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जीवित शवों का कब्रिस्तान !!

Posted On: 15 Dec, 2011 Others में

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दुनियां का इतिहास जितना पुराना है उतना ही अद्भुत और रोचक भी. विभिन्न देशों की अपनी विशेषता और विशिष्टता तो है ही साथ ही सदियों पुरानी उनकी मान्यताएं और परंपराएं भी अपने आप में अनोखी और विचित्र हैं.



इटली दुनियां के प्राचीनतम देशों में से एक है. यही वजह है कि प्राचीन इटली निवासियों की परंपराएं जितनी पुरानी हैं उससे कहीं ज्यादा ये तत्कालीन समाज में व्याप्त रहस्यमयी और अविश्वसनीय मान्यताओं को भी बयां करती हैं.

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sicilyइटली के सिसली नगर में कापूचिन कैटाकॉम्ब नामक एक ऐसा कब्रिस्तान है जहां शवों को दफनाया नहीं जाता था बल्कि उनकी ममी बनाकर दीवारों पर लटका दिया जाता था. शवों पर ऐसे रासायनिक पदार्थ लगा दिए जाते थे जिसके कारण वह ना तो खराब होते हैं और ना ही दुर्गंध छोड़ते हैं.


चीखती सुनसान इमारतों का सच


1599 में ब्रदर सिल्वेस्ट्रो ऑफ गूबियो की ममी बनाने के साथ यह सिलसिला शुरू हुआ था. इस कब्रिस्तान की कहानी जितनी डरावनी है यहां पहुंचने का रास्ता भी बहुत भयानक है. कोई कमजोर दिल का व्यक्ति शायद अपने जीवन में यहां जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता.


एक अंधेरे रास्ते से गुजरती सीढ़ियां आपको इस कब्रिस्तान तक पहुंचाती हैं. कब्रिस्तान के दरवाजे पर साफ तौर पर लिखा गया है कि यहां आने वाले, अपनी सभी उम्मीदें छोड़ दें जिसे पढ़कर आप वापिस जाने का विचार भी बना सकते हैं. कब्रिस्तान के भीतर सैकड़ों शरीर दीवारों पर टंगे हैं. कुछ तो आपकी ओर ऐसे देख रहे हैं जैसे आपको जीवित देखकर उन्हें अच्छा नहीं लग रहा.


sicilytउल्लेखनीय है कि इस कब्रिस्तान में शवों को उनके सामाजिक दर्जे और स्थान के आधार पर जगह दी गई है. जो तत्कालीन समाज में व्याप्त सामाजिक और जातिगत भेदभावों की हकीकत बयां करता है.


सबसे पहला स्थान इस कब्रिस्तान की स्थापना करने वाले संतों को दिया गया है. संतों के बाद पुरुषों की श्रेणी रखी गई है. सभी पुरुषों ने अपने जमाने के कपड़े पहन रखे हैं. इसके बाद है महिलाओं का सेक्शन, जिसमें कुंवारी कन्याओं की पहचान के लिए उनके सिर पर धातु से बना बैंड पहनाया गया है. यहां प्रोफेसर, डॉक्टर्स और सैनिकों के सेक्शन भी अलग हैं.



sisily mummyहालांकि 1871 में ब्रदर रिकाडरे ने यह परंपरा बंद करवा दी थी. लेकिन वर्ष 1920 में रोसालिआ लॉबाडरे नामक एक बच्ची के शव की भी यहां ममी बनाई गई. बच्ची के शव को बचाए रखने के लिए इस पर कौन सा केमिकल लगाया गया है यह बात अभी तक कोई नहीं जानता. 1920 में जिस बच्ची का देहांत हो गया आज भी उसे देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि यह जीवित नहीं है. इसलिए इस ममी का नाम स्लीपिंग ब्यूटी रख दिया गया है.


हो सकता है आप में से कुछ लोग इस कब्रिस्तान को देखने के लिए योजना बना रहे हों लेकिन यहां जाने के लिए आपको बहुत हिम्मत और मानसिक रूप से दृढ़ रहना बहुत जरूरी है.


तीन बहनें जो अपना समय आत्माओं के साथ ही बिताती थीं !!



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

K.P.S.CHAUHAN के द्वारा
November 3, 2012

I like volkswagen car.

April 10, 2012

मेरी प्रार्थना है, की इस प्रकार की तस्वीरें न दी जाएँ. सब लोगों के ब्लॉग पर आजकल सदा नज़र आने वाली ये तस्वीरें हृदय विचलित करती हैं. कृपया किसी अच्छे, सकारात्मक, एवं ज्ञानवर्धक विषय को इतनी तरजीह दें. सादर.

    Rohan के द्वारा
    November 7, 2012

    कुछ रोमाँचक बातें जानने में अच्छा लगता है आजमा कर देखिये. और अगर दल लगता है तो आपके घर में कम्बल तो है न…………?

mohammaxd.shahrukh के द्वारा
April 6, 2012

ेेेेेेेेेेोिनदिनरपवलिीावदगदकगीा

shaktisingh के द्वारा
December 15, 2011

हमने तो सोचा था कि इस तरह की विचित्र चिजों पर केवल भारत का अधिकार है लेकिन यह तो दुनियाभर में फैला हुआ.


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