अद्भुत दुनिया

रंग-बिरंगी दुनिया की अद्भुत तस्वीर और अनोखे रंग-ढंग को दर्शाता ब्लॉग

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ASTRO HOME CALL NOW +91- 8239010000 . Love guru ma.one call change your life जब कहिँ नही हो काम ; तो यहा से ले समाधान आपकी समस्या का समाधान स्पेसलिस्ट: किया-कराया, प्रेम-विवाह, सौतन दुख, व्यापार, गृहक्लेश, दुश्मन से छुटकारा, वशीकरण, खुशहाल एवं प्रसन्नचित रहें, गृहक्लेश, व्यापारिक समस्या,विवाह में रुकावट, ऋण होना, ऊपरी समस्या, कुण्डली दोष, पति-पत्नी अनबन,प्रेम संबंधी, दुश्मनों से छुटकारा,मनचाहा प्यार प्रेमविवाह ,रूठे प्रेमी को मानना ,शादी के लिए माता पिता को मानना प्रेमी वशीकरण ,प्रेमिका वशीकरण पति -पत्नी वशीकरण सोतन मुक्ति दुसमन मुक्ति आपके जीवन की हर मुस्किल से मुस्किल समस्याओ का पक्का समाधान किया जायेगा जेसे :-मनचाहा वशीकरण 72 घंटो में १०१ % पक्का समाधान किया जायेगा एक बार संपर्क करो आपका जीवन ही बदल जायेगा +91-8239010000

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सर्कस वालों का दर्द भी उन्हीं दर्दमंदों के दर्द की तरह नजाना और नज़रअंदाज़ किया हुआ है जिनका कोई वोट बैंक नहीं है । मुझे लगता है कि इस अद्भुत विधा का भारत के बाहर तो जीवित रहना संभव है लेकिन भारत की भ्रष्ट व्यवस्था जिसमें धन और वोट के बैंक ही शक्ति-संतुलन का आधार हैं, में यह जीवित नहीं रह सकता । अब इसमें लागत बहुत अधिक है और आय बहुत कम । ऐसे में मनोरंजन और प्रेरणा का यह विलक्षण माध्यम कैसे जीवित बचे । अनेक भारतीय लोक कलाओं की भांति यह भी मृत्यु को प्राप्त होने जा रहा है । दुखद है यह । लेकिन क्या किया जाए ? कितनी विचित्र बात है कि सर्कस में जानवरों के प्रयोग पर तथाकथित पशु-प्रेमी और पेटा वाले भाग-भाग कर प्रतिबंध लगते हैं लेकिन वे देश में चल रहे असंख्य वधिक-गृहों यानि कि क़त्लखानों में प्रतिदिन मारे जा रहे निर्दोष पशुओं का जीवन नहीं बचा सकते क्योंकि उन्हें चलाने वाले लाखोंकरोड़ों वोटों पर नियंत्रण रखते हैं । ईश्वर ही सहायता करे भारत में सर्कस के प्रति समर्पित लोगों की ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: Sushil Kumar Sushil Kumar

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महाभारत में ऐसे कई प्रसंग मिल जाएंगे जब किसी राजकुमारी या महारानी को अपने वंश की रेखा को आगे बढ़ाने के लिए पति को छोड़, किसी अन्य पुरुष के बच्चों की माँ बनना पड़ा. आगे चलकर इन राजकुमारियों से उत्पन्न ये बच्चें पूरे महाभारत को ही बदल कर रख दिया या यूँ कहें, ये बच्चे महाभारत के मुख्य पात्र बनें. आइए आज महाभारत के उन राजकुमारियों और पटरानियों को याद करते हैं जिन्होंने अपने पति के होने किसी अन्य पुरुष के बच्चे की माँ बनी. shakuntala-dushyantal सत्यवती- महाभारत में एक प्रमुख पात्र हैं मत्स्यगंधा, जो बाद में सत्यवती के नाम से जानी गई. सत्यवती बहुत सुन्दर थी, इसी कारण शांतनु उनके रूप पर मोहित हो गए और विवाह कर लिया. विवाह के पश्चात दो पुत्र हुए चित्रांगद और विचित्रवीर्य. सत्यवती के पास एक तीसरा पुत्र भी था जिनका नाम व्यास था. जो बाद में महर्षि व्यास के नाम से जाने गए. सत्यवती ने व्यास को तब जन्म दिया जब वह कुमारी थी. महर्षि व्यास के पिता का नाम ऋषि पराशर था. Read: 5 पत्नी, 7 मंगेतर और 5 गर्लफ्रेंड वाले धोखेबाज मर्द का हुआ भंडाफोड़ अंबिका और अंबालिका- युवा अवस्था में चित्रांगद और विचित्रवीर्य का विवाह अंबिका और अंबालिका से हुआ, परन्तु विवाह के कुछ ही दिनों बाद चित्रांगद और विचित्रवीर्य की मृत्यु हो गई. भीष्म ने आजीवन विवाह नहीं करने की प्रतिज्ञा की थी. अपनी वंश-रेखा को मिटते देख सत्यवती ने इन दोनों राजकुमारियों को अपने तीसरे पुत्र व्यास से संतान उत्पन्न करने के लिए कहा. सत्यवती की आज्ञा से इन दोनों राजकुमारियों ने महर्षि व्यास से गर्भ धारण किया जिससे धृतराष्ट्र और पाण्डु का जन्म हुआ. Draupadi600 कुंती-इस कड़ी में अब बारी है राजकुमारी कुंती की जो बाद में महाराज पांडु की पत्नी और कुरूवंश की महारानी बनी. एक ऋषि के शाप से पांडु की कोई संतान नहीं थी. तब पांडु की आज्ञा से कुंती ने, पवनदेव और इंद्र से गर्भ धारण किया और तीन पुत्रों को जन्म दिया जो युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन कहलाए.

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए आर्थिक सहायता .. ? सवाल ही नहीं उठता , गलत जानकारी न दे... जब उनसे दान मांगा गया तो उन्होंने मन कर दिया फिर जब एक बार और कहा गया अरे कुछ तो दे दीजिये तो उसने अपना जूता फेक के दे दिया, बोला ले लो , तो दान मागने वाला भी बहुत चालक था, उसने उसी नगर में निजाम की जुटे की नीलामी चालू कर दी... निजाम की माँ ने देखा निजाम के जुटे की नीलम हो रही है , जुटे की नीलामी होना मतलब नहुत ख़राब दिन आ जाना ... ये उसकी माँ से देखा नहीं गया , उसने तुरंत ४ लाख रुपये दे कर निजाम के जुटे खरीद लिए... तो इससे सिद्ध होता है निजाम माधरचोद था उसकी माँ ने पैसे दिए थे अपने बेटे की इज्जत बचने के लिए... वैसे भी जो कुछ भी उसने दान किया वो सब भारत का ही पैसा था... तुम हिन्दुस्तनिओ को उल्लू बनाना कितना आसान है रे बाबा...

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धर्म स्थापना-सूत्र धर्म का उदेश्य (अभिप्राय) :- ईश्वरीय ब्रह्माण्ड को अक्षुण रखना ही धर्म है। परन्तु ब्रह्माण्ड के नियमों में जीव जीव जीवस्य भोजनम् भी है। जिसके कारण धर्म का अक्षरशः पालन करना तथा कराना असम्भव है। इसी कारण से मानव ने धर्म के पहल मानव शब्द को जोड़ कर मानवधर्म बनाया है। ताकि मानवाधिकारों को सुरक्षा प्रदान करके प्रत्येक मानव की जीवन को सुरक्षित, निर्भय, सुखी बनाया जा सके। अर्थात् वे परिश्रम (कर्म/कर्त्तब्य) ही धर्म हैं। जिन्हें अपना-अपना कर मानव अपनी ईच्छाओं की तृप्ति तो कर लेवे। परन्तु सम्पादित किए जाने वाले तथा किए गए कर्त्तब्यों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूपों से किसी भी दूसरे निर्दोष मानवों को दुःख नहीं पहुँचने पावे। परन्तु जिन बौद्धिक राजनीतिज्ञों को धर्म (कानून) को चिन्हित करने, अपनाने, अपनाने के लिए नागरिकों को विवश करने तथा कराने के उदेश्य से उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं। वे ही धर्म तथा कानून को अपने ऐय्याशी करने के लिए उपयोग कर रहें हैं। ऐय्याशी करने का तात्पर्य अपनी अनन्त ईच्छाओं को पूर्ण करना है। जिसे पूर्ण करने के लिए दूसरे निर्दोष मानवों के हकों को छीनना (शोषण करना) अनिवार्य होता है। जबकि कोई भी जीवात्मा या मानवात्मा अपना हक छीनने नहीं देना चाहती है। फलस्वरूप खूनी संघर्ष होना तथा महाविनाश होना आरम्भ हो जाता है। जैसा कि वर्त्तमान समय में विश्व भोग रहा है। धर्म को स्थापित करने के उदेश्य से ही ईश्वर को माना गया है। ताकि ईश्वरीय ब्यवस्था में स्थापित किए गए नारकीय प्रताड़ित जीवन से भयभीत हो कर तथा स्वर्ग में मिलने वाले अनन्त आनन्द प्राप्त करने के लाभ से मानव उत्प्रेरित होता रहे। क्योंकि ईश्वरीय ब्यवस्था कण-कण में विराजमान है। फलस्वरूप अँधेरा, उजाला तथा सुनसान में किए गए अपराधिक तथा धार्मिक कर्मों को ईश्वर देखता रहता है। फलस्वरूप झूठ का गुजारा नहीं हो पाता है। बल्कि कर्मों के लिए निर्धारित फल प्राप्त होना अटल (सुनिश्चित) होता है। इसीलिए श्रीकृष द्वारा गीताज्ञान में कहा गया है कि फल की चिन्ता करने की आवश्यक्ता नहीं है। क्योंकि ईश्वर निष्पक्ष, ईमानदार तथा न्यायी है। वह पक्षपात नहीं करता है। क्योंकि मानवात्माएँ ईश्वरीय आत्मा की ही सूक्ष्म रूप हैं। ईश्वर ने मानवों को विलक्षण, चिन्तनशील, तर्कशील तथा खोजी मस्तिष्क को प्रदान किया है। ताकि मानव स्वयं आत्ममंथन करके भी धार्मिक प्रावधानों की समीक्षा करता रहे तथा ईश्वरीय धर्म की आड़ में ठगा नहीं जा सके। अंधविश्वासी बनने की ईजाजत ईश्वर नहीं दिया है। जब-जब कानूनों का दुरूपयोग शासक ऐय्याशी करने के लिए करने लगता है। तब-तब मानवाधिकारों की हत्याएँ होना आरम्भ होतीं हैं। तब - तब ही मानवनिर्मित भौतिक समस्याएँ उत्पन्न होतीं हैं, विकराल बनतीं हैं तथा महाविनाश होने के लिए विश्व को अग्रसर करतीं रहतीं हैं। जिस प्रकार से वर्त्तमान विश्व महाविनाश की ओर ही तीब्रता से अग्रसर होता चला जा रहा है। महाविनाश को रोकने का एकमात्र उपाय धर्म की पुनर्स्थापना करना ही है। महाविनाशकारी पापी राजनैतिक शासकों का तथा उन्हें साथ देने वालों का सर्वनाश करना ही मूल धर्म है। यही गीता का ज्ञान भी है। पापी चाहे अपना वंश भी क्यों नहीं हो। पापी से मोह करना ही विनाश को प्रश्रय देना है।

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एक महिला घर पर अकेली थी, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.! उसने जैसे ही दरवाजा खोला तो एक अनजान आदमी खड़ा था.! देखते ही बोला: अरे आप तो बहुत ही खूबसूरत हैं..! महिला घबरा कर दरवाजा बंद कर देती है.! अगले तीन चार दिन तक ऐसा ही चलता रहता है, तो सभ्य महिला ने तँग आकर यह बात अपने पति को बताई..! पति बोला: तुम चिंता मत करो, आज जब वो आएगा तो मैं घर पर ही रहुंगा और दरवाजे के पीछे खड़ा रहूँगा.! तुम उससे बोल देना, "हाँ मैं सुन्दर हूँ, तुम्हे क्या.? "फिर मैं उसको मज़ा चखाता हूँ.!" . . दूसरे दिन जैसे ही वो आदमी आता है, पति दरवाजे के पीछे छिपा रहता है ! आदमी बोलता है: अरे आप तो बेहद खूबसूरत हैं.! महिला: हाँ मैं खूबसूरत हूँ, लेकिन तुम चार दिन से क्या चाह रहे हो.? आदमी विनम्रता के साथ हाथ जोड़ कर बोला: "बहन जी, यही विश्वास और अहसास आप अपने पति के अंदर जागृत कीजिये, ताकि वो मेरी बीबी का पीछा करना छोड़ दे..!

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...........   युवा कवि राहुल शायर की कलम    से   .........................................                                           अगर आज के युग में महाभारत होती तो............ ...द्रौपदी को सत्यमेव जयते पर बुलाया जाता, उसकी दुःख भरी कहानी सुनने के लिए ...दुर्योधन का बिग बॉस में बुलावा पक्का था ... ...संजय आँखों देखा हाल सुनते हुए विज्ञापन भी प्रसारित करता और अरबपति हो जाता .."अंधे का पुत्र अँधा" ट्वीट करने के बाद द्रौपदी पर धरा 66A के तहत मुकदमा चलता ...अभिमन्यु को ज्ञान की प्राप्ति हो जाती कि चक्रव्यूह से निकलना IRCTC पर टिकट कराने से कईं गुणा आसान है ...भीष्म पितामह को बाणों की शैया पर लेटे हुए देख मीडिया वाले पूछते "आपको कैसा लग रहा है" ...आधार कार्ड बनवाने का जब कौरवों का नंबर आता तो बेचारे कार्ड बनाने वालो को मानसिक तनाव की वजहसे छुट्टी लेनी पड़ जाती ...द्रौपदी के चीर- हरण का सीधा प्रसारण किया जाता ...दुर्योधन कहता कि द्रौपदी का चीरहरण इसलिए किया गया क्योंकि उसने उसको 'भैया" नहीं कहा ...बेचारे 102 कौरव सिर्फ 9 सस्ते गैस सिलेंडरो की वजह से भूखे मर जाते ...L'OREAL के विज्ञापन में द्रौपदी आती और कहती 5 Problems, 1 Solution ...युद्ध की हार-जीत पर अरबों रूपये का सट्टा लगा होता ...चक्रव्यूह से एक दिन पहले सारे न्यूज़ चैनल चक्रव्यूह तोड़ने का तरीका प्रसारित करते ...तथाकथित समाजसेवी "कौरवों को इन्साफ दिलवाओ, पांडवों ने पूरे परिवार का नरसंहार किया" के पोस्टर लेकर इंडिया गेट पर बैठे होते ..."हस्तिनापुर पर कौन राज़ करेगा ?" नाम से टीवी कार्यक्रम डेली शॉप की तरह हर रोज़ न्यूज़ चेनलो पर चलता ...भीम का ऑफिशियली वोर्नवीटा से कॉन्ट्रैक्ट होता ...द्रोणाचार्य पर शिक्षा के अधिकार न लागु करने का केस चलता.

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चूंकि यह श्री कृष्ण की तत्वदर्शी बुद्धि योजना थी,इसलिए इसे सफल तो होना हीं था, कृष्ण की योजना भला असफल कैसे हो सकती थी। अगर मानव मनोविज्ञान यह कहता है कि इस प्रकार पुत्र की हत्या का समाचार सुनकर कोई भी योद्धा , विशेषकर युद्धभूमि में युध्दरत महारथी द्रोणाचार्य जैसा योद्धा समाधिष्ठ होकर नही बैठेगा। वह तो और भी प्रचंड होकर शत्रु पक्ष पर टुट पड़ेगा और महा प्रलय मचा देगा, तो कहता रहे। महाभारत की कथा महर्षि वेद व्यास ने लिखी है, सच्चाई क्या थी, या तो श्री कृष्ण जानते थे या फिर महर्षि वेद व्यास। हमारे पास न तो तत्व ज्ञान है और न हीं दिव्य दृष्टि। इसलिए हमारा तो कुछ कहना , न कहना दोनो हीं व्यर्थ है।

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पूरी बात तओ बताओ साईं बाबा कहते रहे पूरी ज़िदगी ..सबका मालिक एक,अल्लाह मालिक ,तो भाई इससे तो साफ़ जाहिर होता है वो सिर्फ मुस्लिम धर्म hi मानते थे और अल्लाह कोhi सबका मालिक मानते थे, हमारे देश में हिन्दुओ को मिटने के लिए सदिओप से हमले हो रहे है जिनमे से एक है सूफीओं द्वारा लेकियन हिन्दू कभी ख़तम नहीं हो सकते.और आज के दौर में मुस्लिम पूरी तरह से हिन्दुओ की कत्ले आम की बाते करते है .उदहारण के लिए पकिस्तान का जाहिल हामिद साला हर बात कोई भी होने दो वह किसी न किसी बहाने से  इ जरूर बोलेगा... गजवा इ हिन्द ... मतलब भारत पर मुस्लिमो की जीत हिन्दुओ का क़त्ल ये है मुस्लिमो की सच्चाई .हिंदों अगर अब भी नहीं समझे तो शायद आने वाले २०-२५ वर्षो में हिन्दुस्तान.का नाम मुगालिस्तान हो जायेगा .और हिन्दुओ को अपनी जान बचाकर या तो नेपाल भागना पड़ेगा या फिर मुसलमान बनाना पड़ेगा... वन्देमतारम

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हेलो RAJAT RAJ गेहलोत ,सद्गुरुजी , ये सब पढ़लो ! क़ुरान की बात है क़ुरान 57.19 Allah our uskay rasool per jo emaan rakhtay hain wohi log apney rab kay nazdeek siddiq our shaheed hain unkay liye unka ajar our unka noor hai our jo log kufur kertay hain our humari aayaton ko jhutlatay hain woh jahannomi hain. 57.20 Khoob jaan rakho kay duniya ki zindagi sirf khel tamasha zeenat aur aapas main fakhar (o-ghuroor) our maal-o-olad main aik ka doosary say apney aap ko ziyadah batlana jaisay barish aur iss ki padawaar kisanon ko achi maloom hota hai phir job woh khushk hojati hai to zard rang main iss ko tum dejhtey ho phir woh bilkul choora choora hojatai hai our aakhirat main sakht azab aur Allah ke maghfirat our razamandi hai our duniya ki zundagi ba-juz dhokay kay saman kay our kuch bhi to nahi. 57.21 (Aao) doro apney rab ki maghfirat ki taraf our uss jannat ki taraf jiss ki wussat kay barabar hai yeh unkay liye banaee gaee hai jo Allah per aur uskay rasoolon per emaan rakhtay hain yeh Allah ka fazal hai jissay chahye dey aur Allah bara fazl wala hai. 57.22 Na koi museebat duniya main aati hai na (Khaas) tumhari jaanon main magar iss say pehlay kay hum usko peda keran woh aik khaas kitab main likhi hui hai yeh (kaam) Allah taalaa per (bilkul)aasan hai. 57.23 Takay tum apney say fol shuda kissi cheez per ranjeedah na hojaya kero our na attakerdah cheez per itra jao.aur itranay walay shekhi khoron ko Allah pasand nhifarmata.

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क्या वाकई में ऐसा हो सकता हे , पसीने कि बूंद से बच्चा पैदा होना ? पर हनुमान जी की शादी हुई ये प्रमाण है , हनुमान जी के विवाह का रहस्य... संकट मोचन हनुमान जी के ब्रह्मचारी रूप से तो सभी परिचित हैं.. उन्हें बाल ब्रम्हचारी भी कहा जाता है... लेकिन क्या अपने कभी सुना है की हनुमान जी का विवाह भी हुआ था ?? और उनका उनकी पत्नी के साथ एक मंदिर भी है ?? जिसके दर्शन के लिए दूर दूर से लोग आते हैं.. कहा जाता है कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के बाद घर मे चल रहे पति पत्नी के बीच के सारे तनाव खत्म हो जाते हैं. आन्ध्र प्रदेश के खम्मम जिले में बना हनुमान जी का यह मंदिर काफी मायनों में ख़ास है.. ख़ास इसलिए की यहाँ हनुमान जी अपने ब्रम्हचारी रूप में नहीं बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान है. हनुमान जी के सभी भक्त यही मानते आये हैं की वे बाल ब्रह्मचारी थे. और बाल्मीकि, कम्भ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में बालाजी के इसी रूप का वर्णन मिलताहै.. लेकिन पराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का उल्लेख है. इसका सबूत है आंध्र प्रदेश के खम्मम ज़िले में बना एक खास मंदिरजो प्रमाण है हनुमान जी की शादी का। ये मंदिर याद दिलाता है रामदूत केउस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था। लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि भगवानहनुमान जी बाल ब्रह्मचारी नहीं थे। पवनपुत्र का विवाह भी हुआ था और वो बाल ब्रह्मचारी भी थे। कुछ विशेष परिस्थियों के कारण ही बजरंगबली को सुवर्चला के साथ विवाह बंधन मे बंधना पड़ा। हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपनागुरु बनाया था। हनुमान, सूर्य से अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे... सूर्य कहीं रुक नहीं सकते थे इसलिए हनुमान जी को सारा दिन भगवान सूर्य के रथ के साथ साथ उड़ना पड़ता और भगवान सूर्य उन्हें तरह- तरह की विद्याओं का ज्ञान देते। लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय सूर्य के सामने एक दिन धर्मसंकट खड़ा हो गया। कुल ९ तरह की विद्या में से हनुमान जी को उनके गुरु ने पांच तरह की विद्या तो सिखा दी लेकिन बची चार तरह की विद्या और ज्ञान ऐसे थे जो केवल किसी विवाहित को ही सिखाए जा सकते थे. हनुमान जी पूरी शिक्षा लेने का प्रण कर चुके थे और इससे कम पर वो मानने को राजी नहीं थे। इधर भगवान सूर्य के सामने संकट थाकि वो धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विद्याएं नहीं सिखला सकते थे। ऐसी स्थिति में सूर्य देव ने हनुमान जी को विवाह की सलाह दी.. और अपने प्रण को पूरा करने के लिए हनुमान जी भी विवाह सूत्र में बंधकर शिक्षा ग्रहण करने को तैयार हो गए। लेकिन हनुमान जी के लिए दुल्हन कौन हो और कहा से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे.. ऐसे में सूर्यदेव ने अपने शिष्य हनुमान जी को राह दिखलाई। सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमान जी के साथ शादी के लिए तैयार कर लिया। इसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई। इस तरह हनुमान जी भले ही शादी के बंधन में बांध गए हो लेकिन शाररिकरूप से वे आज भी एक ब्रह्मचारी ही हैं. पराशर संहिता में तो लिखा गया है की खुद सूर्यदेव ने इस शादी पर यह कहा की - यह शादी ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ही हुई है और इससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य भी प्रभावित नहीं हुआ .. , , ,

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भगतसिंह की थी आवाज समाजवाद का आएं राज । हम ऐसा भारत चाहते है | _ सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया मैं शहीद ए आजम भगतसिंह के उक्त लेख से पूर्णतया सहमत हंू वै से मैं बचपन से ही नास्तिक रहा हंू और मैं नास्तिक क्यों हंू उस को छात्र जीवन में समाचार - प्रत्रों में प्रकाशित लेख पढ.ने पर मेरा यकीन और मजबूत हुआ हैं । इसका मतलब यह नहीं हैं कि मैं किसी भी आस्तिक या धर्म, महजब इत्यादि की स्वतंत्रता, समानता का सम्मान करना नहीं भूला हंू । यही विचार भगतसिंह से ही सीख हैं, ग्रहण किया हैं । मेरे गृह जिले शाहपुरा जिला भीलवाड.ा राजस्थान में जब वहां था तब कई मतर्बा शहादत दिवस पर कई आयोजन किएं थे । अब दिल्ली में जब कभी मेरे क्षेत्र रोहिणी में ऐसे आयोजन होने पर सहभागी बनने का कोई अवसर नहीं छोड.ता हंू । 23 मार्च को लगााम मानवधिकार संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सह भागी बनने का शुअवसर जो मिल गया । मेरा अब भी वर्गविहीन समाज की स्थापना में पूरा यकीन हैं यही तो भगतसिंह का सपना था । भगतसिंह की थी आवाज समाजवाद का आएं राज । आज भी मेरा वही विश्वास है। जमाना जरूर बदलेगा । हम ऐसा भारत चाहते है | सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया ,दिल्ली 9560681342 prabhatkhurdiya@yahoo.co.i

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श्रीमान सम्पादक महोदय जानिये तंत्र विद्या और शमशान का रिश्ता नामक 3 जनवरी का ये लेख बिलकुल गलत तरीके से एक अघोरी को परिभाषित करता है....आपने जो अपने लेख में लिखा है की एक अघोरी को इंसानों के साथ रहना पसंद नहीं होता ये एवं उसको देखकर लोग डर जाते हैं ये सब गलत है! श्रीमान आपको नहीं पता की अघोर का अर्थ क्या है...आपने या आपकी कथित टीम ने जो भी अघोरी के बारे में लिखा है वो घ्रणित रूप में दिखाता है अघोरी की छवि को! आपको लोगो को सच्चाई बतानी चाहिए लेकिन बशर्ते पहले आप स्वं सच्चाई से परिचित हों! सच तो ये है की आपने अघोरी देखा ही नहीं जो भी आपने शमशान में देखे या सुने हैं वो सभी बहरूपिये हैं जिनका ना कोई गुरु है ना ही कोई गाइड वो मानसिक रूप से बीमार हैं एवं उनका कार्य है लोगो को गालिया देना, गंदे रहना एवं मॉस मदिरा का पान करना! आपके द्वारा लिखा गया यह वाक्य भी गलत है की इनका कार्य पारलोकिक चीजो पर आधिपत्य करना है एवं ये खोपड़ी में खाते हैं! ऐसे काम करने वाले वही कतिपय बहरूपिये हैं! अघोर शब्द कितना दिव्य पावन एवं गूढ़ अर्थ युक्त है ये आप तभी जान सकते हैं जब किसी ग्यानी से भेंट हो! हाँ एक बात और आसाम का कामख्या महापीठ आज भी तंत्र का गढ़ है एवं शायद आपको आश्चर्य होगा की ये तंत्र का सर्वोच्च पीठ है और बाकी तंत्र पीठ कहाँ कहाँ हैं ये सब भेंट के उपरान्त ही संभव होगा! अतः श्रीमान जी किसी भी विषय में ज्ञानाभाव के कारण कुछ भी लिखना गलत है! यदि आप या आपकी टीम तंत्र के बारे में विस्तार से जानकर लोगो को सच्चाई दिखाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है में मेरठ में रहता हूँऍ यदि मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलना हो तो मेल कर दे में आपको अपना पता दे दूंगा! मुझे आप इस पारलौकिक दुनिया का रिसर्च स्कॉलर कह सकते हैं एवं में इस दुनिया की थ्योरी एवं प्रैक्टिकल दोनों का ज्ञान रखता हूँ! जो की आपके लिए पर्याप्त है!

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श्रीमान सम्पादक महोदय जानिये तंत्र विद्या और शमशान का रिश्ता नामक 3 जनवरी का ये लेख बिलकुल गलत तरीके से एक अघोरी को परिभाषित करता है....आपने जो अपने लेख में लिखा है की एक अघोरी को इंसानों के साथ रहना पसंद नहीं होता ये एवं उसको देखकर लोग डर जाते हैं ये सब गलत है! श्रीमान आपको नहीं पता की अघोर का अर्थ क्या है...आपने या आपकी कथित टीम ने जो भी अघोरी के बारे में लिखा है वो घ्रणित रूप में दिखाता है अघोरी की छवि को! आपको लोगो को सच्चाई बतानी चाहिए लेकिन बशर्ते पहले आप स्वं सच्चाई से परिचित हों! सच तो ये है की आपने अघोरी देखा ही नहीं जो भी आपने शमशान में देखे या सुने हैं वो सभी बहरूपिये हैं जिनका ना कोई गुरु है ना ही कोई गाइड वो मानसिक रूप से बीमार हैं एवं उनका कार्य है लोगो को गालिया देना, गंदे रहना एवं मॉस मदिरा का पान करना! आपके द्वारा लिखा गया यह वाक्य भी गलत है की इनका कार्य पारलोकिक चीजो पर आधिपत्य करना है एवं ये खोपड़ी में खाते हैं! ऐसे काम करने वाले वही कतिपय बहरूपिये हैं! अघोर शब्द कितना दिव्य पावन एवं गूढ़ अर्थ युक्त है ये आप तभी जान सकते हैं जब किसी ग्यानी से भेंट हो! हाँ एक बात और आसाम का कामख्या महापीठ आज भी तंत्र का गढ़ है एवं शायद आपको आश्चर्य होगा की ये तंत्र का सर्वोच्च पीठ है और बाकी तंत्र पीठ कहाँ कहाँ हैं ये सब भेंट के उपरान्त ही संभव होगा! अतः श्रीमान जी किसी भी विषय में ज्ञानाभाव के कारण कुछ भी लिखना गलत है! यदि आप या आपकी टीम तंत्र के बारे में विस्तार से जानकर लोगो को सच्चाई दिखाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है में मेरठ में रहता हूँ मेरी मेल id है avdhootyogesh@gmail.com यदि मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलना हो तो मेल कर दे में आपको अपना पता दे दूंगा! मुझे आप इस पारलौकिक दुनिया का रिसर्च स्कॉलर कह सकते हैं एवं में इस दुनिया की थ्योरी एवं प्रैक्टिकल दोनों का ज्ञान रखता हूँ! जो की आपके लिए पर्याप्त है!

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My horror story I would like to share my experience to all of you That’s the story I was working in Delhi at international call center There was May best friend whose name was satish He was belong from Rajasthan at near abu road his village name Was delder it was famous for spirits so he invited me for his wedding So of course it was a long run so though let me go to his village before three days Ago first I went to Jaipur to meet my friend who will also come with me For join marriage of my friend so he had a car & we started a journey along with each other some time he driven a car or some time by my self Near mid night 2 o’clock our car got some problem it was stop before 15 km of his house We tried to start a car be we un able to success thought now what to do at that time One stranger person came to us & he told us that there will be a garage near 3 km ahead It was dark night but garage owner provide service for 24 hours so at that time my friend told me that so just go ahead and bring any technician to toe our vehicle i thought its okay I just bring out my hands free put in my ears play music I started to walk do 1& half kilometer I did not feeling any thing but & I was going ahead suddenly I felt some one follows me I was little bit scared I walking alone I here a noise of some who calling me stop sir don’t go there I was scared I was running on road & I show there was a beautiful lady in that dark night i asked her who r u she replied I m belong from this village So asked what you doing here in this dark night she said I m going to home from my farm She asked if you don’t mind suppose I m joining you I said that’s ok she asked me for my name I replied I asked for her name she said kavita we walking with each other suddenly what there was very dark & haunted tree right ahead the 3 ladies seating under that tree they all of calling me hey man please come here kavita told me that please don’t consternate on them walk right ahead I said why she said shut your mouth & do as I said. I said ok The tree was coming near & what happen next I was shock suddenly the face of that three ladies has been changed it very scary & haunted I start to chanting hanuman chalisa we were walking fast & finally I show light of that garage & kavita told me that I dropped u at your destination where u wanna go so bye hardik I asked where u going she replied nothing I asked her one more question why you did not scared of that three lady she replied every spirits are not bad you are not going to believe I did not sleep for next three day even I could not close my eyes still I m not believing that I spend near 45 minutes with stranger spirits Still I m not for get that scary or haunted face of that three bad spirits who really wanted to kill me

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के द्वारा: Raj Raj

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