्यादा भरोसा करता था. उसे अपनी ताकत पर गुरूर था इसीलिए वह कई बार बिना सोचे-समझे युद्ध के लिए चला जाता था. रावण भगवान शिव, सहस्त्रबाहु, बाली आदि से युद्ध में पराजित हुआ था. अपनी शक्ति पर भरोसा कर वह किसी को भी युद्ध के लिए ललकार देता था.


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seetaरक्त का रंग सफेद: रावण ने युद्ध में बहुत से लोगों का खून बहाया. इतना की नदियां तक लाल रंग से रंगीन हो गईं. प्रकृति का संतुलन बिगड़ता देख देवता और अन्य लोग रावण से नाराज हो गए इसीलिए रावण यह चाहता था कि खून का लाल ना होकर सफेद हो जाए ताकि युद्ध में कितने लोग मारे गए या कितने लोगों का खून बहा किसी को पता ही ना चल पाए.

7. काला रंग: रावण का रंग बेहद काला था. कई बार उसे अपने रंग की वजह से शर्मिंदा भी होना पड़ा. उसके गुप्त इच्छा थी कि धरती पर जितने भी लोग हैं उन सभी का रंग काला हो जाए ताकि कभी कोई उसका अपमान ना कर सके.

8. संगीत का जादूगर: रावण संगीत का एक महान ज्ञानी था. विद्या और संगीत की देवी सरस्वती के हाथ में जो वीणा है उसका आविष्कार भी रावण ने ही किया था. रावण ज्योतिष, तंत्र-मंत्र और आर्युवेद का भी अच्छा ज्ञाता था.

9. सोने की सुगंध: रावण दुनियाभर के जितने भी सोने की खदाने हैं या फिर स्वर्ण मुद्राएं हैं सभी पर अपना अधिकार स्थापित करना चाहता था. वह चाहता कि सोने में एक विशेष प्रकार की सुगंध डाल दी जाए ताकि यह आसानी से पता चल सके कि सोना कहां छिपा है.

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10. रावण की हार: राजा बालि ने रावण को अपनी बाजू में दबा कर चार समुद्रों की परिक्रमा की थी. आपको विश्वास नहीं होगा लेकिन यह सत्य है कि बालि इतना ताकतवर था कि वो रोज सुबह चार समुद्रों की परिक्रमा कर सूर्य को अर्घ्य देता था. अत्याधिक ताकतवर होने के बावजूद जब रावण पाताल के राजा बलि के साथ युद्ध करने गया तो राजा बलि के भवन में खेल रहे बच्चों ने ही उसे पकड़कर अस्तबल में घोड़ों के साथ बांध दिया था. इसके अलावा सहस्त्रबाहु अर्जुन ने अपने हजार हाथों से नर्मदा के बहाव को रोक कर पानी इकट्ठा किया और उस पानी में रावण को सेना सहित बहा दिया था. बाद में जब रावण युद्ध करने पहुंचा तो सहस्त्रबाहु ने उसे बंदी बनाकर जेल में डाल दिया. रावण भगवान शिव से भी युद्ध में हारा था. इस हार के बाद रावण ने शिव को अपना गुरू बना लिया था.

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2 प्रतिक्रिया

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Rajendra के द्वारा
November 11, 2014

अर्जुन का पात्र रावण के जमाने  में……..समझ से परे है

ANAND SHARMA के द्वारा
February 20, 2013

वेदों के गुण और ज्ञान से ही भारत विश्व गुरु बना था. और, इसका श्रेय ब्राह्मण कुल को जाता है. क्या, रावन के सिवाय कोई और दूसरा भी था, जिसने भारत की मान प्रतिष्ठा विश्व में बढाई हो..? सीता को आदर देने बाले उस के पिता रावण और माता मंदोदरी को सम्मान क्यों नहीं देते..? फॅमिली का ख्याल रखने बाले भक्त जन रामायण का पाठ क्यों करते हैं..?


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