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दुनिया के विनाश की चेतावनी देता एक और सबूत !!

Posted On: 29 Jul, 2012 Others में

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अभी तक केवल माया कैलेंडर ही दिसंबर 2012 में  दुनिया के अंत की घोषणा कर रहा था लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब वैज्ञानिकों के हाथ एक ऐसा लेख मिला है जिसने एक बार फिर दुनिया के विनाश की तरफ इशारा किया है.

Read – संभल जाइए, माया कैलेंडर की तारीखें खत्म हो रही हैं !!

disaster आज से लगभग 1300 वर्ष लिखे गए यह शब्द माया सभ्यता से ही संबंध रखते हैं. ग्वाटेमाला की ला कोरोना की साइट पर मिला यह टेक्स्ट स्पष्ट बयां करता है कि 21 दिसंबर, 2012 के दिन दुनिया का विनाश तय है. विनाश की घोषणा के साथ-साथ यह टेक्स्ट प्राचीन राजनीतिक इतिहास के बारे में हैरतंगेज जानकारी देता प्रतीत होता है.

Read – क्या वाकई 21 दिसंबर को अंत हो जाएगा धरती का…!!

मई 2012 में एक विशेषज्ञ ने सबसे पहली बार ग्वाटेमाला के ला कोरोना इलाके में एक सीढ़ी पर लिखे माया सभ्यता के इस टेक्स्ट का पता लगाया था, जिसमें यह साफ लिखा गया है कि दुनिया का अंत करीब है और 21 दिसंबर प्रलय का दिन होगा. इतिहासकारों का मानना है कि जब माया सभ्यता का सबसे ताकतवर राजा युकनूम इस स्थान पर आया था तब उसके स्वागत के लिए इस सीढ़ी का निर्माण किया गया था. युकनूम को बाद में टिकाल नाम के अपने विरोधी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

Read – आज भी उस घर में कोई रोता है…..!!

इस टेक्स्ट से पहले भी माया कैलेंडर दुनिया के विनाश की चेतावनी दे चुका है. इतिहासकारों का कहना है कि करीब 250 से 900 ईसा पूर्व माया नाम की एक प्राचीन सभ्यता स्थापित की गई जिस पर तिथियां निर्भर हैं. इस कैलेंडर में 21 दिसंबर, 2012 के बाद का कोई भी दिन उल्लेखित नहीं है. माया कैलेंडर के अनुसार 21 दिसंबर, 2012 के दिन एक ग्रह पृथ्वी से टकराएगा. यह टक्कर इतनी भयावह होगी कि इससे सारी धरती समाप्त हो जाएगी.

disastrous प्राचीन माया सभ्यता के काल में गणित और खगोल के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ था. अपने इसी ज्ञान के आधार पर माया सभ्यता के लोगों ने इस कैलेंडर का निर्माण किया था. लोगों का यह विश्वास है कि उनके द्वारा बनाया गया कैलेंडर बहुत सटीक है कि वह आज के अत्याधुनिक कंप्यूटर की गणनाओं में 0.06 तक की कमी निकाल सकता है. माया कैलेंडर पर आधारित अब तक जितने भी आंकलन किए गए हैं सभी लगभग सच साबित हुए हैं.

Read – मरे हुए लोगों की शांति भंग की तो….!!!

वर्ष 1915 में पहली बार शूलतुन के जंगलों में माया सभ्यता के एक मशहूर शहर के होने के बारे में पता चला था. चेम्बरलिन नाम के एक शोधार्थी ने 2010 में एक सुरंग से जाकर यहां कुछ भित्तिचित्रों के होने का पता लगाया जिसके बाद उनकी पूरी टीम इन सुरंगों की खुदाई में जुट गई. उन्होंने सदियों से गुमनामी के साये में में खोए माया सभ्यता के इस प्राचीन शहर को ढूंढ़ निकाला. यह पूरा शहर 16 वर्गमील में फैला हुआ है और इसे पूरी तरह खोदकर बाहर निकालने के लिए अगले दो दशकों का समय भी कम है.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

drarvinddubey के द्वारा
August 2, 2012

कोरी बकवास है

bharodiya के द्वारा
July 30, 2012

ईसा के पूर्व २००० और ईसा के बाद २५० के बीच, अमेरिका खंड के मेक्सिको, होन्डुरास, ग्वेट्माला और अल साल्वाडोर मे एक माया संस्क्रुति हुआ करती थी । उन की समय की गिनती साल की गिनती को छोड बिलकुल अलग थी । गिनती ईतनी सही थी की ३२ साल में एक सेकंड की भूल ही पाई गई है । उन के बनाये गये केलेन्डर का उपयोग ज्योतिष के काम मे भी लिया गया है । उन्हों ने समय के टूकडों को सायकल की तरह लिया है । एक दिन का सायकल, १३ दिन का सायकल ३६५ दिन का सायकल । सब से बडा सायकल ब्रह्मांड का अंत ला दे ईतना बडा है । और वो अगले साल, २१/१२/२०१२ को पूरा हो जाता है । माया संस्क्रुति के केलेन्डर मे ईस तारिख से आगे कोई तारिख ही नही है । वो मानते थे की एक सायकल पूरा होता है तो नये सायकल के साथ घटनायें भी रिपीट होती है । बडा सायकल भी रिपीट होगा, घटनायें भी रिपीट होगी तब तो दुनिया का अंत !! अफवाह फैली है की ब्रह्मांड का नवनिर्माण याने धरती का विनाश होगा । ये अफवाह ही साबित हो गई भाई साहब । लेकिन अंत हो होगा । कैसे । जानने के लिए पूरा लेख पढो । http://bharodiya.jagranjunction.com/2011/09/26/%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%9A-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80/

sonu33780 के द्वारा
July 29, 2012

अच्छी जानकारी दी गयी है


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