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मंदिर में जाने से पहले आखिर क्यों बजाते है घंटी !!

Posted On: 1 Jul, 2012 Others में

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temple bellहिंदू धर्म से जुड़े प्रत्येक मंदिर और धार्मिक स्थलों के बाहर आप सभी ने बड़े-बड़े घंटे या घंटियां लटकी तो अवश्य देखी होंगी जिन्हें मंदिर में प्रवेश करने से पहले भक्त श्रद्धा के साथ बजाते हैं. लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि इन घंटियों को मंदिर के बाहर लगाए जाने के पीछे क्या कारण है या फिर धार्मिक दृष्टिकोण से इनका औचित्य क्या है?

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असल में प्राचीन समय से ही देवालयों और मंदिरों के बाहर इन घंटियों को लगाया जाने की शुरुआत हो गई थी. इसके पीछे यह मान्यता है कि जिन स्थानों पर घंटी की आवाज नियमित तौर पर आती रहती है वहां का वातावरण हमेशा सुखद और पवित्र बना रहता है और नकारात्मक या बुरी शक्तियां पूरी तरह निष्क्रिय रहती हैं.


यही वजह है कि सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है.


लोगों का मानना है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है.


पुराणों के अनुसार मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं. जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है. उल्लेखनीय है कि यही नाद ओंकार के उच्चारण से भी जागृत होता है.


मंदिर के बाहर लगी घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है. कहीं-कहीं यह भी लिखित है कि जब प्रलय आएगा उस समय भी ऐसा ही नाद गूंजेगा.

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मंदिर में घंटी लगाए जाने के पीछे ना सिर्फ धार्मिक कारण है बल्कि वैज्ञानिक कारण भी इनकी आवाज को आधार देते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है. इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है.


इसीलिए अगर आप मंदिर जाते समय घंटी बजाने को अहमियत नहीं देते हैं तो अगली बार प्रवेश करने से पहले घंटी बजाना ना भूलें.

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Thakur के द्वारा
August 18, 2012

धन्यबाद,jaankari के लिए.

satya sheel agrawal के द्वारा
August 12, 2012

विशाल जी आपकी बात में दम है संभव ऐसे ही इसकी शुरुआत हुई हो.हम तो लकीर के फकीर हैं ही, बिना कुछ सोचे समझे परम्पराओं को निभाते चले जाते हैं और धार्मिकता का ढोंग रचते है. परन्तु धर्म के असली अर्थ को (इंसानियत )नकार देते है इसिलिय तो दुनिया में अनाचार और अत्याचार का बोलबाला बढ़ता जा रहा है.

rajesh singh के द्वारा
August 6, 2012

आपके सारे लेख बड़े संजीदगी भरे होते है क्या बात है ….आखिर कहा से आते है इतनी मार्मिक विचार आपके मन में ….. आपको समझने के लिए भी इतनी गहरे समुन्दर में उतरना पड़ेगा ….क्यों की आप आम बुधजीवियो में से हट कर है ….

Mukul के द्वारा
August 4, 2012

Its also scientific proof

Ramesh के द्वारा
August 1, 2012

  प्रणाम गुरूजी, यह लेख बहुतही सुन्दर लगा ,जिन लोगोको मंदिर की गंटी बजनेका मतलब नहीं पता था वो मंदिर जा के मंदिर में प्रवेश करने से पहेले जरुर बजाएगा जैसे की मै,धन्यवाद् औरप्रणाम . रमेश

dineshaastik के द्वारा
July 21, 2012

शायद भगवान बहरा होता होगा, या भगवान बालक होगा, या हमारा अंधविश्वास, या क्यों बजाते नहीं मालूम, फिर भी बजाते, हमारी अज्ञानता

    Shiv के द्वारा
    August 11, 2012

    किसी की अगर आस्था है तो उसे मत तोड़ो । जैसे मुझे जितने भी दिनेश मिले है उन्होंने तोड़ने का काम ही किया है…. तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप खराब हो… उसी तरह अगर कुछ अंधविश्वास पंडितों ने पैदा कर दिए तो वेदों की शिक्षा गलत है, यह सोचना मूर्खता का प्रतिक है । जिस चीज़ के बारे में कुछ कहना है, उस बारे में पहले पूरी रिसर्च कर लो फिर बोलो ।

allindianrightsorganization के द्वारा
July 15, 2012

क्यों कि हम सब चाहते है कि कम से कभी तो भगवन आंख खोल कर कान लगा कर अपनी दुनिया को देख ले .जहा ……….की दुर्दशा से दुखी होकर शायद बह्ग्वान ने भी बहरा होने का स्वांग कर लिया है …इसी लिए हम उसके दरवाजे पर जाकर घंटी बजाते है ………..और वैसे भी हम भारतीय जरूरत से ज्यादा मुल्योको जीते है तो बिना घंटी बजाये किसी के घर में कैसे घुस सकते है

alkargupta1 के द्वारा
July 13, 2012

एक महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदत्त अर्थपूर्ण आलेख

विशाल श्रीवास्तव के द्वारा
July 13, 2012

प्राचीन काल में जब मंदिरों के पास ही पुजारी रहा करते थे तब बे पूरे समय मंदिर में नहीं रहते थे जब भी कोई पूजा करने वाले यजमान आते थे , तो वे पुजारी को बुलाने  के लिए मंदिर में लगी घंटी बजाते थे, धीरे धीरे यह ब्यवस्था मंदिर की एक सामान्य रीति के रूप में चलने लगी, बाद में नाद विज्ञान के आधार पर घंटी से जुड़े लाभ सामने लाए गएा ा

geeta choudhary के द्वारा
July 13, 2012

Aalekh pdkar bhut achcha lga

seemakanwal के द्वारा
July 12, 2012

जानकारीप्रद लेख ,धन्यवाद

ashokkumardubey के द्वारा
July 5, 2012

मंदिर में जाने से पहले घंटी तो मैं भी बजता था , पर मेरी समझ में यही आता था की इसे बजाकर अपनी उपस्थिति भगवन को जाहिर की जाती है लेकिन आज मैं इसके महात्म्य को अछि तरह जन गया एक महत्वपूर्ण लाभकारी जानकारी देने के लिए धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
July 2, 2012

बहुत उपयोगी जानकारी है.माँ भी हमेशा कहती थी जब भगवान् के घर में प्रवेश करते हैं तो उन्हें इसकी सूचना घंटी बजा कर अवश्य देनी चाहिए.भोग लगाते वक्त,आरती के वक्त यह घंटी का सुर संगीत उत्पन्न करता है और यह द्योतक है की यह हमारी खुशी से की गयी आपके प्रति(परम पिता) भक्ति है.स्वयं भी हम उस संगीतमय नाद को अपने अन्दर महसूस करने लगते हैं.

anilkumar के द्वारा
July 2, 2012

आपने मंदिर मे घंटी बजाने के कई कारण बताए, सब सार्थक ही प्रतीत होते हैं. इन सबके अतिरिक्त एक अन्य कारण मैने अपने बुजुर्गों से सुना था, वह बताना चाहूंगा। उनका कहना था कि घंटा बजा कर उसकी प्रतिक्षण मद्दिम होती आवाज को ही सुनते रहना चाहिए। इससे मंदिर में बिराजमान इष्ठ पर ध्यान केन्द्रित होता है, जो किसी भी पूजा या अराधना के पूर्व की महती आवश्यक्ता है

    rajuahuja के द्वारा
    July 3, 2012

    धन्यवाद बंधू ! आपकी बात अंतरात्मा को छू गई ! बात में दम है, पुनश्च धन्यवाद !


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