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दिन ढलते ही कुएं से बाहर आ जाती हैं यह आत्माएं...पढ़िए एक ऐसी हकीकत जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी

Posted On: 28 Jun, 2012 Others में

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भारत समेत लगभग सभी एशियाई देशों में अंधविश्वास प्रधान रूप से व्याप्त है. यही वजह है कि विदेशों की अपेक्षा भूत-प्रेत, जादू-टोना जैसी कहानियां एशियाई परिदृश्य से ज्यादा संबंध रखती हैं. शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जिसने अपने जीवन में कभी ऐसी कहानी ना सुनी हो जो सीधा भूत-प्रेत या पारलौकिक ताकतों से संबंध रखती है.


spiritफिल्मों और धारावाहिकों के अलावा आपने किताबों में भी कई ऐसी कहानियां पढ़ी होंगी जो प्रेत-आत्माओं जैसे विषयों पर आधारित होती हैं. ऐसे भी कई लोगों से आपका सामना अवश्य हुआ होगा जो काली दुनियां से हुए अपने व्यक्तिगत साक्षात्कार आपसे बांटना चाहते हैं. भले ही उनकी बात पर आप विश्वास ना करें या फिर विश्वास कर अत्यंत भयभीत हो जाएं लेकिन अगर उन्होंने एक बार ठान लिया कि वह आपको डरा कर ही रहेंगे. ऐसा करने से आप भी उन्हें नहीं रोक सकते.


बहुत से ऐसे किस्से हैं जो अलग-अलग दिखने वाले और भिन्न-भिन्न तरीके से लोगों को डराने वाले भूतों और आत्माओं का उल्लेख करते हैं. ऐसा ही एक किस्सा जापान से भी जुड़ा हुआ है. वैसे तो यहां कई प्रकार की आत्माएं होती हैं लेकिन आजकल जो सबसे ज्यादा प्रचलित है वह है ओकिकू.


इससे पहले कि आप ओकिकू को किसी व्यक्ति विशेष की आत्मा के संदर्भ में लें हम आपको बता दें कि ओकिकू किसी व्यक्ति की आत्मा नहीं बल्कि वह आत्माएं होती हैं जो कुएं में रहती हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जापान में कुएं से निकलने वाली आत्माओं से जुड़े बहुत से किस्से मशहूर हैं जिनमें एक महिला हर रात कुएं में से निकलकर पानी भरने आती है. इन कहानियों पर कई फिल्में और नाटक भी बन चुके हैं.


जापानी भूतों में ओकिकू सबसे पुराने किस्म के भूत हैं. निश्चित तौर पर तो कुछ नहीं कहा जा सकता कि इनका उद्भव कब हुआ लेकिन इनके होने का सबसे पहला प्रमाण सोलहवीं शताब्दी में प्राप्त हुआ था.


okikoo wellआपकी जानकारी के लिए बता दें कि जापान में तीन प्रकार के भूत होते हैं, ओबाके, यूकई, यूरेई. हत्या, आत्महत्या या फिर युद्ध में मारे गए लोगों की आत्माएं, जो बदला लेने के लिए भटकती हैं, उन्हें यूरेई कहा जाता है. जापानी लोगों का मानना है कि यह ओकिकू के रूप में भटकती हैं. यह रात को कुएं से बाहर आती हैं और अपने शत्रु से बदला लेकर वापस कुएं में चली जाती हैं. जापान में ओकिकू पर आधारित कई नाटक भी प्रदर्शित किए गए हैं.


ओकिकू से जुड़ी अधिकांश कहानियां टोक्यो गार्डन में स्थित कनाडियन एंबेसी परिसर में स्थित कुएं से जुड़ी हैं. यहां तक कि अब इस कुएं को ओकिकू वेल ही कहा जाने लगा है. इस कुएं का पानी कोई नहीं पीता. हालांकि यह बात कोई नहीं जानता कि इन कहानियों के पीछे कितनी सच्चाई है.


ओकिकू की पहली कहानी बन्चो सारायाशिकी जुलाई 1741 में टोयोटाकेका थिएटर में प्रदर्शित की गई थी. इस कहानी में बंचो नामक महिला एक समुराई के घर नौकरानी थी. समुराई उसपर प्रेम संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था लेकिन बंचो हर बार इंकार कर देती. समुराई ने क्रोधित होकर उस पर चोरी का इल्जाम लगा दिया और उसके सामने शर्त रखी या तो उसकी बात मान ले या फिर उसे सब के सामने चोर बना दिया जाएगा.


निराश बंचो ने कुएं में कूदकर अपनी जान गंवा दी और वह ओकिकू बन गई. तब से हर रात ओकिकू कुएं से बाहर निकलती है और पूरी रात भटकती रहती है. सुबह की पहली किरण के साथ ही वह वापस कुएं में चली जाती है. यह सिलसिला हर रात चलता है.

कितना सही है गुनाहों का प्रायश्चित करने के लिए यह तरीका…….!!!




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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoj के द्वारा
April 9, 2012

very scary


topic of the week



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